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अमेरिका बोला- परमाणु हथियारों को दोगुना करने की योजना बना रहा चीन

इस तरह की बढ़ोतरी के बावजूद चीन परमाणु शक्ति के मामले में अमेरिका से कमतर ही है जिसमें सक्रिय स्थिति में अभी 3,800 मिसाइलें युद्ध करने की स्थिति में हैं जबकि बाकी रिजर्व रखी गई हैं.

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परमाणु हथियारों के भंडार को दोगुना करने में जुटा चीन (फोटो-Getty Iamges)
परमाणु हथियारों के भंडार को दोगुना करने में जुटा चीन (फोटो-Getty Iamges)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीनी मिसाइलों की क्षमता अमेरिका तक पहुंचने की
  • इस पर पेंटागन ने मंगलवार को जारी की रिपोर्ट
  • परमाणु हथियारों को सीमित करने के करार से इनकार

अमेरिक के रक्षा विभाग ने मंगलवार को कहा कि चीन इस दशक में अपने परमाणु हथियारों के भंडार को दोगुना करने की योजना बना रहा है, जिसमें उन बैलिस्टिक मिसाइलों को शामिल किया जाना है जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. पेंटागन ने जारी रिपोर्ट में यह बात कही है.

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हालांकि इस तरह की बढ़ोतरी के बावजूद चीन परमाणु शक्ति के मामले में अमेरिका से कमतर ही है जिसमें सक्रिय स्थिति में अभी 3,800 मिसाइलें युद्ध करने की स्थिति में हैं जबकि बाकी रिजर्व रखी गई हैं. अमेरिका के उलट चीन के पास कोई परमाणु वायु सेना नहीं है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा में प्रक्षेपित की जाने वाली परमाणु बैलेस्टिक मिसाइल विकसित करके इस गैप को पाटा जा सकता है. 

ट्रंप प्रशासन चीन से रणनीतिक परमाणु हथियारों को सीमित करने के लिए त्रिपक्षीय डील पर बातचीत करने को लेकर अमेरिका और रूस के साथ शामिल होने का आग्रह कर रहा है, लेकिन चीन ने मना कर दिया है. 

असल में, चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि चीन के हथियारों का भंडार समझौता में शामिल होने के लिहाज से बहुत छोटा है, और चीन को इस तरह की बातचीत में शामिल करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने मौजूदा अमेरिकी-रूस हथियार संधि से दूर रहने के लिए एक बहाना बनाया है, जिसे न्यू स्टार्ट कहा जाता है.

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बता दें कि अमेरिका और रूस के बीच का हथियारों के भंडार को लेकर समझौते की समय सीमा फरवरी 2021 में समाप्त हो रही है, लेकिन वॉशिंगटन और मास्को की सहमित से आगे बढ़ाया जा सकता है.

पेंटागन ने चीनी सैन्य शक्ति नाम से जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परमाणु हथियारों को विस्तार देने और उनके आधुनिकरण का मकसद वैश्विक मंच पर और मुखर होना है. चीन का मकसद 2049 तक अमेरिका को इस मामले में पछाड़ देने का है. चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख शक्ति के रूप में उभरने की इच्छा रखता है.

 

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