भूकंप की चपेट में आई म्यांमार की जनता पर अभी दोहरी मार पड़ रही है. Myanmar earthquake से हुए विनाश के बावजूद म्यांमार की सेना विद्रोही गुटों पर हमले कर रही है. एक विद्रोही गुट का दावा है कि भूकंप के तुरंत बाद एयरस्ट्राइक में उसके 7 लड़ाके मारे गए हैं. म्यांमार की सेना ने गृह युद्ध से जूझ रहे देश में विद्रोहियों पर बढ़त हासिल करने के लिए भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के बीच भी हवाई हमलों का सहारा लिया है.
म्यांमार में शुक्रवार को आए भूकंप में मरने वालों की संख्या 2600 पार कर गई है. इसके अलावा 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा कि म्यांमार की सबसे पुरानी विद्रोही नस्लीय सेनाओं में से एक करेन नेशनल यूनियन ने एक बयान में कहा कि सेना "नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर हवाई हमले जारी रखे हुए है, जबकि आबादी भूकंप से काफी पीड़ित है."
रेस्क्यू के बजाय अपने लोगों पर आर्मी तैनात
इस ग्रुप ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में सेना राहत प्रयासों को प्राथमिकता देती, लेकिन इसके बजाय वह "अपने लोगों पर हमला करने के लिए सेना तैनात करने" पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
Myanmar earthquake के बीच राहत एजेंसियों के मुताबिक सेना की बमबारी की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी हो रही है. म्यांमार में अभी भी सैकड़ों लोग इमारतों के मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं.
उत्तरी शान राज्य में सक्रिय जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र समूह, दानू पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने कहा कि भूकंप के तुरंत बाद उन पर हवाई हमला किया गया.
उनके एक अधिकारी ने एएफपी को बताया कि नौंगचो टाउनशिप में उनके बेस पर पांच सैन्य विमानों ने हमला किया, जिसमें सात लड़ाके मारे गए. नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा, "हमारे सैनिकों ने विमान की आवाज सुनकर बंकरों में घुसने की कोशिश की. लेकिन एक बड़ा बम एक बंकर पर गिरा, जिसमें पांच महिला सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई."
म्यांमार में 2021 से सैन्य शासन
Myanmar earthquake के बीच बता दें कि म्यांमार 2021 के तख्तापलट के बाद से कई सशस्त्र विपक्षी समूहों के साथ गृहयुद्ध में उलझा हुआ है. तब सेना ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार से सत्ता छीन ली थी.
राहत संगठन फ्री बर्मा रेंजर्स के अनुसार शुक्रवार के विनाशकारी भूकंप के तुरंत बाद सैन्य जेट विमानों ने केएनयू मुख्यालय के पास करेन राज्य में हवाई हमले और ड्रोन हमले किए.
सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने आसियान देशों के अपने समकक्षों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग के बाद तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता पहुंचाने से राहत और बचाव कार्यों में मदद मिलेगी और दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुलह, शांति और पुनर्निर्माण के प्रयासों में सुविधा होगी.
विद्रोही गुटों ने हमला रोक दिया है
रविवार को विपक्षी राष्ट्रीय एकता सरकार, जिसमें 2021 में अपदस्थ सरकार के सदस्य भी शामिल हैं, ने कहा कि उसके अधीन जितनी भी विद्रोही गुट हैं वो दो सप्ताह के लिए सभी आक्रामक सैन्य कार्रवाई रोक देगी.
क्राइसिस ग्रुप में म्यांमार के वरिष्ठ सलाहकार रिचर्ड होर्सी ने कहा कि कुछ जुंटा विरोधी बलों ने अपने हमले रोक दिए हैं, लेकिन अन्य जगहों पर लड़ाई जारी है.
उन्होंने कहा, "शासन ने प्रभावित क्षेत्रों सहित हवाई हमले भी जारी रखे हैं. इसे रोकने की जरूरत है."
उन्होंने कहा कि शासन भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में ज्यादा प्रत्यक्ष सहायता प्रदान नहीं कर रहा है. होर्सी ने कहा, "स्थानीय अग्निशमन दल, एम्बुलेंस दल और सामुदायिक संगठन जुटे हैं, लेकिन सेना - जो आमतौर पर ऐसे संकट में सहायता के लिए जुटी होती है, कहीं नहीं दिख रही है."
बता दें कि म्यांमार में वर्तमान में सैन्य शासन है, जिसे म्यांमार की सेना (जुंटा) नियंत्रित करती है. 1 फरवरी, 2021 को हुए तख्तापलट के बाद, सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अपदस्थ कर सत्ता पर कब्जा कर लिया. अभी वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग इस सैन्य शासन के प्रमुख हैं और देश का नेतृत्व कर रहे हैं.
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में सैन्य हमले जारी रहने के कारण राहत कर्मियों की जान को खतरा बना हुआ है. हवाई हमले न केवल नागरिकों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि उन क्षेत्रों में भी हो रहे हैं जहां राहत कार्य चल रहे हैं, जिससे एजेंसियों के लिए सुरक्षित रूप से काम करना मुश्किल हो गया है.
हवाई हमलों में सेना को बढ़त हासिल
म्यांमार में चल रहे सिविल वॉर की वजह से सेना को पिछले डेढ़ सालों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. विद्रोहियों ने कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है. हालांकि जमीनी हमलों में सेना को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है लेकिन हवाई शक्ति में म्यांमार को श्रेष्ठता हासिल है. इसकी वजह रूस की ओर से म्यांमार को सप्लाई की गई जेट विमानें हैं.
सेना द्वारा लगातार हवाई हमलों के लगातार इस्तेमाल की खबरों की मानवाधिकार समूहों और म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने आलोचना की. ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया निदेशक एलेन पियर्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "यह रिपोर्ट कि म्यांमार की सेना ने भूकंप के बाद भी हवाई हमले जारी रखे हैं, सेना के बारे में आपको वह सब कुछ बताती है जो आपको जानना चाहिए - सेना नागरिकों के क्रूर दमन से ग्रस्त है और युद्ध जीतने की पूरी कोशिश कर रही है, चाहे इसके लिए लोगों को कितनी भी कीमत चुकानी पड़े."
म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत टॉम एंड्रयूज ने सेना से सैन्य अभियान रोकने और तत्काल युद्ध विराम की घोषणा करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि यह "अविश्वसनीय से कम नहीं" है कि सेना विनाशकारी भूकंप के बाद लोगों पर बम गिरा रही है.