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सिंगापुर: भारतीय मूल के प्रख्यात डॉक्टर जरनैल सिंह का निधन, संचारी रोग के थे एक्सपर्ट

जनरैल सिंह की उम्र 67 साल थी. वह सिविल ऐविएशन मेडिकल बोर्ड ऑफ सिविल ऐविएशन अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर (CAAS) के पहले चेयरमैन थे. उन्होंने कई ग्लोबल और स्थानीय ऐविएशन मेडिसिन संगठनों का नेतृत्व किया था.

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एक कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार लेते डॉक्टर जरनैल सिंह (Photo: Napier Healthcare)
एक कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार लेते डॉक्टर जरनैल सिंह (Photo: Napier Healthcare)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 67 साल की उम्र में डॉ. जरनैल सिंह का निधन
  • सिंगापुर में हुई डॉ. जरनैल सिंह की मौत
  • संचारी रोग के रोकथाम में उनका अहम योगदान

भारतीय मूल के डॉक्टर जनरैल सिंह का सिंगापुर में निधन हो गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह हवा के जरिए फैलने वाले संचारी रोग की रोकथाम में एक्सपर्ट थे. जनरैल सिंह की उम्र 67 साल थी. वह सिविल ऐविएशन मेडिकल बोर्ड ऑफ सिविल ऐविएशन अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर (CAAS) के पहले चेयरमैन थे. उन्होंने कई ग्लोबल और स्थानीय ऐविएशन मेडिसिन संगठनों का नेतृत्व किया था.

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साल 2003 में Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS) के सामने आने के दौरान भी उन्होंने काफी मदद की थी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग किया था. साल 2004 में सिंगापुर की पहली नॉन स्टॉप अल्ट्रा लॉग रेंज कमर्शियल फ्लाइट (सिंगापुर से न्यूयॉर्क) में भी उन्होंने सराहनीय योगदान दिया था. सिंह की मौत 6 फरवरी को सिंगापुर में हुई. उनके निधन के बाद सिविल ऐविएशन और मेडिकल सेक्टर की बड़ी हस्तियों ने शोक जताया है. जरनैल सिंह अपने पीछ अपनी पत्नी और बच्चे छोड़ गए हैं.

सिंगापुर के टैन टॉक सेंग हॉस्पिटल के प्रोफेसर च्यू चिन हिन ने कहा कि सिंगापुर के ऐविएशन मेडिसिन सेक्टर में उन्हें अभी और लंबी पारी खेलने थी. उन्होंने यंग मेडिक एक्जामिनर्स की ट्रेनिंग पर फोकस किया था जो पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की सेहत का ध्यान रखते हैं. पिछले कुछ दशकों में ऐविएशन मेडिसिन का क्षेत्र काफी आधुनिक हुआ है और जरनैल सिंह का इसमें काफी अहम योगदान था. उन्हें उनके कार्यों के लिए हमेशा याद किया जाएगा. उन्होंने ऐविएशन मेडिसिन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए थे. उनकी सलाह की वैश्विक स्तर पर कद्र की जाती थी.

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बता दें कि ऐविएशन मेडिसिन एयर क्रू की सेहत पर आधारित है. ऐविएशन मेडिसिन एयर ट्रैवेल के जरिए फैलने वाली बीमारी की रोकथाम के लिए काम करती है. इसके जरिए  महामारी को एक द्वीप या फिर एक देश तक रोकने की कोशिश की जाती है.

 

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