रूस, सऊदी अरब समेत ओपेक प्लस के सदस्य देशों ने अचानक से तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा की है. ओपेक + के इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 8% तक बढ़ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई है.
भारत फिलहाल रूस से रियायत कीमतों पर कच्चा तेल खरीद रहा है. लेकिन ओपेक प्लस के इस कदम के बाद रूसी कच्चे तेल की कीमत में भी बढ़ोतरी हो रही है. इससे भारतीय तेल व्यापार में शामिल बैंकों की भी चिंताएं बढ़ने लगी हैं. देश के दो बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने प्राइस कैप से ऊपर लेनदेन करने से इनकार कर दिया है.
दरअसल, अमेरिकी समेत कई पश्चिमी देश रूस पर आर्थिक प्रतिबंध और रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल की प्राइस कैप लगाए हुए हैं. यानी 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तेल आयात पर उस तेल के लिए कंपनियों को शिपिंग, बैंकिग, बीमा और वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी.
रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी कच्चे तेल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी के कारण रूस से लंबे समय तक तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है. देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल रिफाइन कंपनी इंडियन ऑयल भले ही पहले से रूसी तेल निर्यातक Rosneft PJSC से डील कर चुकी है. लेकिन अन्य छोटे तेल कंपनियों के लिए रूसी तेल का सौदा करना मुश्किल है.
SBI और BOB ने लेनदेन से किया इनकार
रिपोर्ट के मुताबिक, तेल रिफाइन कंपनी के एक एग्जीक्यूटिव ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) ने तेल रिफाइन कंपनियों को सूचित किया है कि वे प्राइस कैप से ऊपर खरीदे गए तेल का भुगतान इस बैंक के माध्यम से नहीं कर पाएंगे.
इसके अलावा, एग्जीक्यूटिव ने बताया है कि दक्षिण एशियाई देशों में बंदरगाहों पर शिपिंग और लॉजिस्टिक चार्ज जोड़ने से पहले बैंक कच्चे तेल की कीमतों पर कड़ी नजर रख रहे हैं. हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
रिफाइनरी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि रूसी तेल ब्रेंट क्रूड ऑयल से नीचे कारोबार करता है, लेकिन बेंचमार्क कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहना चाहिए. ऐसे में ओपेक + सदस्य देशों के तेल की कीमत तय प्राइस कैप से ऊपर चली जाएगी. रूस भी ओपेक प्लस का सदस्य देश है.
मुंबई स्थित एक अन्य तेल रिफाइन कंपनी के एक एग्जक्यूटिव ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा के इस फैसले के बाद तेल कंपनियां उन भारतीय बैंकों के माध्यम से लेनदेन पर विचार कर सकती हैं, जिनका विदेशी एक्सपोजर बहुत कम हो और अमेरिका को तकलीफ पहुंचाए बिना रूसी तेल का भुगतान करने के लिए तैयार हो.
कच्चे तेल की कीमत में उछाल
भारत अपनी जरूरतों का 80 फीसदी तेल आयात करता है. रियायत कीमतों पर मिलने के कारण भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है. मार्च महीने में भारत ने कुल आयात का 34 फीसदी तेल अकेले रूस से खरीदा है.
भारत अभी रूस से अकाउंट लॉजिस्टिक और अन्य कीमतों को ध्यान में रखते हुए डिलिवर्ड बेसिस पर तेल आयात करता है. लेकिन ओपेक प्लस की ओर से तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी हुई है. जिसके बाद बैंक फ्री-ऑन-बोर्ड प्राइस डिटेल्स की मांग कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रूस से खरीदा जा रहा तेल प्राइस कैप के तहत निर्धारित कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल या उससे कम है.
हालांकि, रूस अभी भी किसी भी कीमत पर अपना तेल बेच सकता है. यदि वह यूरोपीय यूनियन के जहाजों (vessels) का उपयोग ना करे. लेकिन यह आसान नहीं है, क्योंकि जहाजों के सीमित विकल्प हैं.
एनर्जी कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्सा लिमिटेड के एक विश्लेषक सेरेना हुआंग का कहना है कि रूसी कच्चे तेल की कीमत प्राइस कैप के ऊपर होने पर शिपमेंट के लिए कम ही जहाज तैयार होंगे. ऐसे में भारतीय निर्यात पर असर पड़ेगा. अगर छोटे-छोटे कार्गो जहाज तेल का निर्यात करते हैं, तो माल ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी और भारत रूसी तेल खरीदना उतना मुनासिब नहीं समझेगा. क्योंकि ढुलाई लागत के कारण रूस से तेल खरीदना भारत के लिए फायदा का सौदा नहीं रह जाएगा.
रूस भारत के लिए टॉप सप्लायर
भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत को सबसे सस्ता तेल रूस से ही मिल रहा है. भारत सबसे महंगा तेल सऊदी अरब से खरीद रहा है. वहीं, वोर्टेक्सा के मुताबिक, लगातार पिछले छह महीने से रूस, भारत के लिए सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश है. भारत ने मार्च 2022 में रूस से 1.64 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया है. यह भारत के कुल आयात का लगभग 34 प्रतिशत है.
कुल तेल उत्पादन का 44 प्रतिशत उत्पादन Opec+ देशों से
ओपेक प्लस 24 देशों का संगठन है. इस समूह में सऊदी अरब समेत 13 ओपेक देश हैं, जबकि 11 अन्य गैर-ओपेक देश हैं. सऊदी अरब, ईरान, इराक और वेनेजुएला जैसे 13 प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक को 'कार्टेल' कहा जाता है. इसमें शामिल सदस्य देश कुल वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग 44 प्रतिशत उत्पादन करते हैं.
ओपेक प्लस में सऊदी अरब का दबदबा माना जाता है. रूस भी इस संगठन का एक सदस्य देश है. पिछले कुछ महीनों से सऊदी अरब का रूस की ओर झुकाव रहा है.