
वैश्विक परमाणु सुरक्षा की स्थिति का मूल्यांकन करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन नेशनल थ्रेट इनिशिएटिव (NTI) के परमाणु सुरक्षा सूचकांक ने पाकिस्तान को भारत से ऊपर स्थान दिया है. यानी सूचकांक में परमाणु सामग्री की सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान को भारत से बेहतर करार दिया गया है.
मंगलवार को जारी नई रैंकिंग में संगठन ने खतरनाक परमाणु सामग्री के रखरखाव के मामले में पाकिस्तान को भारत, ईरान और उत्तर कोरिया से आगे रखा है. पाकिस्तान ने इस बार पहले से तीन अंक अधिक हासिल किए हैं और 22 देशों की सूची में 19वां स्थान हासिल किया है.
एनटीआई (Nuclear Threat Initiative) का परमाणु सुरक्षा सूचकांक कई संकेतकों और मानदंडों के आधार पर देशों की परमाणु सुरक्षा की क्षमता और उसके लिए किए जा रहे प्रयासों को मापता है. इसमें परमाणु प्लांट्स और सामग्रियों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और संधियों का पालन, परमाणु सुरक्षा के लिए नियामक ढांचा और परमाणु हथियारों या सामग्रियों को गलत हाथों में जाने से रोकने के लिए किए जा रहे उपाय शामिल हैं.
एनटीआई एक गैर-लाभकारी संस्था है जो इस सूचकांक को तैयार करती है. एनटीआई इस बात का रिकॉर्ड रखती है कि परमाणु संपन्न देश अपने परमाणु सामग्री को किस तरह संभाल रहे हैं और उसकी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रहे हैं.
परमाणु सुरक्षा सूचकांक में भारत से आगे पाकिस्तान
एनटीआई के सूचकांक (खतरनाक परमाणु सामग्री के रखरखाव के मामले में) में पाकिस्तान 49 अंकों के साथ 19वें स्थान पर है. भारत 40 अंकों के साथ पाकिस्तान से एक अंक नीचे 20वें स्थान पर है. सूचकांक में ईरान 29 अंकों के साथ 21वें स्थान पर है. उत्तर कोरिया सबसे खराब प्रदर्शन करते हुए 18 अंकों के साथ 22वें स्थान पर है.
वहीं, परमाणु केंद्रों (न्यूक्लियर फैसिलिटी) की सुरक्षा के मामले में भी पाकिस्तान का सूचकांक भारत से कहीं आगे है. 47 देशों की सूची में पाकिस्तान को 61 अंक मिले हैं और वो रूस और इजरायल के साथ 32वें स्थान पर है. जबकि भारत इस सूची में 52 अंकों के साथ 40वें स्थान पर है.
कैसे तय होती है रैंकिंग
परमाणु सुरक्षा सूचकांक की रैंकिंग 175 देशों और ताइवान में परमाणु सुरक्षा की स्थितियों का आकलन करती है.
इसमें एक किलोग्राम से अधिक परमाणु सामग्री (अत्यधिक संशोधित यूरेननियम और प्लूटोनियम) वाले 22 देशों का आकलन किया जाता है कि वो अपने परमाणु सामग्री के चोरी अथवा उसके गलत हाथों में जाने से रोकने और उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या उपाय करते हैं.
यह रैंकिंग उन 154 देशों और ताइवान का भी मूल्यांकन करती है जिनके पास एक किलोग्राम से कम या कोई हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली परमाणु सामग्री नहीं है. ऐसे में वैश्विक परमाणु सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों में उनके समर्थन का मूल्यांकन किया जाता है.
पाकिस्तान की सुधरी रैंकिंग पर बात करते हुए पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक डॉ. समर मुबारकमंद ने कहा कि परमाणु सुरक्षा सूचकांक में सुधार से पता चलता है कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु देश है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास तीन दशकों से अधिक समय से परमाणु हथियार हैं और उसने परमाणु परीक्षण भी किया है बावजूद इसके पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम सुरक्षित बना हुआ है.
NTI सूचकांक ने वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर जताई चिंता
रैंकिंग जारी करने के साथ ही NTI सूचकांक ने अपनी रिपोर्ट में वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई है और कहा कि इसकी स्थिति बिगड़ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु हथियार बनाने वाली सामग्री को बढ़ाने की होड़ के साथ ही इनके आतंकी संगठनों के हाथ लग जाने का खतरा भी बढ़ गया है.
NTI के मुख्य कार्यकारी और ओबामा प्रशासन में अमेरिकी ऊर्जा सचिव रह चुके अर्नेस्ट जे. मोनिज ने इंडेक्स के इंट्रो में लिखा है, 'परमाणु जोखिमों को कम करने की प्रतिबद्धता घट रही है जो बहुत परेशान करने वाली है. देश परमाणु सुरक्षा पर शीत युद्ध खत्म होने के बाद से चली आ रही कड़ी मेहनत को असफल करने में लगे हैं.'
रिपोर्ट में कहा गया, 'परमाणु सुरक्षा को लेकर वर्षों तक रिपोर्ट करने के बाद 2023 में पहली बार एनटीआई परमाणु सुरक्षा सूचकांक में पाया गया कि परमाणु हथियार बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले परमाणु सामग्री और परमाणु प्लांट्स वाले दर्जनों देशों में परमाणु सुरक्षा की स्थिति फिर से खराब हो रही है.'
भारत, पाकिस्तान समेत कई देश परमाणु सामग्री में कर रहे बढ़ोतरी
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान सहित कई देश हथियार बनाने के लिए अपने परमाणु सामग्री के भंडार में बढ़ोतरी कर रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, 'आठ देशों- फ्रांस, भारत, ईरान, इजरायल, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस और ब्रिटेन ने हथियार बनाने में इस्तेमाल योग्य परमाणु सामग्री के अपने भंडार में बढ़ोतरी की है. कुछ मामलों में तो देशों ने हर साल हजारों किलोग्राम तक अपना भंडार बढ़ाया है जिससे परमाणु हथियारों को विश्व से कम करने के प्रयास कमजोर हो गए हैं और उनके चोरी का खतरा भी बढ़ गया है. देश भी परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान परमाणु को लेकर अपनी प्रगति, विश्वास कायम करने और सूचना साझा करने की अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट रहे हैं.'
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ देशों में परमाणु सुरक्षा की स्थिति सुधरी है और साउथ एशिया के देशों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है.