scorecardresearch
 

नेपाल: चीन का अतिक्रमण उजागर करने वाले पत्रकार की मौत, बैकफुट पर सरकार

जून में चीनी अतिक्रमण को लेकर बनिया की खबर ने चीनी और नेपाली नेतृत्व के बीच बेचैनी पैदा कर दी. यह ऐसे समय में आई जब दोनों देश अपने संबंधों को लेकर नए तरह से सोच रहे थे और जब चीन, भारत के साथ एक क्षेत्रीय विवाद में बुरी तरह उलझा था.

Advertisement
X
पत्रकार की मौत पर बवाल
पत्रकार की मौत पर बवाल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नेपाल में पत्रकार की मौत पर बवाल
  • चीन के अतिक्रमण की खबर छापी थी
  • लोगों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

नेपाली अखबार कांतिपुर डेली में सहायक संपादक बलराम बनिया को जून में इस खबर को उजागर करने का श्रेय दिया जाता है कि चीन ने नेपाल में गोरखा जिले के अंतर्गत आने वाले गांव रुई का अतिक्रमण किया है.

बनिया 11 अगस्त को मकवापुर में मंडो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के पास बागमती नदी के किनारे मृत पाए गए. वह एक दिन पहले लापता हो गए थे जिसके बाद उनके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

उनकी मौत से नेपाली पत्रकारों में बेचैनी पैदा हुई है और प्रेस यूनियनों ने उनकी मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की है. इनमें फेडरेशन ऑफ नेपाली जर्नलिस्ट्स, फ्रीडम फोरम और नेपाल प्रेस यूनियन शामिल हैं.

रुई गांव के चीनी अतिक्रमण पर उनकी खबर सार्वजनिक होने के बाद बनिया और उनका अखबार, दोनों दबाव में आ गए. अखबार को माफी जारी करनी पड़ी और बनिया को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया, उनकी खबर ने एक हलचल पैदा कर दी थी क्योंकि अन्य मीडिया संगठनों ने इसे उठाया और अपने स्तर से इसकी जांच की.

Advertisement



जून में चीनी अतिक्रमण को लेकर बनिया की खबर ने चीनी और नेपाली नेतृत्व के बीच बेचैनी पैदा कर दी. यह ऐसे समय में आई जब दोनों देश अपने संबंधों को लेकर नए तरह से सोच रहे थे और जब चीन, भारत के साथ एक क्षेत्रीय विवाद में बुरी तरह उलझा था.

नेपाली नागरिकों द्वारा सोशल मीडिया पर हंगामा करने के बाद चीनी नेटवर्क ने इस ट्वीट को हटा दिया और इसे एक लोगों को शांत करने वाले ट्वीट के साथ बदलते हुए कहा, ".. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट कोमोलंगमा नेपाल-चीन सीमा पर स्थित है."

हालांकि, इसने इस ट्वीट में भी सार्वभौमिक नाम माउंट एवरेस्ट के बजाए इसे माउंट कोमोलंगमा ही कहा. बलराम बनिया की मौत की निष्पक्ष जांच से उनके निधन से जुड़ी अटकलों पर भले ही लगाम लगाई जा सके लेकिन एक मित्र देश नेपाल में चीनी अतिक्रमण पर उनकी न्यूज रिपोर्ट की चमक आसानी से फीकी नहीं पड़ सकती. 

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement