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पंजशीर: अफगानिस्तान के इस प्रांत को छू नहीं सका तालिबान, जंग को तैयार हो रहा उत्तरी गठबंधन!

पंजशीर प्रांत में ही अमरुल्ला सालेह (अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति) मौजूद हैं. यहीं से उन्होंने दावा किया कि वह अशरफ गनी के भागने के बाद अफगान के केयर टेकर प्रेसिडेंट हैं.

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पंजशीर में लहराया उत्तरी गठबंधन का झंडा
पंजशीर में लहराया उत्तरी गठबंधन का झंडा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंजशीर प्रांत अबतक तालिबान के कब्जे से मुक्त
  • पंजशीर प्रांत में उत्तरी गठबंधन का झंडा लहरा रहा है

काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों पर भले कब्जा कर लिया हो लेकिन एक प्रांत अबतक उसकी पहुंच से दूर है और डटकर सामना करने को तैयार भी है. काबुल से सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है पंजशीर प्रांत (Panjshir province). इसका अनुवाद करें तो मतलब होगा 'फारस के पांच शेर'. पंजशीर प्रांत पर अबतक कोई भी कब्जा नहीं कर पाया है और यह लम्बे वक्त से आजाद क्षेत्र बना हुआ है.

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पंजशीर प्रांत का घाटी वाला इलाका देखने में बहुत मनमोहक है. यह अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से एक है, जिसमें 7 जिले हैं, जिनमें 512 गांव मौजूद हैं. 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, पंजशीर की जनसंख्या 173,000 के करीब है. इसकी प्रांतीय राजधानी बाजारक है.

अमरुल्ला सालेह यहीं से बना रहे तालिबान के खिलाफ रणनीति

इसी प्रांत में ही अमरुल्ला सालेह (अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति) मौजूद हैं. यहीं से उन्होंने दावा किया कि वह अशरफ गनी के भागने के बाद अफगान के केयर टेकर प्रेसिडेंट हैं. उन्होंने पहले भी कहा था कि वह तालिबान के आगे झुकेंगे नहीं.

अमरुल्ला सालेह (Amrullah Saleh) की कुछ तस्वीरें भी इन दिनों इंटरनेट पर घूम रही हैं. इसमें वह अहमद मसूद के साथ दिख रहे हैं. वह तालिबान विद्रोही लीडर अहमद शाह मसूद के बेटे हैं. दावा किया जा रहा है कि अफगान फोर्स के सिपाही मसूद के बुलावे पर पंजशीर में जुट रहे हैं. अहमद शाह मसूद को 9/11 हमले के पहले अल कायदा और तालिबान ने साजिश रचकर मार दिया था. 

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यहीं से उत्तरी गठबंधन तैयार किया जा रहा है जो कि एंटी-तालिबान फ्रंट होगा. पंजशीर में उत्तरी गठबंधन का झंडा भी लहराता देखा गया है. उत्तरी गठबंधन एक मिलिट्री फ्रंट है जो कि 1996 में बनाया गया था. तालिबान के खिलाफ लड़ने वाले इस फ्रंट को ईरान, भारत, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान की तरफ से समर्थन भी मिला था. 1996 से 2001 के बीच तालिबान इसी फ्रंट की वजह से पूरे अफगान पर कब्जा नहीं कर पाया था.

हालांकि, पंजशीर के लिए इसबार तालिबान का मुकाबला इतना आसान नहीं होने वाला, क्योंकि आसपास के सभी इलाकों पर तालिबान कब्जा जमा चुका है और पहले से ज्यादा ताकतवर बनकर लौटा है. इतना ही नहीं उसके आतंकियों के पास एक से बढ़कर एक आधुनिक हथियार हैं.

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