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यूनिवर्सिटी कैंपस में हिजाब के विरोध में कपड़े उतारने वाली लड़की क्या सेफ है, क्या किये जा रहे हैं दावे?

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अधिकारियों से महिला को तुरंत रिहा करने की अपील करते हुए एक्स पर लिखा, ''जब तक उसकी रिहाई नहीं हो जाती, अधिकारियों को उसे यातना और अन्य दुर्व्यवहार से बचाना चाहिए' और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अपने परिवार और एक वकील से संपर्क करने में सक्षम हो.'

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(फोटो: सोशल मीडिया/ X)
(फोटो: सोशल मीडिया/ X)

ईरान, शरिया कानून पर चलने वाला एक ऐसा मुल्क जो धार्मिक मान्यताओं का पालन पूरी कट्टरता से करता और करवाता है. कपड़ों से लेकर इबादत तक, ईरान में ऐसे कई कड़े नियम हैं जो लोगों के सार्वजनिक जीवन को नियंत्रित करते हैं. इन नियमों पर शासन की पैनी नजर रहती है और इनका उल्लंघन करने पर सख्त सजा दी जाती है. लेकिन रविवार को इसी कट्टर मुल्क से एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया. इस वीडियो ने दो साल पहले ईरान में हुई हिजाब क्रांति की यादें ताजा कर दीं.

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हाथ में किताबें और ढके हुए सिर वाली लड़कियों के बीच ईरान की एक यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक लड़की अपने इनरवियर में घूम रही थी. दावा किया गया कि लड़की ने इस्लामिक परिधान के विरोध में अपने कपड़े उतार दिए और इनरवियर में आ गई. सोशल मीडिया पर लोग अहौ दारयाई नाम की इस लड़की के समर्थन में उतर आए. ठीक वैसे ही जैसे दो साल पहले पुलिस हिरासत में दम तोड़ने वाली महसा अमीनी के लिए खड़े हुए थे जिसे 'ठीक तरीके से हिजाब न पहनने के लिए' ईरान की मॉरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

कहां हैं अहौ दारयाई?

ईरान जैसे देश में, जहां सिर्फ हिजाब ठीक से न पहनने के लिए जेल हो जाती है, वहां इस तरह का विरोध प्रदर्शन ईरानी शासन को सीधी चुनौती है. ऐसे में अब सवाल यह है कि इस प्रदर्शन के बाद अहौ दारयाई का क्या हुआ और फिलहाल वह कहां हैं. विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिजाब न पहनने के लिए यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी गार्ड्स द्वारा हिंसक रूप से रोके जाने के बाद विरोध के रूप में महिला ने अपने कपड़े उतार दिए थे.

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महिला को मनोरोग केंद्र भेजा गया

यह घटना तेहरान की इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी की एक ब्रांच की है. जानकारी के मुताबिक एक अन्य वीडियो में सुरक्षाबल उसे घेरते और कार में धक्का देकर बिठाते हुए नजर आ रहे हैं. एक ईरानी अखबार के हवाले से एबीसी न्यूज ने कहा, महिला को पहले पुलिस स्टेशन ले जाया गया और फिर एक मनोरोग केंद्र भेज दिया गया. विश्वविद्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि 'हम इस कृत्य के पीछे का 'असली मकसद' जानने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान में प्रदर्शनकारियों को मनोरोग केंद्रों में भेजने का इतिहास रहा है. 

एमनेस्टी इंटरनेशनल कर रहा अपील

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अधिकारियों से महिला को तुरंत रिहा करने की अपील करते हुए एक्स पर लिखा, ''जब तक उसकी रिहाई नहीं हो जाती, अधिकारियों को उसे यातना और अन्य दुर्व्यवहार से बचाना चाहिए' और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अपने परिवार और एक वकील से संपर्क करने में सक्षम हो.' ईरान के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत माई सातो ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'वह इस घटना की बारीकी से निगरानी करेंगी, जिसमें यह भी शामिल होगा कि अधिकारी इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.'

यूनिवर्सिटी ने किया मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का दावा
 
यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने कहा कि महिला मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थी. एक पोस्ट में पुलिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि छात्रा 'गंभीर मेंटल प्रेशर' में थी और मानसिक विकार से जूझ रही थी.' सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं लेकिन अब तक की जानकारी के मुताबिक महिला ईरान के ही एक मनोरोग केंद्र में है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती.

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