इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दूसरे दिन सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत में नए अमेरिकी राजदूत और सीएए का विरोध करने वाले एरिक गार्सेटी की नियुक्ति के सवाल पर जवाब दिया. एरिक गार्सेटी ने पहले कहा था कि भारत में सीएए कानून मुस्लिमों के लिए भेदभावी है, जिसको लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि नागरिकता के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग मानदंड हैं.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगे कहा कि अगर आप यूरोप को देखेंगे तो वहां जर्मनी के लोगों को आसानी से नागरिकता मिल जाती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई पाकिस्तानी हिंदू है जिसका उत्पीड़न किया गया हो, वह भारत की जगह और कहां जाएगा.
जयशंकर ने आगे कहा कि यह एक ऐसी सच्चाई है, जिसे हर कोई जानता है. विदेश मंत्री ने आगे हल्के अंदाज में एरिक गार्सेटी को लेकर कहा कि आने दीजिए उन्हें, प्यार से समझा देंगे.
चीन पर क्या बोले एस जयशंकर?
सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन और भारत के वर्तमान में संबंधों को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चीन और भारत के संबंधों का यह सबसे चुनौतीपूर्ण समय चल रहा है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगे कड़े तेवर करते हुए चीन को लेकर कहा कि आप समझौतों का उल्लंघन करके यह नहीं दिखा सकते हैं कि सबकुछ सामान्य है. पहले जो समझौते हुए, उनका चीन ने उल्लंघन किया. हम साफ कर चुके हैं कि समझौतों का उल्लंघन नहीं सहेंगे.
भारत को इस दशक के अंत तक कहां देखते हैं?
इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि देश और समाज अब बदल रहा है. हम वैश्विक और गतिशील होते जा रहे हैं. समाज अब बदल चुका है और अलग नजरिए से आगे बढ़ रहा है. विदेश मंत्री ने आगे कहा कि इस दशक के अंत तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे ताकतवर देश बनकर उबरेगा.
कौन हैं एरिक गार्सेटी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एरिक गार्सेटी को भारत में अमेरिका का नया राजदूत नियुक्त किया है. लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर रह चुके एरिक गार्सेटी को जो बाइडन का वफादार माना जाता रहा है. एरिक गार्सेटी ने नरेंद्र मोदी सरकार के सीएए कानून पर भी सवाल खड़े किए थे. एरिक गार्सेटी ने साल 2021 में अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी सदन सीनेट को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर वह भारत में राजदूत नियुक्त होते हैं तो सीएए के संबंध में कथित मानवाधिकारों के मुद्दों को उठाएंगे.