शुक्रवार को म्यांमार और थाईलैंड में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई. भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,886 हो गई है जबकि 4,639 लोग घायल हैं और 373 लोग अभी भी लापता हैं. वहीं, थाईलैंड में भूकंप से कम से कम 18 लोग मारे गए हैं. भूकंप को पांच दिन हो गए हैं और मलबे में फंसे लोगों के जिंदा होने की संभावना भी कम होती जा रही है. इसी बीच बुधवार को म्यांमार के एक होटल के मलबे से एक शख्स को जिंदा रेस्क्यू किया गया है. 26 साल का शख्स मलबों के नीचे दबा था जिसे म्यांमार और तुर्की के बचावकर्मियों ने मिलकर निकाला है.
मंगलवार को रेस्क्यू टीम ने 63 साल की एक महिला को भी मलबे से निकाला था. महिला 91 घंटे तक एक इमारत के मलबे के नीचे दबी थी.
मलबे के नीचे इंसान कितने दिनों तक जीवित रह सकता है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 72 घंटों यानी तीन दिन के बाद मलबे में जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना बिल्कुल कम हो जाती है. किसी भी आपदा के बाद ज्यादातर रेस्क्यू के काम 24 घंटों के भीतर किए जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि उसके बाद हर दिन फंसे लोगों के जिंदा बचे होने की संभावना कम होती जाती है. आपदा के दौरान ज्यादातर लोग बुरी तरह घायल हो जाते हैं. गिरते पत्थरों और दूसरे तरीके के मलबों में दबने से उन्हें काफी चोट आती है.
भूकंप में जिंदा बचे रहने को बहुत से कारक प्रभावित करते हैं. ब्राउन यूनिवर्सिटी के भूभौतिकीविद् विक्टर त्साई ने समाचार एजेंसी एपी से बात करते हुए कहा कि अगर कोई किसी ऐसी जगह फंसा है जहां मलबा नहीं है तो उसके बचने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. वो चोटिल नहीं होता तो लंबे समय तक रेस्क्यू का इंतजार कर सकता है. डेस्क, मजबूत बेड आदि के अंदर छिपे लोग लंबे समय तक जीवित रह पाते हैं. विशेषज्ञ ऐसी जगहों को 'जिंदा रहने योग्य खाली स्थान' कहते हैं.
कोई 27 दिन तो कोई 15 दिन बाद निकाला गया मलबे से बाहर
जापान में 2011 में भयंकर भूकंप और सुनामी के बाद, एक युवा लड़के और उसकी 80 साल की दादी को नौ दिन बाद रेस्क्यू किया गया था. भूकंप के दौरान उनका घर ढह गया जिसमें दोनों दब गए थे. इससे एक साल पहले हैती में भूकंप आया था जिसमें 220,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस में भूकंप के मलबे से 15 दिनों के बाद एक 16 साल के लड़के को जिंदा रेस्क्यू किया गया था.
हैती के भूकंप में इवान्स मॉन्जिकनेक नामक शख्स भी मलबे के नीचे दब गया था और फिर 27 दिनों बाद जिंदा रेस्क्यू किया गया. उसने बताया कि उसके आसपास जमीन से नाली का पानी रिस रहा था जिसे पीकर वो इतने लंबे समय तक जीवित रहा. उसने बताया कि परिवार की याद और उन्हें देखने की इच्छा ने उसे जिंदा रखा.
तापमान, हवा-पानी से संपर्क... वो कारक जो जिंदा रहने में मदद करते हैं
मलबे में दबने के बाद जिंदा रहने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि वहां इंसान किस स्थिति में फंसा हुआ है. अगर उसे पर्याप्त हवा-पानी मिल रही है तो वो लंबे समय तक जीवित रह सकता है. लेकिन अगर उसे गंभीर चोट लगी है तो हवा-पानी से संपर्क भी उसे लंबे समय तक नहीं बचा पाती.
जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर और आपातकालीन प्रतिक्रिया विशेषज्ञ डॉ. जोसेफ बारबेरा ने कहा कि अगर इमारत ढहने की वजह से आग लगती है, धुआं या खतरनाक केमिकल्स निकलते हैं तो किसी भी इंसान के बचने की संभावना कम हो जाती है. इसके अलावा मलबे के नीचे फंसे व्यक्ति को हवा और पानी मिलना भी जरूरी होता है. अगर व्यक्ति जहां फंसा है वहां पर्याप्त हवा आ-जा रही है और उसके पास पानी है तो उसके जिंदा रेस्क्यू की संभावना बढ़ती है.
बारबेरा ने कहा, 'आप खाना के बिना कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं. लेकिन आप पानी के बिना कम समय तक जीवित रह सकते हैं.'
अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसी जगह फंसा हुआ है जहां का तापमान ज्यादा हो गया है तो यह कारक उसके जीवित रहने को प्रभावित कर सकता है. मलबे के अंदर कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बेहद तेजी से बढ़ता है. कार्बन डाईऑक्साइड गर्मी पैदा करती है और अगर कोई बेहद कम जगह में फंसा हुआ है तो गर्मी से उसका दम घुट सकता है. रेस्क्यू के वक्त सर्च टीम मलबों की जगह पर कार्बन डाईऑक्साइड का लेवल चेक करती हैं, जहां स्तर कम होता है, उन हिस्सों पर ज्यादा फोकस किया जाता है.
बारबेरा ने कहा कि मलबे से जीवित निकाले जाने के बाद लोगों के लिए चिकित्सा देखभाल बेहद जरूरी होता है. अगर ऐसा नहीं होता और उन्हें मेडिकल सहायता नहीं मिल पाती तो उनकी हालत और खराब हो सकती है. मलबे में दबने से उनकी मांसपेशियों पर असर होता है और उसमें विषाक्त पदार्थ बन जाते हैं जिन्हें नहीं निकाला गया तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.
मलबे के नीचे दबने पर लोग हाथ-पैरों को दबा और सिकुड़ा महसूस करते हैं. मांसपेशियों में सूजन आने लगती है जिससे न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी पैदा हो जाती हैं. इससे किसी भी इंसान के जीने की संभावना कम होती जाती है.
भूकंप के दौरान क्या करें?
अंगर आप किसी खुली जगह हैं और भूकंप के झटके आ रहे हैं तो आप जहां हैं, वहीं रुक जाएं. अगर आपके आसपास कोई इमारत, पेड़, बिजली और फोन केबल, तारों के खंबे, सीवेज आदि है तो उससे दूर भागने की कोशिश करें.
वहीं, अगर आप छोटी इमारतों में रह रहे हैं तो घर से बाहर निकलकर तुरंत किसी खुले स्थान पर चले जाएं. लेकिन अगर आप किसी बड़ी इमारत में रह रहे हैं तो भूकंप के समय किसी मजबूत फर्निचर के नीचे छिप जाएं और मलबे के धूल से बचने के लिए अपने चेहरे को किसी कपड़े या मास्क से ढक लें. भूकंप के दौरान घर की खिड़कियां और छज्जे सबसे पहले गिरते हैं तो इन जगहों के पास छिपने की कोशिश न करें.