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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भारत को लौटाएगी 500 साल पुरानी प्रतिमा, तमिलनाडु के मंदिर से हुई थी चोरी

भारत सरकार ने तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई कांस्य मूर्ति के लिए ब्रिटेन के संग्रहालय को फॉर्मल रिक्वेस्ट भेजा था, जो नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक संग्रहालय में पहुंची थी.

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (फोटो- X/@FXMC1957)
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (फोटो- X/@FXMC1957)

ब्रिटेन (Britain) की जानी-मानी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) ने एक संत की 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति भारत को लौटाने पर सहमति जताई है. इसके बारे में कहा जाता है कि यह तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई थी.

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विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय (Ashmolean Museum) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि 11 मार्च 2024 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की काउंसिल ने एशमोलियन संग्रहालय से संत तिरुमंकाई अलवर की 16वीं शताब्दी की कांस्य मूर्ति की वापसी के लिए भारतीय उच्चायोग के दावे का समर्थन किया. यह फैसला अब अप्रूवल के लिए चैरिटी आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा.

रिसर्च से पता चली मूर्ति की ओरिजिन

संत तिरुमंकाई अलवर की 60 सेमी ऊंची प्रतिमा को 1967 में डॉ. जे.आर. बेलमोंट (1886-1981) नामक एक कलेक्टर के कलेक्शन से सोथबी के नीलामी घर से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय द्वारा ले लिया गया था. संग्रहालय का कहना है कि पिछले साल नवंबर में एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने उसे प्राचीन प्रतिमा की ओरिजिन के बारे में बताया, जिसके बाद उसने भारतीय उच्चायोग को एलर्ट किया.

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भारत सरकार ने तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई कांस्य मूर्ति के लिए ब्रिटेन के संग्रहालय को फॉर्मल रिक्वेस्ट भेजा था, जो नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक संग्रहालय में पहुंची थी. 

इससे पहले भी चुराई गई भारतीय कलाकृतियों को ब्रिटेन से भारत वापस लाया जा चुका है. पिछले साल अगस्त में जब आंध्र प्रदेश से आई चूना पत्थर की नक्काशीदार राहत मूर्ति और 17वीं शताब्दी के तमिलनाडु से आई “नवनीत कृष्ण” कांस्य मूर्ति को स्कॉटलैंड यार्ड की कला और प्राचीन वस्तु इकाई से जुड़ी अमेरिका-ब्रिटेन की संयुक्त जांच के बाद ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त को सौंप दिया गया था.

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