पाकिस्तान में आज से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट शुरू होने जा रही है. इस समिट में शामिल होने के लिए मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस्लामाबाद पहुंचेंगे. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ डिनर का आयोजन करेंगे और इसके साथ ही एससीओ समिट की शुरुआत होगी.
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंगलवार को पाकिस्तान पहुंचेंगे. वो इस्लामाबाद में होने जा रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की समिट में शामिल होंगे. अगस्त में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एससीओ समिट में शामिल होने का न्योता दिया था.
करीब नौ साल बाद किसी भी भारतीय विदेश मंत्री का ये पहला पाकिस्तान दौरा होगा. इससे पहले दिसंबर 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान गई थीं. सुषमा स्वराज इस्लामाबाद में अफगानिस्तान पर हुई कॉन्फ्रेंस में शामिल होने गई थीं.
24 घंटे से भी कम वक्त बिताएंगे जयशंकर
15 और 16 अक्टूबर को होने वाली एससीओ समिट में शामिल होने पाकिस्तान गए जयशंकर वहां 24 घंटे से भी कम वक्त बिताएंगे. जयशंकर का ये दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध कुछ खास नहीं है. फरवरी 2019 में पुलवामा हमले और उसके बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद से ही दोनों मुल्कों के संबंधों में तनाव है. अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद संबंध और खराब हो गए.
हाल ही में एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा था, 'किसी भी पड़ोसी की तरह भारत निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा. लेकिन सीमा पार आतंकवाद जारी रहने पर ऐसा नहीं हो सकता.'
क्या द्विपक्षीय बैठक भी होगी?
सालों बाद कोई भारतीय विदेश मंत्री पाकिस्तान जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इससे भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कोई सुधार आएगा. हालांकि, भारत और पाकिस्तान दोनों की तरफ से अब तक कोई द्विपक्षीय बातचीत की बात नहीं रखी गई है. इस दौरे में जयशंकर की मुलाकात पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से होने की भी संभावना नहीं है.
पिछले साल बिलावल भुट्टो आए थे भारत
पिछले साल गोवा में एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी. इस बैठक में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो गोवा आए थे. 12 साल में ये पहली बार था, जब कोई पाकिस्तानी विदेशी मंत्री भारत आया था.
क्या है SCO?
अप्रैल 1996 में एक बैठक हुई. इसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल हुए. इस बैठक का मकसद था आपस में एक-दूसरे के नस्लीय और धार्मिक तनावों को दूर करने के लिए सहयोग करना. तब इसे 'शंघाई फाइव' कहा गया.
हालांकि, सही मायनों में इसका गठन 15 जून 2001 को हुआ. तब चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 'शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन' की स्थापना की. इसके बाद नस्लीय और धार्मिक तनावों को दूर करने के अलावा कारोबार और निवेश बढ़ाना भी मकसद बन गया.
1996 में जब शंघाई फाइव का गठन हुआ, तब इसका मकसद था कि चीन और रूस की सीमाओं पर तनाव कैसे रोका जाए और कैसे उन सीमाओं को सुधारा जाए. ये इसलिए क्योंकि उस समय बने नए देशों में तनाव था. ये मकसद सिर्फ तीन साल में ही हासिल हो गया. इसलिए इसे सबसे प्रभावी संगठन माना जाता है.
कितना ताकतवर है SCO?
शंघाई सहयोग संगठन में 8 सदस्य देश शामिल हैं. इनमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान हैं. इनके अलावा चार पर्यवेक्षक देश- ईरान, अफगानिस्तान, बेलारूस और मंगोलिया हैं.
इस संगठन में यूरेशिया यानी यूरोप और एशिया का 60% से ज्यादा क्षेत्रफल है. दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी इसके सदस्य देशों में रहती है. साथ ही दुनिया की जीडीपी में इसकी एक-चौथाई हिस्सेदारी है.
इतना ही नहीं, इसके सदस्य देशों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य (चीन और रूस) और चार परमाणु शक्तियां (चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान) शामिल हैं.
भारत का क्या रोल है?
2005 में कजाकिस्तान के अस्ताना में हुई समिट में भारत, पाकिस्तान, ईरान और मंगोलिया ने भी हिस्सा लिया. ये पहली बार था जब SCO समिट में भारत शामिल हुआ था.
2017 तक भारत SCO का पर्यवेक्षक देश रहा. 2017 में SCO की 17वीं समिट में संगठन के विस्तार के तहत भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दिया गया.
SCO को इस समय दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन माना जाता है. इस संगठन में चीन और रूस के बाद भारत सबसे बड़ा देश है.