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अमेरिका में भारतीय छात्रों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं. कई छात्रों की मौत भी हो चुकी है. लगातार निशाने पर भारतीय छात्रों को लेकर अब व्हाइट हाउस ने प्रतिक्रिया दी है.
व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा, राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी सरकार भारतीय छात्र-छात्राओं पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.
व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि सरकार भारतीय और भारतीय अमेरिकी छात्रों पर हो रहे हमलों को रोकने के काम में जुटी हुई है.
जॉन किर्बी ने कहा कि नस्ल, लिंग, धर्म या किसी भी अन्य कारण से हिंसा की कोई जगह नहीं है. अमेरिका में तो ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है.
उन्होंने कहा, राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनका प्रशासन हो रहे हमलों को नाकाम करने और रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. इसके लिए राज्य और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और हर मुमकीन कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इन हमलों के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें इसके जवाबदेह ठहाराय जाएगा.
जनवरी में जॉर्जिया के लिथोनिया में एक ड्रग एडिक्ट ने भारतीय छात्र विवेक सैनी पर हमला कर दिया था. बाद में विवेक की मौत हो गई थी. वहीं, इसी महीने इंडियाना वेसलिन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्र सैयद मजाहिर अली पर भी हमला हुआ था.
इससे पहले इलिनोइस यूनिवर्सिटी के छात्र अंकुल धवन की मौत का मामला सामने आया था. परड्यू यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले नील आचार्य की भी ज्यादा शराब पीने और रातभर कम तापमान में रहने के कारण मौत हो गई थी. इनके अलावा ओहायो में लिंडनर स्कूल ऑफ बिजनेस में पढ़ने वाले श्रेयस रेड्डी की भी संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी.
भारतीय अमेरिकी समुदाय के नेता अजय जैन भूटोरिया ने कहा कि अलग-अलग घटनाओं में इन छात्रों की मौतों से बहुत परेशान हैं. उन्होंने अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने की बात पर जोर दिया. साथ ही ये भी कहा कि कॉलेज अधिकारियों और स्थानीय पुलिस को इन चुनौतियों का तुरंत समाधान करना चाहिए.
भूटोरिया ने कहा कि इन घटनाओं से भारत में माता-पिता और परिवार चिंतित हैं. अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाने जरूरी हैं.
संसद के बजट सत्र में सरकार ने विदेशों में भारतीय छात्रों की मौत से जुड़े आंकड़े पेश किए थे. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2 फरवरी को बताया था कि 2018 से अब तक विदेश में 403 भारतीयों की मौत हो चुकी है. उन्होंने बताया था कि ये मौतें अलग-अलग कारणों से हुई हैं.
उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा मौतें कनाडा और यूके में हुई है. 2018 से अब तक कनाडा में 91 भारतीय छात्रों की मौत हो चुकी है. इसके बाद यूके में 48, रूस में 40, अमेरिका में 36, ऑस्ट्रेलिया में 35, यूक्रेन में 21 और जर्मनी में 20 छात्रों की मौत हुई है.
आंकड़ों के मुताबिक, साइप्रस में 14 भारतीय छात्रों की मौत हुई है. वहीं, फिलिपींस और इटली में 10-10, जबकि कतर, चीन और किर्गिस्तान में 9-9 भारतीय छात्रों की जान गई है.