लगता है कि बदहाली से गुजर रहे पाकिस्तान के दिन अब फिरने वाले हैं. वहां के पूर्व खनन मंत्री इब्राहिम हसन ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ पाकिस्तान के हवाले से देश में सोने का भारी भंडार मिलने का दावा किया. बकौल हसन, वहां पंजाब प्रांत में सोने के इतने बड़े भंडार का पता लगा है कि देश की आर्थिक तंगी चुटकियों में खत्म हो जाएगी. ये भी कहा जा रहा है कि अवैध खनन रोकने के लिए सरकार ने पाबंदियां भी लगा रखी हैं. लेकिन नदियों में सोने का भंडार मिलना क्या नई उलझनें ला सकता है, जैसा अफ्रीकी देशों में हो रहा है?
सोने के साथ क्यों खाक होने लगा अफ्रीका
बीते डेढ़ दशक में अफ्रीका के कई देशों में सोना और कीमती धातुओं के भंडार की खबरें आईं. साल 2018 में बुर्किना फासो, माली और नाइजर में गोल्ड का पता लगा. ये वो वक्त था, जब इस्लामिक स्टेट सीरिया और इराक से लगभग खत्म हो चुका था. अब उन्हें हेडक्वार्टर की तलाश थी. ये देश उनके लिए बेस्ट हाइड-आउट तो बने ही, साथ ही अपनी टूटी हुई इकनॉमी को दोबारा बनाने का मौका भी दिया. आतंकी गुटों ने खनन से होने वाली कमाई को आतंकवाद और नेटवर्किंग में झोंकना शुरू कर दिया.
कोढ़ में खाज ये कि गोल्ड से जीवन सुधारने का सपना देख रहे स्थानीय लोगों को इसके खनन के काम में लगा दिया गया. मजदूरी लोकल्स कर रहे हैं, और पैसे आतंकियों को मिल रहे हैं. सारे रिसोर्सेज हथिया चुके आतंकी अब वहां के युवाओं को भी अपने साथ मिला रहे हैं.
नकली लड़ाइयों का बन चुका मैदान
कहानी यहीं खत्म हो जाती, तो भी बड़ी बात थी, लेकिन सोने की खबरों ने इन इलाकों को वो गुड़ बना दिया, जहां दुनियाभर से मक्खियां आ रही हैं. कई देश यहां प्रॉक्सी वॉर चला रहे हैं.
रूस पर अक्सर ये आरोप लगता रहा. उसकी कथित भाड़े की सेना वैगनर ग्रुप लंबे समय से यहां एक्टिव है, और ऐसे हर देश में रूस के पक्ष वाली सरकार बनाने की कोशिश में है ताकि खनन का फायदा उसे हो सके. सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में तो सोने और हीरे के खदानों पर उसका सीधा कंट्रोल हो चुका. चीन ने भी इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर घाना, सूडान और कांगो जैसे देशों में भारी इनवेस्टमेंट किया और अब वहां खनन का काबिज हो चुका है.
कुल मिलाकर, सोने के भंडारों का अफ्रीका देशों को उतना फायदा नहीं मिल पा रहा, जितना विदेशी ताकतें उठा रही हैं. बल्कि इसका नुकसान ये हो रहा है कि गोल्ड के फेर में ही दूसरे देश वहां ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं, जिसकी वजह से राजनैतिक अस्थिरता और बढ़ी ही है.
तो क्या पाकिस्तान के साथ भी ये हो सकता है
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सोने के कण मिलने की खबरें पहले भी आती रहीं. कुछ साल पहले बीबीसी की एक डॉक्युमेंट्री में बताया था कि मजदूर बाकी काम छोड़कर सोने के कण छानने के लिए नदी किनारे बैठे रहते हैं. अब पंजाब के अटक जिले में गोल्ड डिपॉजिट की बात हो रही है. ये खबर कितनी पक्की है, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हो सकी. लेकिन हां, ये बात सच है कि भारत से गुजरकर वहां की नदियों में सोने के डिपॉजिट लगातार मिलते रहे. इसी बात को लेते हुए खबरें आ रही हैं कि वहां सिंधु नदी में इसकी पुष्टि हुई है.
क्यों मिलता है नदियों में सोना
पहाड़ों में सोने के अंश पहले से होते हैं. मौसम में बदलाव के साथ पहाड़ टूटते हैं तब उनमें मौजूद ये सोना छोटे-छोटे कणों में टूट जाता है. पहाड़ी नदियों से होते हुए सोने के कण नीचे पहुंच जाते हैं और भारी कण नीचे बैठने लगते हैं. इस प्रोसेस को सेडिमेंटेशन कहते हैं. अक्सर नदियों की मिट्टी और रेत भी फिल्टर का काम करती है, जिससे गोल्ड पार्टिकल्स नदी के अलग-अलग किनारों पर पहुंच जाते हैं. यही सोना फिर खबरों में आ जाता है.
जमीन के भीतर भी हो सकता है भंडार
नदियों के अलावा जमीन के भीतर भी गोल्ड रिजर्व हो सकता है, जिसे मदर लोड कहते हैं. दोनों ही तरह की गोल्ड को निकालना, या ये दावा करना कि पूरा सोना निकाला जा चुका, काफी मुश्किल है. ये प्रोसेस सालोंसाल या कई दशक तक चल सकती है. इतने में राजनैतिक हालात भी बदल जाते हैं, जिससे सोना निकालने की गति तेज या धीमी हो सकती है.
पाकिस्तान में भी कई विदेशी शक्तियां जुटीं
अगर पाकिस्तान की बात करें तो यहां फसल लगने-पकने से पहले ही उसे बांटने वाले आ जुटे हैं. यहां के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में इंटरनेशनल दखलंदाजी के मामले आने लगे हैं. दोनों ही जगहों पर चीन ने भारी निवेश कर रखा है और लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है. माना जा रहा है कि आगे उसका इरादा सोने के खनन पर कब्जा करना होगा. इसे लेकर दोनों ही प्रांतों के लोग अक्सर गुस्सा दिखाते रहे. यहां तक कि खैबर पख्तूनख्वा में तो कई बार चीनी इंजीनियरों और मजदूरों पर हमले भी होते रहे ताकि वे डरकर बाहर चले जाएं.
अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की कंपनियां भी यहां खनन का काम कर रही हैं. इनपर भी वही आरोप हैं, जो चीन पर हैं कि वे अपने फायदे के लिए काम कर रही हैं और स्थानीय लोगों को इसका लाभ बहुत कम मिल पा रही है. बीते दिनों इसे लेकर खैबर पख्तूनख्वा के लड़ाका समूहों ने इस्लामाबाद सरकार को धमकी भी दी थी.