अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल का हत्यारा आतंकी अहमद उमर शेख जेल से बाहर आने ही वाला था कि अमेरिका की फटकार सुनने के बाद पाकिस्तान एक्शन लेने पर मजबूर हुआ.
सिंध की सरकार ने अदालत से बरी करार दिए गए चारों दोषियों के खिलाफ मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर कानून लगा दिया है और उसे एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे पहले सिंध की एक अदालत ने इन चारों को डेनियल पर्ल की हत्या के केस में बरी कर दिया था.
अदालत ने किया था बरी
बता दें कि सिंध हाई कोर्ट ने द वाल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के दोषी अहमद उमर शेख की मौत की सजा को कम कर दिया था और बाकी तीन दोषियों फहाद नसीम, सईद सलमान साकिब और शेख मोहम्मद आदिल को बरी कर दिया था.
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अदालत ने 46 साल के आतंकी शेख उमर को अपेक्षाकृत छोटे गुनाह जैसे किडनैपिंग का दोषी माना और उसे 7 साल की सजा सुनाई, जबकि वो इस मामले में साल 2002 से ही जेल में है और 18 साल की सजा काट चुका है. सिंध हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक शेख उमर जेल से रिहा हो सकता है और सामान्य जिंदगी गुजार सकता है.
जबकि अदालत ने फहाद नसीम, सईद सलमान साकिब और शेख मोहम्मद आदिल को बरी कर दिया, ये सभी इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे.
भारत-अमेरिका ने की थी निंदा
ये फैसला आने के बाद अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. अमेरिका के विदेश मंत्रालय की अधिकारी एलिस वेल्स ने कहा कि डेनियल पर्ल के हत्यारों की सजा को पलट देना आतंकवाद के पीड़ितों के लिए झटके जैसा है. भारत ने भी पाकिस्तानी अदालत के फैसले की निंदा की थी.
सिंध सरकार ने लगाया मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट
कड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के बाद पाकिस्तान की सिंध प्रांत की सरकार ने इन चारों के खिलाफ मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर कानून लगाया. सिंध सरकार ने कहा है कि इनको रिहा किए जाने से सूबे की कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता है. सिंध सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है.
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बता दें कि डेनियल पर्ल ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख थे और वर्ष 2002 में पाकिस्तान में आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर सिर कलम कर दिया था. डेनियल पर्ल आईएसआई और अल कायदा के बीच संबंधों की जांच कर रहे थे. आतंकी उमर शेख भारत की जेल में बंद था. साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाईजैक कर छोड़ने के एवज में भारत सरकार ने आतंकी उमर शेख, मौलाना मसूद अजहर और मौलाना मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा किया था.