इटली की (Italy) सरकार ने अपने शहर मिलान (Milan) के मेयर को एक आदेश जारी कर कहा है कि समलैंगिक कपल्स (Same-Sex Couples) के बच्चों का बर्थ रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए. प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के इस आदेश के बाद इटली में बहस फिर से शुरू हो गई है.
दरअसल, इटली में 2016 में कैथोलिक और कंजर्वेटिव ग्रुप के विरोध को दरकिनार करते हुए समलैंगिक विवाह को मान्यता दे दी गई थी. लेकिन होमोफोबिया (समलैंगिक द्रोह) के खिलाफ देश में कोई भी कानून नहीं है. समलैंगिक विवाह को वैध करने के बाद भी इटली में सबसे बड़ी समस्या ये है कि समलैंगिक कपल्स के लिए बच्चा गोद लेने संबंधी बेहद कमजोर हैं. इसकी मूल वजह ये है कि यह फैसला सरोगेट प्रेग्नेंसी को बढ़ावा देगा, जो कि इटली में अवैध है.
इस मुद्दे पर स्पष्ट कानून के अभाव में कुछ अदालतों ने समलैंगिक कपल्स को एक-दूसरे के बच्चों को गोद लेने की अनुमति देने के पक्ष में फैसला सुनाया है. इसके साथ ही मिलान समेत कुछ शहरों के मेयरों ने समलैंगिक जोड़ों के लिए सरोगेट बच्चों के रजिस्ट्रेशन को मान्यता दी थी.
मिलान के सेंटर-लेफ्ट मेयर ग्यूसेप साला ने कहा कि उन्हें आंतरिक मंत्रालय से एक पत्र मिला है, जिसमें कहा गया है कि समलैंगिक जोड़ों के बच्चों का पंजीकरण बंद किया जाए. इटली की सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए मिलान के एक विभाग ने तर्क दिया कि सेम सेक्स कपल्स सिर्फ कोर्ट से गोद लेने की परमिशन के बाद ही कानूनी तौर पर ऐसा कर सकते हैं. मिलान के मेयर ने कहा कि वह इस आदेश का सम्मान करेंगे, लेकिन समलैंगिक पैरेंट्स और उनके बच्चों के अधिकारों की गारंटी के लिए राजनीतिक रूप से लड़ते रहेंगे.
प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी पारंपरिक क्रिश्चन रीति-रिवाजों के संरक्षक के रूप में सत्ता में आई थीं. उन्होंने जेंडर विचारधार और LGBT लॉबी की जमकर निंदा की थी. लेकिन सरकार के इस फैसले का LGBT कम्युनिटी और उनके कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है.
इटली के सबसे बड़े LGBT+ अथॉरिटी ग्रुप Arcigay के महासचिव गेब्रियल पियाज़ोनी ने कहा कि यह कदम LGBT कम्युनिटी के खिलाफ दक्षिणपंथी बहुसंख्यक लोगों के गुस्से का बड़ा उदाहरण है.
इटली के एक प्रमुख समलैंगिक अधिकार प्रचारक समूह के लीडर फैब्रीज़ियो माराज़ो ने मिलान के मेयर समेत दूसरे मेयर्स से गुहार लगाई है कि वह वर्थ सर्टिफिकेट को लेकर सरकार के फैसले का विरोध करें. उन्होंने कहा कि जब कोई कानून राजनीति से प्रेरित होकर अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण होता है तो उसमें अवज्ञा करने का साहस होना चाहिए.
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