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जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा का भारत दौरा बढ़ाएगा शी जिनपिंग की चिंता?

फुमियो किशिदा की भारत यात्रा चीन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अपनी इस यात्रा के दौरान किशिदा ने मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक पहल की घोषणा की. इंडो पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता से परेशान भारत और जापान मिलकर इस पहल पर काम करने को राजी हुए हैं जो चीन के लिए चिंता का विषय हो सकता है.

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जापान के पीएम किशिदा पीएम मोदी से मिलते हुए (Photo- Reuters)
जापान के पीएम किशिदा पीएम मोदी से मिलते हुए (Photo- Reuters)

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की भारत यात्रा हिंद प्रशांत क्षेत्र के दोनों सहयोगियों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. भारत और जापान दोनों ही क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामता से परेशान हैं और मिलकर इसका सामना करने को तैयार हैं. सोमवार को अपनी भारत यात्रा के दौरान किशिदा ने इसी संबंध में मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक पहल की घोषणा की.

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भारत यात्रा पर आए किशिदा ने कहा कि वह मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक की नीति को बढ़ावा देना चाहते हैं. जापान का यह पहल चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए है जिसका सामना भारत भी कर रहा है. इसके जरिए जापान उभरती अर्थव्यवस्थाओं को समुद्री सुरक्षा के लिए समर्थन, तट रक्षक गश्ती नौका, उपकरण और अन्य बुनियादी ढांचें में सहयोग करेगा.

जापान की मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक की यह नीति, नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का एक हिस्सा है जो दिसंबर में अपनाई गई थी. इसके तहत जापान अपनी स्ट्राइक-बैक क्षमता को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों को तैनात कर रहा है. मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक की इस नीति में जापान उन देशों को भी शामिल कर रहा है जो क्षेत्र में चीन की आक्रामकता से परेशान हैं.

जापान के इंडो पैसिफिक पहल पर चीनी मीडिया ने क्या कहा?

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शी जिनपिंग की सत्ताधारी चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के मुखपत्र समझे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने किशिदा के भारत दौरे पर कई रिपोर्टें प्रकाशित की है. अपनी एक रिपोर्ट में अखबार लिखता है कि जापानी पीएम ने अपनी भारत यात्रा के दौरान चीन का जिक्र नही किया लेकिन उन्होंने जिन मुद्दों पर बात की, वो चीन से संबंधित हैं. जैसे कि- जापानी की औद्योगिक चेन को भारत में स्थानांतरित करना और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना. 

सिंघुआ विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ मॉडर्न इंटरनेशनल रिलेशंस के वाइस डीन लियू जियानगयोंग के हवाले से अखबार ने लिखा, 'दिसंबर 2022 में राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की मंजूरी के बाद से जापान सक्रिय रूप से अपने रणनीतिक इरादे को लागू कर रहा है. अमेरिका अपना अधिकांश ध्यान रूस पर लगा रहा है जिससे जापान के लिए क्षेत्र में जगह बन रही है. जापान साल की जी-7 बैठक को एक भू-राजनीतिक हथियार में बदलना चाहता है जो चीन, रूस और उत्तर कोरिया को लक्षित करेगा.'

किशिदा ने पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान उन्हें जी-7 में हिस्सा लेने का निमंत्रण दिया जिसे पीएम ने स्वीकार भी कर लिया. ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अपनी बढ़ती साख की अभिव्यक्ति के रूप में भारत जी-7 बैठक में हिस्सा जरूर लेगा. विशेषज्ञों का हवाला देते हुए ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारत इस मीटिंग में पश्चिमी देशों के साथ सहयोग, विशेष रूप से आर्थिक और सैन्य सहयोग को गहरा करने की भी उम्मीद कर रहा है.

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चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन के बयान का हवाल देते हुए अखबार ने लिखा कि इंडो पैसिफिक ब्लॉक वास्तव में टकराव को बढ़ावा देने वाला ब्लॉक है. 

'जापान के साथ संबंध भारत की क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण'

जापान के पीएम के साथ एक संयुक्त मीडिया इंटरेक्शन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत-जापान साझेदारी की मजबूती हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का काम करेगी. बिना चीन का नाम लिए दोनों पक्ष इस मुद्दे पर साथ काम करने के लिए सहमत हुए.

चीन की आक्रामकता को रोकने के लिए दोनों देशों ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर एक इंडो-पैसिफिक गठबंधन भी बनाया है जिसे क्वाड के रूप में जाना जाता है.

पूर्वी चीन और दक्षिण चीन सागर के कई हिस्सों पर चीन अपने दावे पेश करता रहता है जिससे उसके सभी छोटे पड़ोसी देश परेशान हैं. जापान भी उनमें शामिल है.

भारत और चीन के बीच के संबंध भी साल 2020 में उस वक्त बेहद खराब हो गए जब भारतीय और चीनी सैनिक लद्दाख में सीमा पर एक-दूसरे से भिड़ गए. इसमें भारत के 20 सैनिक मारे गए. इसके बाद भी भारत और चीनी सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव की खबरें आती रही हैं.

किशिदा की भारत यात्रा से मजबूत होंगे संबंध और सधेंगे साझा हित

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चीन की बढ़ती आक्रामता और रूस-यूक्रेन संघर्ष पर दुनिया की बढ़ती चिंताओं के बीच किशिदा ने भारत की यात्रा की है. भारत में किशिदा ने खाद्य सुरक्षा और विकास के मुद्दे को संबोधित करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए पीएम मोदी के साथ बातचीत की. दोनों नेताओं ने कहा कि वे यूक्रेन में रूस के युद्ध के बाद से ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति की बढ़ती कीमतों सहित कई वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगे.

किशिदा ने कहा कि मोदी ने मई में हिरोशिमा में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है.

समाचार एजेंसी एपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपने बयान में किशिदा ने कहा कि उन्होंने मोदी से कहा कि वह जी-7 शिखर सम्मेलन में चुनौतियों का सामना करने की उम्मीद करते हैं, जिसमें नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ साझेदारी को मजबूत करना शामिल है. उन्होंने कहा कि ऐसे में बात सिर्फ जी-7 के देशों तक सीमित नहीं रह जाती बल्कि इसमें ग्लोबल साउथ भी आ जाता है. ग्लोबल साउथ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों के लिए इस्तेमाल होने वाला टर्म है.

वहीं, पीएम मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने जी-7 और जी-20 की अपनी अध्यक्षताओं के लिए अपनी-अपनी प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की.

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इस साल जी-7 की अध्यक्षता कर रहा जापान कहता रहा है कि एक सफल शिखर सम्मेलन के लिए विकासशील देशों के साथ संबंधों का गहरा होना जरूरी है.

सोमवार को इंडियन एक्सप्रेस अखबार के लिए एक लेख में, किशिदा ने कहा, 'यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्यवस्था की नींव हिल गई है. इसका प्रभाव भारत-प्रशांत क्षेत्र सहित हर जगह खाद्य सुरक्षा और उर्वरक कीमतों पर महसूस किया गया है.'

अपने लेख में किशिदा ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय वर्तमान में जिन अलग-अलग चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, G-7 और G-20 के बीच सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है. हमें खाद्य सुरक्षा, जलवायु और ऊर्जा, विकास के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी मदद जैसी चुनौतियां शामिल हैं.'

भारत-जापान के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग

भारत और जापान के बीच मजबूत आर्थिक संबंध रहे हैं. वित्त वर्ष 2021-2022 में दोनों के बीच 20.57 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है, जो कि एक रिकॉर्ड है. भारत में जापानी निवेश 2000 और 2019 के बीच 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया. जापान भारत में बुनियादी ढांचे के विकास का समर्थन करता रहा है,  जिसमें एक हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट भी शामिल है.

किशिदा की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड ट्रेन के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से 300 बिलियन येन (₹18,800 करोड़) के ऋण की चौथी किश्त के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

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मोदी ने संयुक्त मीडिया इंटरेक्शन में कहा कि दोनों पक्ष परियोजना पर तेजी से काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'पिछले साल हमने अगले 5 सालों में भारत में पांच ट्रिलियन येन के जापानी निवेश का लक्ष्य रखा, यानी 3,20,000 करोड़ रुपये. यह संतोष की बात है कि इस दिशा में अच्छी प्रगति हुई है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है.'

उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा की और रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी, व्यापार, स्वास्थ्य और डिजिटल साझेदारी पर सहयोग करने को लेकर चर्चा की. 

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