अमेरिका की बाइडेन सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे भारतीयों को जबरदस्त फायदा होने जा रहा है. अमेरिकी सरकार ने H-1B वीजा के डोमेस्टिक रिन्यूअल का पायलट प्रोग्राम शुरू किया है. ये प्रोग्राम 24 जनवरी से शुरू होगा. यह एच-1बी वीजा पायलट प्रोग्राम सिर्फ भारतीय और कनाडाई नागरिकों के लिए ही है.
इसके तहत अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कनाडाई नागरिकों को लाभ होगा. यह प्रोग्राम ऐसी कंपनियों के लिए भी है, जिनके एच-1बी कर्मचारी काम के लिए विदेश जाना चाहते हैं.
अमेरिका ने ये फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के कई महीनों बाद लिया है. जून में जब पीएम मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर गए थे, तभी H-1B वीजा की रिन्यू प्रक्रिया को और आसान करने की तैयारी पर काम चल रहा था. पीएम मोदी की यात्रा के समय ही इस प्रोग्राम की औपचारिक घोषणा की गई थी.
कैसे रिन्यू होगा वीजा?
H-1B वीजा गैर-अप्रवासी वीजा है. ये अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की मंजूरी देता है. जब भी कोई व्यक्ति अमेरिकी कंपनी में नौकरी करता है तो उसे H-1B वीजा जारी किया जाता है. अब तक ये होता था कि अगर किसी व्यक्ति का H-1B वीजा एक्सपायर हो गया है तो उसे रिन्यू करवाने के लिए दोबारा अपने देश लौटना पड़ता था. लेकिन अब रिन्यू प्रक्रिया के लिए स्वदेश नहीं आना पड़ेगा.
अब अमेरिका में रहते हुए अपना वीजा मेल कर सकते हैं और फिर इसे रिन्यू कर दिया जाएगा. रिन्यूअल की प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति को अमेरिका से बाहर रहने की जरूरत नहीं होगी. उन्होंने साफ कर दिया कि वीजा रिन्यूअल की ये प्रक्रिया सिर्फ वर्क वीजा के लिए है. बाकी दूसरी तरह के वीजा के लिए प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
भारतीयों को कैसे होगा फायदा?
बाइडेन सरकार के इस फैसले को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेता अजय जैन भूटोरिया ने 'महत्वपूर्ण' बताया है. H-1B वीजा की रिन्यूअल प्रक्रिया को आसान बनाने से लगभग 10 लाख लोगों को फायदा होगा और इसमें बड़ी संख्या भारतीयों की होगी. अमेरिका में लाखों भारतीय काम कर रहे हैं. 2022 में अमेरिकी सरकार ने 4.42 लाख लोगों का H-1B जारी किया था. इनमें से 73 फीसदी भारतीय थे.
क्या है H1B वीजा?
एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है. एच1बी वीजा आमतौर पर उन लोगों को दिया जाता है जो अमेरिका में काम करने के लिए जाते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो ये वीजा अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी है. इसके बाद उसे ग्रीन कार्ड दिया जाता है. इस वीजा की वैलिडिटी छह साल की होती है.
अमेरिकी कंपनियों की डिमांड की वजह से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स इस वीजा सबसे अधिक हासिल करते हैं. जिन लोगों का एच-1बी वीजा की अवधि खत्म हो जाती है तो वह फिर अमेरिकी नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकते हैं. एच-1बी वीजाधारक शख्स अपने बच्चों और पत्नी के साथ अमेरिका में रह सकता है.