प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में हैं. वह व्हाइट हाउस में आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. पूरी दुनिया की नजरें दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता पर होगी. लेकिन ये जानना जरूरी है कि दोनों नेताओं के लिए यह मुलाकात इतनी जरूरी क्यों है?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जापान के प्रधानमंत्री शिगरू इशिबा और जॉर्डन के सुल्तान के बाद पीएम मोदी चौथे विदेशी नेता होंगे, जो व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं की पहली मुलाकात 2017 में हुई थी. इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं की दोस्ती बढ़ी. 2019 के टेक्सास में हाउडी मोदी इवेंट में दोनों नेताओं की हाथों में हाथ डाले तस्वीरें इस दोस्ती की मिसाल रही है.
भारत और अमेरिका को एक दूसरे से क्या चाहिए?
1) भारत और अमेरिका के हित लगभग-लगभग एक दूसरे से जुड़े हुए है. अमेरिका, चीन को अपना कट्टर प्रतिद्वंद्वी समझता है. भारत के लिए भी चीन बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में चीन के खिलाफ भारत और अमेरिका के साझा हित दोनों देशों को नजदीक लेकर आए हैं.
2) ट्रेड एक ऐसा विषय है, जो दोनों देशों के लिए फोकस प्वॉइन्ट है. आज की मुलाकात में दोनों के बीच टैरिफ को लेकर भी चर्चा होगी. ट्रंप ने कनाडा, मेक्सिको और चीन जैसे कई देशों पर टैरिफ लगाया है. भारत पर फिलहाल अमेरिका ने किसी तरह का टैरिफ नहीं लगाया है.
3) डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में पीएम मोदी प्रस्ताव रख सकते हैं कि अमेरिका भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में निवेश करे.
4) नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच मुलाकात के दौरान टेक्नोलॉजी पर भी बातचीत हो सकती है. इस क्षेत्र में भी निवेश पर दोनों नेताओं की नजरें हैं.
5) भारत के लिए चाबहार प्रोजेक्ट बहुत जरूरी है. लेकिन ट्रंप ने ईरान पर दबाव डालने के लिए मेमोरेंडम जारी किया है. पीएम मोदी की पूरी कोशिश रहेगी कि वह ट्रंप को यह बता सकें कि ईरान के साथ भारत का यह प्रोजेक्ट इतना खास क्यों है.
6) गजा युद्ध को समाप्त करने को लेकर भी चर्चा एजेंडा का हिस्सा है. भारत की गजा और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में गहरी दिलचस्पी है.
7) इस साल भारत में क्वाड सम्मेलन होना है. पीएम मोदी राष्ट्रपति ट्रंप को इसमें शामिल होने का न्योता दे सकते हैं. चीन के प्रभुत्व को रोकने के लिए अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाला यह क्वाड बहुत जरूरी है.
8) अमेरिका से भी भारत के तेल खरीदने पर हो चर्चा हो सकती है.
9) हिंद-प्रशांत, यूक्रेन और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर भी चर्चा.
10) डिफेंस सेक्टर में कई अहम सौदे हो सकते हैं. कई लड़ाकू विमानों की अमेरिका से खरीद पर मुहर लग सकती है.