चीन द्वारा जमीन पर कब्जा करते हुए इमारत कड़ी किए जाने पर नेपाल सरकार ने हाल ही में सफाई दी थी. नेपाल सरकार की सफाई पर विपक्षी पार्टियां संतुष्ट नहीं हैं. नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने बताया था कि चीन के साथ किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है. जो इमारत चीन ने बनाई है वह चीन के भूभाग में है. इस बयान के बाद प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़े कर दिए.
नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता विश्वप्रकाश शर्मा ने एक बयान जारी करते हुए सरकार से पूछा कि विवादित क्षेत्र का दौरा करने गए अधिकारी अभी तक लौटे नहीं हैं और उन्होंने अपनी रिपोर्ट भी नहीं दी है तो फिर किस आधार पर सरकार यह कह रही है कि चीन ने नेपाल की भूमि पर कब्जा नहीं किया है. साथ ही पार्टी ने नेपाली भूमि पर कब्जा किए जाने का कड़ा विरोध किया है. पार्टी ने कहा कि सरकार को डिप्लोमैटिक नोट भेजना चाहिए.
इसी बीच सरकार को गलत जानकारी दिए जाने के कारण हुम्ला जिले के सहायक जिलाधिकारी दत्तराज हमाल को 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. हुम्ला के सहायक जिलाधिकारी की तरफ से अनधिकृत रूप से सरकार को इस बात की गलत जानकारी दी गई थी कि चीन ने जिस जगह इमारत बनाई है वह चीन के ही भूभाग में है.
अधिकारी के कहने पर नेपाल के विदेश मंत्री ने यह दावा किया था कि चीन के साथ किसी प्रकार की कोई सीमा विवाद नहीं है और चीन ने जिस जगह इमारत बनाई है वह सीमा से एक किमी भीतर चीन के इलाके में है. दरअसल, हुम्ला जिले के जिलाधिकारी चिरंजीवी गिरी जब चीन द्वारा अतिक्रमित क्षेत्र का निरीक्षण करने गए थे तब उनकी अनुपस्थिति में सहायक जिलाधिकारी ने उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर ना सिर्फ गृह मंत्रालय को बल्कि पत्रकारों को भी इस विषय में गलत जानकारी दी थी.
जिले के प्रमुख जिलाधिकारी गिरी अभी लौटे नहीं हैं. उनके लौटने के बाद वो अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे. नेपाल के स्थानीय जनप्रतिनिधि अभी भी दावा कर रहे हैं कि जिस क्षेत्र में चीन ने इमारत बनाई है वह नेपाली भूभाग में है.