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अफ्रीका में फिर बढ़ा तनाव, नाइजर-माली-बुर्किना फासो ने इस अहम संगठन को छोड़ा

नाइजर में तख्तापलट के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला ECOWAS बिखरता नजर आ रहा है. हाल ही नाइजर और माली-बुर्किना फासो ने इस ग्रुप से किनारा कर लिया है, जो उनपर लोकतंत्र बहाल करने का दबाव बना रहे थे. सैन्य शासकों का कहना है कि सुरक्षा बहाल करने के लिए यह कदम उठाए गए हैं.

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सैन्य तख्तापलट के बाद जनरल अब्दौराहमाने त्चियानी नाइजर के नए नेता हैं (AFP Photo)
सैन्य तख्तापलट के बाद जनरल अब्दौराहमाने त्चियानी नाइजर के नए नेता हैं (AFP Photo)

पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर, माली और बुर्किना फासो ने पश्चिमी अफ्रीकी देशों के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) से किनारा कर लिया है. इकोवस एक क्षेत्री संगठन है जो इन तीनों देशों में तख्तापलट का विरोधी रहा है. हाल ही में नाइजर में तख्तापलट के बाद से इकोवस खूब चर्चा में रहा था. यह क्षेत्रीय समूह इन तीनों देशों से लोकतंत्र बहाल करने की अपील कर रहा था. इसी समूह ने नाइजर पर एयर स्ट्राइक की चेतावनी दी थी.

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तीनों देशों नाइजर, माली और बुर्किना फासो ने इकोवस ग्रुप छोड़ने को लेकर संयुक्त बयान जारी किए हैं. ये फैसला ना सिर्फ पश्चिमी अफ्रीकी देशों में लोकतंत्र बहाली के लिए झटका है बल्कि क्षेत्र को एक करने की ग्रुप की कोशिशों के लिए भी बड़ा झटका है. तख्तापलट के बाद से, प्रतिबंधों, बातचीत और सैन्य हस्तक्षेप की धमकियों के बावजूद, इकोवस नाइजर में लोकतंत्र बहाल करने में विफल रहा है.

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फ्रांस के साथ भी सैन्य शासकों ने तोड़ा नाता

सैन्य शासकों ने ग्रुप के खिलाफ अपनी बयानबाजी कड़ी कर दी है और उस पर बाहरी शक्तियों से प्रभावित होने का आरोप लगाया है. तीनों देशों ने पूर्व औपनिवेशिक फ्रांस के साथ सैन्य और सहयोग संबंधों को तोड़ लिया है, और सुरक्षा सहायता के लिए रूस पर निर्भर हो गया है.

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चुनाव से पहले सुरक्षा बहाल करने के लिए लिया एक्शन

माली, नाइजर और बुर्किना फासो के तीन सैन्य नेताओं ने तर्क दिया है कि वे चुनाव आयोजित करने से पहले सुरक्षा बहाल करना चाहते हैं, क्योंकि तीन साहेल राष्ट्रों के संघर्ष में अल कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े विद्रोह शामिल हैं. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नाइजर, बुर्किना फासो और माली में जुंटा के फैसले का 15 सदस्यीय क्षेत्रीय ब्लॉक पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जहां ट्रेड और आम लोगों का आना जाना आसान है.

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यूईएमओए के भी सदस्य हैं तीनों देश

ब्लॉक की संधि के मुताबिक, ग्रुप छोड़ने के इच्छुक सदस्य देशों को एक साल का लिखित नोटिस देना होगा. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों देशों ने ऐसा किया है या नहीं. संधि कहती है कि उन्हें साल भर की अवधि के दौरान इसके प्रावधानों का पालन करना होगा. ये तीनों देश आठ देशों वाले पश्चिम अफ्रीकी मौद्रिक संघ (यूईएमओए) के भी सदस्य हैं.

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