लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में 10वीं ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. पहले पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में उन्होंने ब्रिक्स संसदीय मंच में नए सदस्य देशों (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई) का स्वागत किया.
लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक शासन को और ज्यादा लोकतांत्रिक बनाने और यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है.
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ब्रिक्स के एजेंडे को बढ़ाने में संसद और सांसद की भूमिका
ओम बिरला ने ब्रिक्स एजेंडे को आगे बढ़ाने में संसदों और सांसदों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है. उन्होंने उभरते बाजारों और विकासशील देशों को एकजुट करने और आपसी सम्मान, समानता, एकजुटता, पारदर्शिता और आम सहमति के सिद्धांतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के बारे में बात की.
बहुपक्षीय मंचों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स सदस्य देशों और अन्य बहुपक्षीय मंचों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत 'वसुधैव कुटुम्बकम' (पूरा विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत का पालन करता है. उन्होंने जी20 के सफल मेजबानी का भी जिक्र किया और बताया कि भारत ने किस तरह सफलतापूर्वक बैठक आयोजित की और दुनिया को एक संदेश दिया.
ओम बिरला ने उम्मीद जताई कि अंतर-संसदीय सहयोग को मजबूत करने से ब्रिक्स साझेदारी ज्यादा समावेशी और लोकतांत्रिक बनेगी. उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों, विकास और ब्रिक्स एजेंडे को आगे बढ़ाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई.
अपनी यात्रा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने आईपीयू अध्यक्ष तुलिया एक्सन से भी मुलाकात की. 10वीं ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक में हिस्सा लेने के लिए उनकी रूस यात्रा लोकसभा अध्यक्ष के रूप में लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए उनके ऐतिहासिक चुनाव के बाद पहली विदेश यात्रा है.