पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ हत्या का एक और मामला दर्ज हो गया है. उन पर तथा उनके मंत्रियों और उच्च अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की हत्या करवाई. कल रात एक जिला जज ने इस आशय के आदेश दिए.
नवाज शरीफ के खिलाफ यह दूसरा मुकदमा है. पाकिस्तान अवामी तहरीक (पीएटी) ने जिसके नेता मौलवी ताहिरुल क़ादरी हैं, यह आरोप लगाया था. वे इस सिलसिले में अदालत पहुंचे थे.
30 अगस्त को पुलिस के साथ हुई झड़प में कम से कम 3 लोग मारे गए थे और 500 जख्मी हुए थे. लोगों की भीड़ शरीफ के सरकारी निवास की ओर जा रही थी तो उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जज ने आदेश दिया कि कादरी की याचिका के आधार पर मुकदमा दाखिल किया जाए. उन पर हत्या और आतंकवाद की धाराएं लगाई गई हैं.
लेकिन समीक्षकों का मानना है कि अभी जो हालात बन रहे हैं वे ठीक उसी तरह के हैं जैसा जुल्फिकार अली भुट्टो के जमाने में हुआ था. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री भुट्टो पर हत्या का आरोप लगाकर जनरल जिया ने उन्हें गिरफ्तार करवा लिया था और बाद में सच्ची-झूठी गवाही दिलवाकर उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था.
पाकिस्तानी राजनीति को समझने वालों का कहना है कि इस बार भी फौज ऐसी ही चाल चल रही है. वह देश में अस्थिरता का बहाना लेकर मार्शल लॉ लागू कर सकती है जैसा भुट्टो के समय हुआ था. उसके बाद इन्हीं मामलों के आधार पर नवाज शरीफ को सजा-ए-मौत तक दिलवा सकती है.
जानकारों का मानना है कि पाकिस्तानी फौज सत्ता के बिना बहुत दिनों तक रह नहीं सकती. बताया जाता है कि मौलाना कादिर को फौज का मूक समर्थन मिला हुआ है. उनके और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान के लोग इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर आंदोलन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि आम चुनाव में फर्जी मतदान करवाकर नवाज की पार्टी ने सत्ता हथियाई है.