अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिका की किरकिरी हो रही है. अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के खिलाफ वाशिंगटन की सड़कों पर लोगों का गुस्सा भी नजर आया. यहां अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन हुआ और अमेरिका पर अफगानिस्तान से धोखा देने का आरोप लगाया गया.
इतना ही नहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बाइडेन प्रशासन की आलोचना की है. जबकि राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने साफ तौर पर ताजा हालात के लिए पूरी तरह से अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनकी सेना को जिम्मेदार ठहराया है. बाइडेन ने बताया कि जुलाई में जब गनी से मैंने बात की तो उनसे कहा कि अमेरिकी सेना के लौटने के बाद अफगानिस्तान को सिविल वॉर के लिए तैयार रहना चाहिए.
बाइडेन ने ट्रंप को याद दिलाया समझौता
जो बाइडेन ने अपने बयान में ट्रंप प्रशासन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप ने तालिबान से समझौता किया था कि 1 मई 2021 तक अमरीकी सेना अफगानिस्तान से वापस आ जाएंगी. 1 मई के बाद कोई सीजफायर नहीं था. कोई समझौता नहीं था. लिहाजा, मैंने समझौते का पालन किया.''
इस तरह बाइडेन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने की बात को जायज ठहराया. साथ ही उन्होंने ताजा हालात के लिए अफगानिस्तान की लीडरशिप को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के नेता भाग गए, सेना चरमरा गई और अफगान सेना जिस युद्ध को नहीं लड़ना नहीं चाहती, वहां अमेरिकी फौजी क्यों लड़े, क्यों मरे.
अमेरिका की खुफिया नाकामी?
अपने फैसले के बचाव में बाइडेन ने और भी कई तर्क दिए. बावजूद इसके, सैन्य वापसी के फैसले की आलोचना की जा रही है. ज्यादातर जानकार अफगानिस्तान के हालात के लिए अमेरिका की खुफिया असफलता को वजह मान रहे हैं. तालिबान लगातार कब्जे करता जा रहा था. वो अफगान सेना को अपनी तरफ कर रहा था. कहा जा रहा है कि अमेरिका तालिबान के बढ़ते प्रभाव को पहचान ही न सकी और अफगानिस्तान के आम लोगों को तालिबान के रहमो करम पर छोड़ गई.
अफगान इंटेलीजेंस सर्विस की तरफ से भी बताया गया है कि 5000 सैनिकों ने अमेरिकी ऐलान के बाद से हर महीने सेना को छोड़ना शुरू कर दिया था. दूसरी तरफ, अमेरिका और तालिबान समझौते के तहत अफगान जेलों से 5,000 तालिबानियों की रिहाई ने भी उसकी क्षमता को बढ़ाया. यानी एक तरफ तालिबान की ताकत में बढ़ोत्तरी होती गई तो वहीं अफगान सेना लगातार कमजोर होती गई.
जो बाइडेन ने अपने संबोधन में ये भी बताया है कि उन्होंने ट्रिलियन डॉलर्स खर्च किए, अफगान सेना को ट्रेन किया, हथियार दिए, एयरफोर्स दी, एयर सपोर्ट दिया. हालांकि, ताजा हकीकत ये है कि अफगान सैनिक हथियारों की कमी से जूझ रहे थे. आजतक की टीम को कंधार में एक अफगान सैनिक ने भी ये सच्चाई बताई थी. अफगान सैनिक ने बताया था कि अगर उन्हें वक्त पर हथियार मिल जाते तो वो तालिबान को रोक लेते.
लेकिन सच्चाई ये है कि तालिबान को रोकने की कोशिश किसी तरफ से नहीं हुई. बाइडेन अपना मकसद दोहरा रहे हैं. वो कह रहे हैं कि 20 साल पहले जब हम अफगानिस्तान आए तो हमारा टारगेट 9/11 अटैक का बदला लेना और अलकायदा को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल न करने देना था और हम इसमें पूरी तरह कामयाब हुए.
बाइडेन भले ही अपने मिशन में सफल होने के दावे कर रहे हों लेकिन उनके ही पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर उन्हें घेरा है. ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि बाइडेन ने अफगानिस्तान को लेकर जो कुछ किया है उसे इतिहास याद रखेगा, ये इतिहास में अमेरिका की सबसे बड़ी हार के रूप में दर्ज होगा.
अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति भी बाइडेन की आलोचना कर रहे हैं, तो जाहिर ये सवाल भी वाजिब है कि क्या अशरफ गनी पर ठीकरा फोड़ बाइडेन अपनी पीठ बचा रहे हैं.