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कमजोर पड़ रही मॉडर्ना के टीके की 'धार', कंपनी ने सुझाया यह उपाय

मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन (Moderna COVID 19 vaccine) पर नई स्टडी की गई है. इसमें पाया गया कि वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा धीरे-धीरे कम हो जाती है. इसलिए बूस्टर डोज की बात कही गई है.

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मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन पर नई स्टडी की गई
मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन पर नई स्टडी की गई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मॉडर्ना कोरोना वैक्सीन पर स्टडी की गई
  • कोरोना से मिलने वाली सुरक्षा वक्त के साथ कम हो रही

कोरोना से बचने का सबसे बड़ा हथियार वैक्सीन है. लेकिन अगर वक्त के साथ उस हथियार की धार ही गायब होने लगे तो क्या किया जाए? कोरोना की वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा कितने वक्त तक रहती है, इसको लेकर बहस जारी है. इस बीच मॉडर्ना (Moderna) कंपनी ने भी माना है कि उनकी कोविड वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है. ऐसे में उन्होंने बूस्टर डोज की वकालत की है. 

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रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, मॉडर्ना ने यह बात ताजा स्टडी के आधार पर कही है, जिसे बुधवार को सामने रखा गया. मॉडर्ना ने अध्यक्ष स्टीफन होज ने कहा कि यह सिर्फ एक अनुमान है. लेकिन आशंका है कि सुरक्षा कम होने की वजह से 600,000 कोविड केस अधिक देखने पड़ सकते हैं. यह आंकड़ा सिर्फ अमेरिका को आधार बनाकर दिया गया है. होज ने यह नहीं बताया कि इसमें गंभीर केस कितने होंगे, लेकिन यह दावा किया कि हॉस्पिटल में मरीजों की संख्या बढ़ सकती है.

यह डेटा उन पहले की स्टडीज से बिल्कुल विपरीत हैं जो बताती थीं कि मॉडर्ना की वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन से ज्यादा वक्त तक रहती है. एक्सपर्ट मानते हैं कि यह अंतर इसलिए है क्योंकि मॉडर्ना टीके में मेसेंजर RNA (mRNA) की मात्रा ज्यादा होती है. वहीं पहली और दूसरी खुराक के बीच का अंतर भी ज्यादा है. 

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पहले टीका लगवाने वालों को कोविड का खतरा ज्यादा

बुधवार को जो विश्लेषण सामने रखा गया, उसमें पाया गया कि जिन लोगों ने 13 महीने पहले कोविड टीका लगवाया था, उनमें इंफेक्शन रेट उन लोगों के मुकाबले ज्यादा था जिन्होंने 8 महीने पहले कोरोना टीका लगवाया था. इस डेटा का स्टडी पीरियड जुलाई से अगस्त के बीच था, जिस वक्त डेल्टा वेरिएंट प्रमुख रूप से हावी था.

बता दें कि मॉडर्ना ने एक सितम्बर को अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पत्र लिखकर बूस्टर डोज की इजाजत मांगी है. होज का कहना है कि स्टडी दिखाती है कि इससे कोविड-19 केस कम हो सकते है. उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि mRNA-1273 की तीसरी खुराक से इम्यूनिटी बढ़ने के चांस हैं, जिससे अगले साल तक कोरोना को खत्म करने के हमारे लक्ष्य में मदद मिल सकती है.'

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