नेपाल ने माउंट एवरेस्ट समेत अपने पहाड़ों पर अकेले जाने वाले पर्वतारोहियों पर रोक लगा दी है. नेपाल की ओर से यह कदम किसी आशंकित घटना को रोकने के लिए उठाया गया है. नेपाली पर्यटन मंत्रालय के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी.
नेपाली कैबिनेट ने गुरुवार रात को हुई एक बैठक में पर्वतारोहण की अपनी पुरानी नीति में बदलाव किया. अब पहाड़ों पर अकेले जाने वाले पर्वतारोही एवरेस्ट समेत दूसरी नेपाली पहाड़ियों पर नहीं जा सकेंगे.
ये बदलाव वर्ष 2018 के वसंत के पर्वतारोही सत्र के शुरू होने से पहले किए गए हैं. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन सचिव सचिव महेश्वर नेपाने ने बताया, 'ये बदलाव इकलौते पर्वतारोहियों के लिए किए गए हैं. पहले उनके जाने पर कोई रोक नहीं थी.'
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उन्होंने कहा कि ये बदलाव दुर्घटनाओं को रोकने और पर्वतारोहण को सुरक्षित बनाने के लिए किए गए हैं. आपको बता दें कि अनुभवी स्विस पर्वतारोही एली स्टेक की इसी साल अप्रैल में फिसलकर गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई थी. वह एवरेस्ट के पास की एक चोटी पर चढ़ रहे थे.
कहा जा रहा है कि नेपाल के इस फैसले से अकेले चढ़ने वाले जानेमाने पर्वतारोही नाराज हो सकते हैं. नेपाल के नए फैसले से विकलांग और देखने में अक्षम पर्वतारोहियों पर भी बैन लगा दिया है.
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अपने दोनों पैर खो चुके न्यूजीलैंड के मार्क इंग्लिस 2006 में एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले बिना पैरों वाले पर्वतारोही बने थे. अमेरिका के एरिक वेनमेयर ने मई 2001 में एवरेस्ट की चोटी फतह की थी और बाद में सभी सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने वाले पहले ब्लाइंड क्लांइबर बने थे.
अफगानिस्तान में तैनात अपनी दोनों टांगें खोने वाले और एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी कर रहे पूर्व गोरखा सैनिक हरिबुद्धा मागर ने इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि नेपाली कैबिनेट का यह फैसला विकलांगों के प्रति भेदभावकारी है. यह उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है.
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पिछले साल नेपाल में 190 विदेशी और 259 नेपाली यानी कुल करीब 450 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी.