आतंकियों का नया गढ़ बनते जा रहे कनाडा की सरकार उन्हें खुला संरक्षण दे रही है. भारत की जमीन पर खालिस्तान बनाने का सपना देखने वाले आतंकी कनाडा में खुलेआम हिंसा करते हैं, लेकिन जस्टिन ट्रूडो सरकार उन पर एक्शन लेने की जगह खालिस्तानियों को सुरक्षा तक मुहैया कराती है. कनाडा की सड़कों पर खुलेआम घूमते आतंकी कभी मंदिर पर अटैक करते हैं तो कभी भारतीय दूतावास को भी निशाना बनाने को कोशिश करते हैं.
ट्रूडो सरकार आतंकियों को कैसे सुरक्षा देती है, इसका खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि, हाल ही में कनाडा में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के बेटे बलराज निज्जर ने किया है. हरदीप सिंह निज्जर के बेटे बलराज ने कनाडा के मीडिया हाउस लोकल डेली (local daily) से बातचीत में बड़ा खुलासा करते हुए कहा,'मेरे पिता कनाडा की सिक्योरिटी एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) के अधिकारियों के साथ लगातार सीक्रेट मीटिंग करते रहते थे. वह हफ्ते में करीब दो से तीन बार अधिकारियों से मिलकर उन्हें बातचीत करते थे.'
बेटे के खुलासे ने खोली कनाडा की पोल
बलराज ने यह भी बताया कि उसके पिता ने हत्या से ठीक दो दिन पहले कनाडा के अधिकारियों से सीक्रेट मुलाकात की थी. इतना ही नहीं निज्जर दो दिन बाद वह एक बार फिर मीटिंग करने वाला था. बलराज का यह खुलासा ही साबित करने के लिए काफी है कि कनाडा आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह (safe haven) बनता जा रहा है. गोल्डी बराड़ जैसे गैंगस्टर से लेकर अर्श डाला और लखबीर सिंह लाडा जैसे खालिस्तानियों ने कनाडा में शरण ले रखी है. भारत सरकार जब कनाडा से इन्हें सौंपने की मांग करती है तो कनाडाई सरकार बहाने बनाकर अपील को टाल देती है.
जगमीत सिंह बन गए हैं ट्रूडो की मजबूरी
दरअसल, कनाडा में सरकार चला रहे जस्टिन ट्रूडो अपने निजी स्वार्थ के लिए आतंकियों का समर्थन कर रहे हैं. ट्रूडो की लिबरल पार्टी ने जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (New Democratic Party) के साथ गठबंधन कर रखा है. इस पार्टी के चीफ जगमीत सिंह कई मौकों पर भारत की आलोचना करते रहे हैं. वह भारतीय मूल के सिख हैं, लेकिन उनका जन्म कनाडा के ओंटारियो में हुआ है. जगमीत के भारत विरोधी स्टैंड के कारण ही साल 2013 में भारत ने उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया था.
कनाडा में छिपे ये 7 गैंगस्टर
पिछले दिनों पंजाब पुलिस ने 3 मामलों में 7 ऐसे गैंगस्टर को नामित किया था, जो कनाडा में छिपे हैं, जिसमें पिछले साल मई में मोहाली में खुफिया मुख्यालय पर हमला, 29 मई को सिद्धू मूसेवाला की हत्या और कनाडा के सरे में रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या के केस शामिल हैं. पंजाब पुलिस ने जिन गैंगस्टर का नाम शामिल किया था, उनमें लखबीर सिंह उर्फ लांडा, गोल्डी बराड़, चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू रंधावा, अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला और रमनदीप सिंह उर्फ रमन जज, गुरपिंदर सिंह उर्फ बाबा डल्ला और सुखदुल सिंह उर्फ सुक्खा शामिल थे. बाबा और सुक्खा टारगेट किलिंग के मामले में आरोपी थे, जिसमें से सुक्खा की हत्या हो चुकी है. इसके अलावा कनाडा में छिपे गुरविंदर सिंह, सनवर ढिल्लन, सतवीर सिंह वारिंग भी NIA की रडार पर हैं.
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अखबार को कैस मिला VIDEO?
इस बीच कनाडा के गुरुद्वारे ने सवाल उठाया है कि निज्जर की हत्या का वीडियो मीडिया केपास कैसे पहुंच गया. बता दें कि कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के जिस गुरुद्वारे के सामने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी, उस गुरुद्वारे ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि वॉशिंगटन पोस्ट अखबार के पास मर्डर का सीसीटीवी फुटेज कैसे पहुंचा. गुरुद्वारे के प्रवक्ता गुरकीरत सिंह ने कनाडा की न्यूज एजेंसी को बताया कि हमसे यह कहा गया था कि वीडियो मीडिया या जनता के लिए नहीं है, इसका इस्तेमाल सिर्फ जांच के लिए किया जाएगा. किसी को भी वीडियो जारी नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके बाद बी वॉशिंगटन पोस्ट ने वीडियो जारी कर दिया.
कहां तक पहुंची निज्जर केस की जांच?
निज्जर की हत्या के बाद भारत पर आरोप लगाने वाली कानाडा सरकार अब तक दुनिया के सामने सबूत के नाम पर कुछ भी पेश नहीं कर सकी है. जस्टिन ट्रूडो बार-बार जांच चलने की बात दोहरा रहे हैं. लेकिन उनके पास कोई ठोस सबूत नजर नहीं आ रहा है. फिलहाल, कनाडा की सरकार भारत से जांच में सहयोग करने की अपील कर रही है.
कैसे हुई थी निज्जर की हत्या?
18 जून 2023 में कनाडा के Surrey में निज्जर की हत्या हुई थी. निज्जर को मंदिर की पार्किंग में उसके ट्रक में गोली मारी गई थी. कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच के मुताबिक निज्जर को दो हमालवारों ने गोली मारी थी. घटनास्थल के पास ही तीसरा शख्स एक गाड़ी लेकर खड़ा हुआ था. वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर इस गाड़ी में सवार होकर फरार हो गए थे. इस मामले में अब तक किसी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है.
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निज्जर फर्जी पासपोर्ट से पहुंचा था कनाडा
कनाडाई मीडिया टोरंटो सन की रिपोर्ट के मुताबिक निज्जर 1997 में फर्जी पासपोर्ट के जरिए शरणार्थी बनकर कनाडा पहुंचा था. शरण के लिए दी गई उसकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था, लेकिन इसके ठीक 11 दिन बाद उसने कनाडाई मूल की एक महिला से शादी कर ली. हालांकि, इस शादी का मकसद सिर्फ कनाडा की नागरिकता हासिल करना ही था.
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पुजारी की हत्या से बम ब्लास्ट तक में आया नाम
1. निज्जर पर 2022 में पंजाब के जालंधर में हिंदू पुजारी की हत्या की साजिश रचने का आरोप था.
2. उस पर अगस्त 2009 में राष्ट्रीय सिख संगत प्रमुख रूलदा सिंह की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था.
3. साल 2007 में लुधियाना के श्रृंगार सिनेमा में हुए ब्लास्ट में निज्जर का नाम था. इसमें 6 बेकसूर मारे गए थे.
4. पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह हत्याकांड में शामिल जगतार सिंह तारा को 2012 में 10 लाख रुपये उपलब्ध कराए थे.
5. निज्जर के लिए इंटरपोल का नोटिस भी जारी किया गया था. वह गुरुपतवंत सिंह पन्नू के आतंकी संगठन SFJ से जुड़ा हुआ था.