Russia Ukraine war : यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार जारी हैं. रूस के टैंक यूक्रेन की सड़कों पर तबाही मचाते नजर आ रहे हैं. रूस की सेना के सामने यूक्रेन कमजोर नजर आ रहा है. लेकिन अमेरिका में बनी एंटी टैंक जेवलिन मिसाइल (anti-tank Javelin missile) इसका अच्छा जवाब साबित हो सकता है.
अमेरिकी पत्रकार फरीद जकारिया ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि यह मिसाइल समीकरण को थोड़ा संतुलित करने में मदद कर सकता है. इस दौरान अमेरिका से मिल रही सैन्य मदद के बारे में बात करते हुए जकारिया ने कहा, इन चीजों में से एक जो प्रभावी हो सकती हैं, वे है जेवलिन मिसाइलें. ये एक सामान्य यूक्रेनी सैनिकों को रूसी टैंकों पर हमला करने में मदद कर सकती हैं. उन्होंने कहा, इस मिसाइल से स्थिति में थोड़ा बदलाव आ सकता है.
जेवलिन मिसाइल यूक्रेनी सेना की मांग रही है. यूक्रेन को 2018 में अमेरिका की ओर से इन मिसाइलों का पहला बैच मिला था. लेकिन दूसरे बैच के लिए यूक्रेन को 2019 से अब तक इंतजार करना पड़ रहा है. अमेरिका ने यूक्रेन को 350 मिलियन डॉलर के हथियारों की मदद का ऐलान किया है. हालांकि. अभी यह देखना बाकी है कि क्या इस मदद में एंटी टैंक जेवलिन मिसाइल शामिल है.
जेवलिन मिसाइल क्यों जरूरी है?
यह दुनिया की सबसे एडवांस पोर्टेबल एंटी टैंक मिसाइलों में से एक है. इसकी रेंज 5 किमी है. जो टैंक और बख्तरबंद वाहनों पर हमले के लिए शक्तिशाली है. इससे आसानी से सैनिक टैंक को निशाना बना सकते हैं. जेवलिन को पूर्वी यूक्रेन के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में रूसी समर्थित अलगाववादी समूहों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए तैनात किया जाना था.
जेवलिन युद्ध के लिए काफी अहम मानी जाती है. इसका इराक, अफगानिस्तान और सीरिया में संघर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसे शहरी युद्ध के लिए भी उपयुक्त माना जाता है. वर्तमान स्थिति में जब रूसी टैंक यूक्रेन की इमारतों से घिरी सड़कों पर नजर आ रहे हैं, तब यह महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
ये देश कर रहे जेवलिन मिसाइल का इस्तेमाल
इस मिसाइल को रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है. यह 1996 से सेवा में है. इस मिसाइल का इस्तेमाल फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, यूएई, ताईवान, ब्रिटेन जैसे 20 देश कर रहे हैं. यह सबसे शक्तिशाली एंटी टैंक मिसाइलों में से एक है, ऐसे में चीन भी इसी से मिलती जुलती खूबियों वाली मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है.
कैसे काम करती है ये मिसाइल?
जेवलिन मिसाइल के शुरुआती वर्जन की रेंज 2.5 किमी थी. इसमें दो मोड होते हैं. पहला डायरेक्ट और दूसरा टॉप अटैक. इस मिसाइल का इस्तेमाल ग्राउंड पर टैंक जैसे टारगेट और हेलिकॉप्टर या कम दूरी पर उड़ने वाले टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है.
टॉप अटैक मोड का इस्तेमाल टैंक, हथियारबंद वाहन को निशाना बनाने में किया जाता है. जबकि डायरेक्ट मोड में मिसाइल इमारत, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली वस्तुओं या बंकरों को निशाना बना सकती है.