अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति के बीच नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) एक्टिव हो गया है. बुधवार को NATO चीफ जेन्स स्टोलनबर्ग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और इस बात का भरोसा दिया कि अब NATO मिडिल ईस्ट की स्थिति में अहम भूमिका निभाएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र को संबोधित किया था, इसी दौरान उन्होंने जिक्र किया था कि वेस्टर्न देशों को अब मिडिल ईस्ट में अहम भूमिका निभानी होगी, NATO को भी अब एक्टिव होना चाहिए.
NEW Read-out of phone call between #NATO Secretary General @jensstoltenberg and US President @realDonaldTrump on developments in the Middle East ⤵️ https://t.co/FrURknL3jw
— Oana Lungescu (@NATOpress) January 8, 2020
डोनाल्ड ट्रंप की इसी अपील के बाद NATO चीफ ने डोनाल्ड ट्रंप से बात की. NATO की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने सेक्रेटरी जनरल से मिडिल ईस्ट में गतिविधि बढ़ाने की बात कही थी, जिस पर बातचीत हुई है. NATO ने इस बात पर सहमति जताई है कि आतंकवाद से लड़ने और मिडिल ईस्ट में स्थिरता के लिए वह अहम भूमिका निभाएगा.
‘ईरान में शांति और विकास चाहते हैं’
अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान एक बेहतर देश हो सकता है. शांति और स्थिरता मध्य-पूर्व में तब तक स्थापित नहीं हो सकती है, जब तक ईरान में हिंसा जारी रहेगी. दुनिया को एकजुट होकर ईरान के खिलाफ यह संदेश जारी करना होगा कि ईरान की ओर से चलाए जा रहे टेरर कैंपेन को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
नाटो सदस्य देशों की लिस्ट
क्या है NATO?
आपको बता दें कि नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) 29 देशों का एक संगठन है, जो कि एक दूसरे को सैन्य सहायता प्रदान करने का काम करता है. इन सभी देशों के बीच समझौता है कि अगर किसी देश में सेना की जरूरत है तो आपसी सहमति से राजनीतिक और सैन्य आधार पर मदद की जाती है.
NATO की ओर से सभी सदस्य देशों की सेनाओं को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है. इस संगठन की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बात 1949 में हुई थी.