scorecardresearch
 

परवेज मुशर्रफ को श्रद्धांजलि देने पर बंट गई पाकिस्तान की संसद! जानें पूरा मामला

अपने ही देश में सेना प्रमुख रहते हुए सरकार का तख्ता पलट करने वाले परवेज मुशर्रफ के लिए पाकिस्तान की सीनेट में सोमवार को प्रार्थना करने को लेकर राजनीतिक नेताओं के बीच तीखा मतभेद सामने आया. इस दौरान नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधा.

Advertisement
X
पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ (File Photo)
पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ (File Photo)

जनरल परवेज मुशर्रफ... वो नाम, जिसने भारत के खिलाफ तो कई साजिशें रची ही थीं, मगर खुद के मुल्क पाकिस्तान को भी नहीं छोड़ा. पाकिस्तान में तख्तापलट किया और पाकिस्तानी हुक्मरानों का ताज हिला दिया. अब वो परवेज मुशर्रफ इस दुनिया में नहीं हैं. इस्लामाबाद से करीब 2000 किलोमीटर दूर दुबई में उन्होंने रविवार 5 फरवरी 2023 को अंतिम सांसें लीं. 

Advertisement

अपने ही देश में सेना प्रमुख रहते हुए सरकार का तख्ता पलट करने वाले परवेज मुशर्रफ के लिए पाकिस्तान की संसद में सोमवार को प्रार्थना करने को लेकर राजनीतिक नेताओं के बीच तीखा मतभेद सामने आया. दरअसल, पाकिस्तानी संसद में देश के प्रमुख राजनेता या व्यक्तित्व की मृत्यु होने पर दिवंगत आत्मा के लिए फातेहा (प्रार्थना) करने की परंपरा है. 

लेकिन सोमवार को मुशर्रफ के लिए प्रार्थना करने को लेकर यहां जमकर हंगामा हुआ. जब पाकिस्तान के आखिरी तानाशाह मुशर्रफ की दिवंगत आत्मा के लिए संसद में प्रार्थना का मुद्दा आया तो संसद के सदस्यों ने तानाशाही शासन और संविधान के उल्लंघनकर्ताओं का समर्थन करने जैसे आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया.

न्यूज एजेंसी के मुताबित, दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी के सीनेटर मुश्ताक अहमद ने तुर्की में भूकंप में मारे गए लोगों के लिए संयुक्त रूप से प्रार्थना करने का आह्वान किया था. जिस पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सांसद शहजाद वसीम के नेतृत्व में उनकी पार्टी के सदस्यों ने मुशर्रफ के लिए भी प्रार्थना करने का आह्वान किया. लेकिन इस पर जमात-ए-इस्लामी ने यह कहकर इनकार कर दिया कि वह केवल भूकंप पीड़ितों के लिए प्रार्थना करेंगे.

Advertisement

बस फिर क्या था, सांसदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. जिसमें कुछ सदस्यों ने सांसद मुश्ताक को याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने भी कभी मुशर्रफ का समर्थन किया था. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सांसद मौला बख्श चांदियो ने भी मुशर्रफ के लिए संयुक्त प्रार्थना के खिलाफ अन्य नेताओं का समर्थन किया. हालांकि बाद में, सीनेटर वसीम के नेतृत्व में पीटीआई सांसदों, जिन्हें मुशर्रफ ने राजनीति में ब्रेक दिया था, ने पारंपरिक प्रार्थना की, जबकि अन्य सांसदों ने उनके साथ इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.

बता दें कि मुशर्रफ ने 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया. हालांकि वह 2016 में पाकिस्तान से भाग गए और अपने अंतिम वर्ष संयुक्त अरब अमीरात में रहकर बिताए. 1999 के कारगिल युद्ध के वास्तुकार ने 1999 में बड़े स्तर पर खून-खराबे के साथ सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता पर कब्जा किया था और 2008 तक गद्दी पर जमे रहे. मुशर्रफ पर 2007 में पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या में मिलीभगत का भी आरोप लगा था. 1943 में नई दिल्ली में जन्मे, वह 1947 में पाकिस्तान चले गए और पाकिस्तान पर शासन करने वाले अंतिम सैन्य तानाशाह थे.

Advertisement
Advertisement