
अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. इसके लिए देश की दोनों बड़ी पार्टियों डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन ने कमर कस ली है. लेकिन इन सबके बीच अमेरिका में सात नवंबर को स्टेट और स्थानीय स्तर के चुनाव होने जा रहे हैं. इन चुनावों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिसे लेकर भारतीय समुदाय उत्साहित है.
स्टेट लेजिस्लेचर (विधायी चुनाव) से लेकर मेयर और गवर्नर पदों के लिए होने जा रहे इन चुनावों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकी उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें वर्जीनिया की लाउडाउन काउंटी सीट से भारतीय मूल की पूजा खन्ना से लेकर पेंसिल्वेनिया के मोंटगोमारी काउंटी से नील मखीजा और स्टेट सीनेट के लिए सुहास सुब्रमण्यम चुनावी मैदान में हैं. इसके अलावा अन्य उम्मीदवारों में नलिनी कृष्णनकुट्टी, मिनिता सांघवी, विन गोपाल, ऋषि बग्गा, सीमा दीक्षित, प्रिया तमिलारासन, कन्नन श्रीनिवासन, साजी मैथ्यू, अश्विनी उदगांवकर और बलवीर सिंह जैसे भारतवंशी भी हैं.
पूजा खन्ना
मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट पूजा खन्ना वर्जीनिया के लाउडन काउंटी से चुनावी मैदान में उतरी हैं. उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी ने टिकट दिया है. अगर वह चुनाव जीतती हैं तो वह किसी काउंटी के सुपरवाइजर के तौर पर काबिज होने वाली एशियाई मूल की पहली अमेरिकी नागरिक होंगी.
वर्जीनिया के ड्यूलस जिले में एशियाई मूल के अमेरिकी नागरिकों की आबादी 35 फीसदी है. पूजा के तीन बच्चे हैं और वह लंबे समय से मेंटल हेल्थ के लिए जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं.
नील मखीजा
पेशे से वकील और शिक्षक भारतीय मूल के नील मखीजा डेमोक्रेट की ओर से पेंसिल्वेनिया के मोंटगोमेरी काउंटी के कमिश्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. अगर वह चुनाव जीतते हैं तो पेंसिल्वेनिया के इतिहास में चुनाव जीतने वाले भारतीय मूल के पहले अमेरिकी होंगे जो कमिश्नर बनेंगे.
मखीजा बीते 20 सालों से राजनीति में हैं. नागरिक अधिकारों के लिए व्हाइट हाउस में आमंत्रित किए जाने वाले 13 नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं में नील भी थे. खुद राष्ट्रपति बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस उन्हें नागरिक अधिकारों पर सलाह के लिए व्हाइट हाउस आमंत्रित कर चुकी हैं. वह ओबामा के कार्यकाल में भी व्हाइट हाउस को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
सुहास सुब्रमण्यम
भारतीय मूल के सुहास डिस्ट्रिक्ट 32 से स्टेट सीनेट का चुनाव लड़ रहे हैं. वह ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस के तकनीकी सलाहकार रह चुके हैं. इसके साथ ङी अमेरिकी सीनेट न्यायिक समिति को भी सेवाएं दे चुके हैं. ओबामा का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी भी व्हाइट हाउस से रुखसती हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने खुद की कंसल्टिंग फर्म शुरू की. उनका परिवार 1979 में अमेरिका आकर बस गया था.
नलिनी कृष्णनकुट्टी
भारतीय मूल की नलिनी अमेरिका की बोरो (Borough) की गवर्निंग बॉडी के लिए स्टेट कॉलेज काउंसिल की सदस्य के तौर पर दोबारा चुनावी मैदान में हैं. इंजीनियर से लेखक बनीं नलिनी शरणार्थियों के लिए काम कर रही हैं. केरल में जन्मी और मुंबई में पली-बढ़ी नलिनी ने ग्रैजुएशन के लिए पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी का रुख किया था. बाद में वह इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगीं. डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ रहीं नलिनी हेट क्राइम के खिलाफ मुखर आवाज उठा रही हैं.
विन गोपाल
डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से भारतीय मूल के अमेरिकी विन गोपाल न्यूजर्सी स्टेट सीनेट डिस्ट्रिक्ट 11 से उम्मीदवार हैं. वह फिलहाल इसी सीट से सीनेट हैं. उनका कार्यकाल 2024 में खत्म होने जा रहा है. ऐसे में वह एक बार फिर इसी सीट से चुनावी मैदान में हैं.
मिनिता सांघवी
अमेरिका के स्किडमोर कॉलेज की प्रोफेसर मिनिता न्यूयॉर्क के साराटोगा स्प्रिंग्स में कमिश्नर के पद के लिए दोबारा चुनाव लड़ रही हैं. 2001 में मुंबई से अमेरिका जाकर बसीं मिनिता समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करती हैं.
ऋषि बग्गा
भारतीय मूल के डेमोक्रेट ऋषि बग्गा 10 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अमेरिका जाकर बस गए थे. उनके परिवार ने अमेरिका में मोटल बिजनेस में इन्वेस्ट किया. घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले ऋषि फ्लोरिडा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव लड़ रहे हैं.
प्रिया तमिलारसन
भारतीय मूल की प्रिया ओहायो की गहाना सिटी से अटॉर्नी का चुनाव लड़ रही हैं.
अश्विनी उडगांवकर
डेमोक्रेट अश्विनी डेलावेयर काउंटी में मार्पल टाउनशिप से कमिश्नर के लिए चुनावी मैदान में हैं. वह पेशे से वकील हैं और महिला अधिकारों के लिए काम करती हैं.
बलवीर सिंह
साल 2017 में न्यूजर्सी से चुनाव जीतने वाले पहले सिख के तौर पर ख्याति प्राप्त कर चुके बलवीर न्यूजर्सी काउंटी कमिश्नर के लिए चुनावी मैदान पर है. डेमोक्रेट बलवीर काउंटी चुनाव जीतने वाले पहले एशियाई मूल के अमेरिकी हैं.