पाकिस्तान में बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर दिनभर सियासी ड्रामा चलता रहा. कोर्ट के आदेश पर पुलिस और बाद में रेंजर्स इमरान को गिरफ्तार करने उनके आवास पर पहुंची. उनके आवास की पूरी तरह से घेराबंदी भी कर दी गई. इस बीच पुलिस और इमरान खान के समर्थकों के बीच झड़प भी हुई. लेकिन बाद में कोर्ट से उन्हें फौरी राहत भी मिल गई.
लाहौर हाईकोर्ट ने पुलिस को जमान पार्क में इमरान के आवास के बाहर कार्रवाई तत्काल बंद करने का निर्देश दिया. लेकिन अब पाकिस्तान सरकार में सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने दावा किया है कि इमरान खान ने पंजाब पुलिस को रोकने के लिए गिलगित बाल्टिस्तान प्रांत की पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सके.
उन्होंने कहा कि गिलगित बाल्टिस्तान की पुलिस को पंजाब पुलिस पर हमला करने के लिए तैयार किया जा रहा था. इस वजह से तोशखाना मामले में पीटीआई प्रमुख इमरान खान को गिरफ्तार करने की कोशिश नाकामयाब रही.
मरियम का यह बयान लाहौर हाईकोर्ट के उस बयान से पहले आया, जिसमें हाईकोर्ट ने इमरान खान के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को गुरुवार सुबह तक के लिए रोकने के आदेश दिया था. बता दें कि तोशखाना मामले में अदालत ने इमरान को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे. इस बीच पाकिस्तान सरकार ने बुधवार को गिलगित बाल्टिस्तान के आईजीपी मुहम्मद सईद का तबादला भी कर दिया.
बता दें कि गिलगित-बाल्टिस्तान में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार है. मरियम ने कहा कि इमरान देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं.
इमरान खान महिलाओं, बच्चों का इस्तेमाल कर रहे
मरियम ने इमरान खान का गिरफ्तारी वारंट दिखाते हुए दावा किया कि कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए 65 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. उन्होंने इमरान पर देश में अशांति और अराजकता फैलाने का भी आरोप लगाया.
मरियम औरंगजेब ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री खान ने पुलिस की झड़प से बचने के लिए महिलाओं और बच्चों का मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया. बता दें कि इससे पहले 1971 में पाकिस्तान के दो प्रांतों की पुलिस आमने-सामने आ गई थी.
मालूम हो कि तोशखाना मामले में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को बुधवार को कोर्ट से राहत मिल गई है. लाहौर हाई कोर्ट ने पुलिस को जमान पार्क में इमरान के आवास के बाहर कार्रवाई तत्काल बंद करने का निर्देश दे दिया है. दरअसल पीटीआई ने मंगलवार को हाई कोर्ट में पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी थी और सरकार से इसे रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया था. इसके बाद पीटीआई नेता फवाद चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को एलएचसी के न्यायमूर्ति तारिक सलीम शेख ने यह आदेश दे दिया.
वहीं इससे पहले तोशखाना मामले में इमरान खान की गिरफ्तारी नहीं हो सकती. दरअसल पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान को मंगलवार से गिरफ्तार करने के लिए जमान पार्क में उनके आवास के बाहर जुटी पुलिस की टुकड़ियां पीछे हट गई हैं.
क्या है तोशखाना मामला?
तोशखाना, कैबिनेट का एक विभाग है, जहां अन्य देशों की सरकारों, राष्ट्रप्रमुखों और विदेशी मेहमानों द्वारा दिए गए बेशकीमती उपहारों को रखा जाता है. नियमों के तहत किसी दूसरे देशों के प्रमुखों या गणमान्य लोगों से मिले उपहारों को तोशखाना में रखा जाना जरूरी है.
इमरान खान 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे. उन्हें अरब देशों की यात्राओं के दौरान वहां के शासकों से महंगे गिफ्ट मिले थे. इसके अलावा उन्हें कई यूरोपीय देशों के राष्ट्रप्रमुखों से भी बेशकीमती गिफ्ट मिले थे, जिन्हें इमरान ने तोशखाना में जमा करा दिया था. लेकिन इमरान खान ने बाद में तोशखाना से इन्हें सस्ते दामों पर खरीदा और बड़े मुनाफे में बेच दिया. इस पूरी प्रक्रिया को उनकी सरकार ने बकायदा कानूनी अनुमति दी थी. जिसको लेकर इमरान अब चारों ओर से घिरे हुए हैं.