मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के खिलाफ "इंडिया आउट" अभियान चलाने के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके देश को विदेशी सेना की मौजूदगी से "गंभीर समस्या" का सामना करना पड़ा है. वह अमेरिका दौरे पर हैं, जहां न्यूययॉर्क में वह यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली की सभा में हिस्सा लेंगे. इससे पहले उन्होंने एक कार्यक्रम में भारत से संबंधित आरोपों के जवाब दिए.
मुइज्जू ने स्पष्ट किया, "हम कभी भी किसी एक देश के खिलाफ नहीं रहे हैं. यह 'इंडिया आउट' नहीं है. मालदीव विदेशी सेना की मौजूदगी के साथ एक गंभीर समस्या का सामना कर रहा है." उन्होंने यह भी कहा, "मालदीव के लोग अपने देश में एक भी विदेशी सैनिक नहीं चाहते हैं." भारत और मालदीव के बीच तब तनाव बढ़ गए जब मुइज्जू पड़ोसी मुल्क के राष्ट्रपति बने.
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मुइज्जू पर चीन समर्थक होने के आरोप
मुइज्जू पर चीन समर्थक होने के आरोप लगते रहे हैं और कहा जाता है कि इसी वजह से वह चनाव भी जीत सके. मसलन, उनपर यह आरोप लगते रहे हैं कि इंडिया आउट कैंपेन में उनका हाथ है. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया और बताया कि उन्होंने अपने मंत्रियों के खिलाफ एक्शन भी लिया है.
पीएम मोदी के अपमान करने वालों पर लिया एक्शन
मसलन, मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम मोदी लक्षद्वीप दौरे पर गए थे, जिसका उनके मंत्रियों ने विरोध किया था और पीएम मोदी के लिए अपमानजनक बातें सोशल मीडिया पर कही थी.
मुइज्जू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले उपमंत्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है. उन्होंने कहा, "किसी को भी ऐसा नहीं कहना चाहिए. मैंने इसके खिलाफ कार्रवाई की. मैं किसी का भी अपमान स्वीकार नहीं करूंगा, चाहे वह नेता हो या सामान्य व्यक्ति. हर इंसान की प्रतिष्ठा होती है."
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इससे पहले इस साल, मालदीव के युवा मंत्रालय में उपमंत्रियों को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए निलंबित कर दिया गया था. प्रधानमंत्री मोदी 2 और 3 जनवरी को लक्षद्वीप के दौरे पर थे और उन्होंने वहां कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया था.