पाकिस्तान के राजनीतिज्ञों और सियासी विशेषज्ञों ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के विवादास्पद कदम की आलोचना की है. उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट पाकिस्तान सरकार के इस फैसले को खारिज कर देगा. पूर्व प्रधानमंत्री और नव स्थापित अवाम पाकिस्तान पार्टी के प्रमुख शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा कि पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का फैसला अनावश्यक और अनुचित है.
उन्होंने कहा, 'पार्टियों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय, मौजूदा सरकार को देश की समस्याओं के समाधान के लिए अपने विरोधियों के साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए. सरकार वही गलतियां दोहरा रही है जो पीटीआई के संस्थापक (इमरान खान) ने की थीं.' पीटीआई नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला शुरू करने को लेकर अब्बासी ने कहा कि अगर उन्हें निशाना बनाया गया तो दूसरों नेताओं को भविष्य में इसका सामना करना पड़ सकता है.
कानूनी तौर पर PTI पर प्रतिबंध लगाना संभव नहीं
पीटीआई नेता और बैरिस्टर अली जफर ने कहा, 'कानूनी तौर पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है. ऐसा फैसला करने वाले लगता है दूसरी दुनिया में रहते हैं, क्योंकि वे कानूनी और संवैधानिक रूप से ऐसा नहीं कर सकते.' जफर ने कहा कि किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से लगाया जा सकता है. अगर सरकार पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने जा रही है, तो अदालतें इस फैसले की कानूनी वैधता की समीक्षा करेंगी.
अवामी नेशनल पार्टी के नेता मियां इफ्तिखार हुसैन ने भी प्रतिद्वंद्वी पीटीआई के साथ गंभीर मतभेद होने के बावजूद प्रतिबंध का विरोध किया. उन्होंने कहा, 'पीटीआई के साथ हमारे मतभेद हैं लेकिन हम एक राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ हैं. यह समस्याओं का समाधान नहीं है.' जमात-ए-इस्लामी के मुनीम जफर ने भी पीटीआई पर प्रतिबंध का विरोध किया. उन्होंने कहा, 'अतीत में तानाशाहों द्वारा जो किया जाता था वह अब लोकतंत्र में एक राजनीतिक दल द्वारा किया जा रहा है. यह संभव नहीं है और विफल हो जाएगा.'
सरकार अराजकता का रास्ता न अपनाए: कैसर
पीटीआई नेता और पाकिस्तान नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर ने कहा, 'प्रतिद्वंद्वियों ने हमारी पार्टी और कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने के लिए हर हथकंडे का इस्तेमाल किया. यहां तक कि हमें आतंकवादी भी कहा. लेकिन 8 फरवरी के चुनावों के बाद, विरोधियों ने सब कुछ गंवा दिया. हम अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करके अपना संघर्ष जारी रखेंगे. मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह अराजकता का रास्ता न अपनाए और समझदारी से फैसले ले.'
राजनीतिक विशेषज्ञ अहमद मेहबूब ने एक टीवी चैनल से कहा कि पीटीआई पर प्रतिबंध के फैसले से तब तक कुछ नहीं होगा, जब तक इसे सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी नहीं मिल जाती. उन्होंने कहा, 'अगर शीर्ष अदालत से प्रतिबंध को मंजूरी मिल भी जाती है, तो दूसरे पक्ष के नेता कुछ ही दिनों में एक नई पार्टी स्थापित कर लेंगे और उनके समर्थक इसमें शामिल हो जाएंगे.' पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का कारण और समय बताते हुए उन्होंने कहा, 'सरकार पीटीआई के उन सांसदों को संदेश देना चाहती है, जो आरक्षित सीटों पर फैसले के बाद इसमें शामिल हो रहे हैं. तत्काल संदेश यह है कि सांसद पीटीआई में शामिल न हों अन्यथा पार्टी पर प्रतिबंध लगने के बाद वे अयोग्य घोषित हो जाएंगे.'
PTI को किस आधार पर बैन कर सकती है सरकार?
किसी राजनीतिक दल को प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए, वकील एहसान अहमद ने कहा, 'सरकार का अर्थ है प्रधानमंत्री और कैबिनेट. सरकार स्पष्ट कारण बताकर और 15 दिनों के भीतर इसे सुप्रीम कोर्ट में भेजकर औपचारिक रूप से किसी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय ले सकती है. किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने फैसले के पीछे सरकार द्वारा बताए गए कारणों से अगर सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट होता, तो वह इसे मंजूरी दे सकता है. सरकार प्रतिबंध लगाने का मुख्य कारण यह बता सकती है कि पीटीआई विदेशी फंडिंग लेती है और देश के हितों के खिलाफ काम कर रही है. अदालत का निर्णय अंतिम होगा.'
सरकार के फैसले पर सहयोगी दल ने उठाए सवाल
इस बीच मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (MQM-P), जो सरकार का एक प्रमुख गठबंधन भागीदार है, ने कहा है कि पीटीआई पर प्रतिबंध की घोषणा करने से पहले सरकार द्वारा उससे परामर्श नहीं किया गया था. पार्टी ने कहा, 'हमारे पार्टी प्रमुख खालिद मकबूल सिद्दीकी देश से बाहर हैं और उनके वापस आने पर हम इस बारे में फैसला करेंगे.' बता दें कि पाकिस्तान में इस साल 8 फरवरी को आम चुनाव हुए थे. नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन), बिलावल भुट्टो जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान ने चुनाव बाद गठबंधन करके सरकार बनाई थी. शहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे.