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जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा (Fumio Kishida) भारत के दो दिवसीय दौरे के बाद मंगलवार को अचानक यूक्रेन पहुंच गए. किशिदा के अचानक यूं यूक्रेन पहुंचने से वैश्विक स्तर पर सुगबुगाहट शुरू हो गई है. किशिदा का यह यूक्रेन दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन के राष्ट्रपति शांतिदूत बनकर रूस पहुंचे. ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी जापानी प्रधानमंत्री ने किसी युद्धग्रस्त देश का दौरा किया है.
किशिदा इस साल मई में होने जा रहे G-7 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. उन्होंने मंगलवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की और उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए G-7 बैठक में शामिल होने का न्योता भी दिया. इसके बाद उन्होंने रूसी अत्याचार का प्रतीक बन चुके यूक्रेनी शहर बूचा (Bucha) में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बूचा के एक चर्च का दौरा किया.
बूचा में रूस पर बरसे किशिदा
बूचा शहर में किशिदा ने कहा कि मैं यहां हुई क्रूरता को देखकर गुस्से में हूं. मैं जापान के नागरिकों की ओर से यहां जान गंवा चुके लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.
इस दौरान जेलेंस्की ने किशिदा को अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं व्यवस्था का सशक्त रक्षक बताते हुए उन्हें यूक्रेन का पुराना दोस्त करार दिया. जेलेंस्की ने कहा कि मुझे जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा का कीव में स्वागत कर खुशी हो रही है. जेलेंस्की ने किशिदा का निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री का निमंत्रण स्वीकार करता हूं और हिरोशिमा में होने वाले G-7 समिट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत करूंगा. G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित देशों का एक संगठन है. जापान इस बार G-7 की अध्यक्षता कर रहा है.
पोलैंड से ट्रेन से कीव पहुंचे
जापान के सरकारी टेलीविजन एनएचके की रिपोर्ट के मुताबिक, किशिदा भारत से सीधे पोलैंड गए और वहां से ट्रेन के जरिए यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी पोलैंड से होते हुए ट्रेन से कीव पहुंचे थे.
अचानक यूक्रेन क्यों पहुंचे किशिदा?
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, G-7 सदस्य देशों में किशिदा ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से अब तक वहां का दौरा नहीं किया था. एक तरह से उन पर घरेलू स्तर पर दबाव भी था कि उन्हें यूक्रेन जाना चाहिए. इसे भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है कि वह अचानक भारत से यूक्रेन पहुंच गए.
इस साल जनवरी में किशिदा ने जेलेंस्की से फोन पर बात की थी. इस दौरान जेलेंस्की ने किशिदा को यूक्रेन आने का न्योता दिया था. कहा जा रहा है कि उसी वादे को निभाते हुए किशिदा कीव पहुंचे हैं.
चीन और जापान के कटु संबंध भी किसी से छिपे हुए नहीं हैं. इंडो पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने और चीन पर लगाम कसने के लिए जापान लगातार प्रयासरत है. वह क्वाड (QUAD) के मंच पर भी चीन की आक्रामकता के मुद्दे को उठाता है. बता दें कि क्वाड को अनौपचारिक तौर पर चीन विरोधी संगठन माना जाता है, जिसमें जापान के अलावा भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी है.
जापान खुलकर यूक्रेन का समर्थन करता है. पिछले साल फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, उस समय जापान उन देशों में शामिल था, जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे. जापान लगातार यूक्रेन के प्रति अपना समर्थन जताता आया है और यही वजह है कि उन्होंने एक बार फिर चीन और रूस को टका सा जवाब देते हुए यूक्रेन का साथ दिया है.