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एक के बदले 93... कौन था वो उमर खालिद खुरासानी, जिसकी मौत का बदला TTP ने पेशावर में लिया

उमर खालिद खुरासानी की मौत अगस्त 2022 में अफगानिस्तान में उस समय हुई थी, जब उसकी कार को निशाना बनाकर धमाका किया गया था. खुरासानी अगस्त 2022 में एक धमाके में मारा गया था. धमाके के समय वह कार में सफर कर रहा था. इस दौरान उसके साथ कार में टीटीपी के दो और कमांडर मौजूद थे. इन सभी की धमाके में मौत हो गई थी. 

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उमर खालिद खुरासनी
उमर खालिद खुरासनी

पाकिस्तान के पेशावर के हाई सिक्योरिटी जोन में नमाजियों से खचाखच भरी मस्जिद में सोमवार को हुए फिदायीन हमले ने सभी को हिला कर रख दिया. इस हमले में अभी तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. टीटीपी ने कहा है कि यह हमला उमर खालिद खुरासानी की मौत का बदला है. ऐसे में सवाल उठता है कि कौन है उमर खालिद खुरासानी जिसकी मौत का बदला लेने के लिए टीटीपी ने लाशों का अंबार लगा दिया.

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उमर खालिद खुरासनी टीटीपी का कमांडर था, जो पिछले साल अगस्त में पाकिस्तानी सेना के हाथों मारा गया. खुरासानी के भाई और टीटीपी के मेंबर मुकर्रम के जरिए ही यह पता चला कि वे खुरासानी की मौत को भुला नहीं पाए हैं और उन्होंने पूरी तैयारी के साथ पेशावर मस्जिद हमले को अंजाम दिया. 

कौन है उमर खालिद खुरासानी?

खुरासानी का जन्म पाकिस्तान की मोहम्मद एजेंसी में हुआ था. उमर खालिद का असली नाम अब्दुल वली मोहम्मद था. उसकी शुरुआती तालीम उसके गांव (साफो) में हुई लेकिन बाद में वह कराची के कई मदरसों में पढ़ा. वह बेहद कम उम्र में आतंक से जुड़ गया था. वह शुरुआत में पाकिस्तान के इस्लामी जिहादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन से जुड़ा था, जो मुख्य रूप से कश्मीर में एक्टिव था, जहां वह कश्मीर की आजादी के जेहाद में शामिल हो गया था. लेकिन बालिग होने पर वह तहरीक-ए-तालिबान में शामिल हो गया.

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वह कश्मीर में भी काफी समय तक एक्टिव था. वह टीटीपी से जुड़ने से पहले पत्रकार और शायर हुआ करता था. हालांकि, इस बात के पुख्त सबूत नहीं है कि वह टीटीपी में कब शामिल हुआ लेकिन अगस्त 2014 में उसने टीटीपी से अलग होकर जमात-उल-अहरार की स्थापना की. यह टीटीपी से जुड़ा हुआ ही एक आतंकी संगठन था. जमात-उल-अहरार आमतौर पर आम नागरिकों, अल्पसंख्यकों और सैन्यकर्मियों को ही निशाना बनाया करता था. 

खुरासानी अफगानिस्तान के नांगरहार और कुनार प्रांतों से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था. जमात-उल-अहरार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का सबसे सक्रिय आतंकी संगठन था, जिसने कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया. इनमें से सबसे भयानक हमला मार्च 2016 में गुलशन-ए-इकबाल एम्युजमेंट पार्क में किया गया था. इसके अलावा लाहौर में ईस्टर के मौके पर एक हमला किया गया, जिसमें 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. खुरासानी की आतंकी गतिविधियों की वजह से  वह अमेरिका की नजर में आया और मार्च 2018 में अमेरिकी विदेश विभाग ने उस पर 30 लाख डॉलर का इनाम रखा. 

जमात-उल-अहरार दरअसल टीटीपी से जुड़ा हुआ जरूर था लेकिन वह अपने तरीके से हमलों को अंजाम देता था. लेकिन बाद में मार्च 2015 में यह संगठन टीटीपी में शामिल हो गया. 

उमर खुरासानी (फाइल फोटो-ANI)

बम विस्फोट में खुरासानी की मौत

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अगस्त 2022 में अफगानिस्तान के पाकटीका इलाके में उमर खालिद खुरासानी (45) की गाड़ी को निशाना बनाकर बम विस्फोट किया गया. इस दौरान खुरासनी के साथ कार में टीटीपी के दो और कमाडर मौजूद थे. इन सभी की धमाके में मौत हो गई थी. हालांकि, वह इससे पहले पाकिस्तानी सेना के कई हमलों से बच गया था. खुरासानी तीन बार ड्रोन हमले में बच गया था. दिसंबर 2021 और फरवरी 2022 में हुए हमलों से वह बाल-बाल बच गया था. 

अमेरिका ने रखा था इनाम

अमेरिका की नजर खुरासानी पर तभी से थी, जब वह  जमात-उल-अहरार से जुड़ा हुआ था और अपने तरीके से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था. वह अफगानिस्तान में बैठकर कश्मीर में आतंक फैलाने में लगा था. कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ाने के लिए वह अपना नेटवर्क लगातार मजबूत कर रहा था. यही वह समय था, जब जमात-उल-अहरार ने पाकिस्तान और कश्मीर में कई हमलों का अंजाम दिया, जिसकी वजह से अमेरिका ने उस पर 30 लाख डॉलर का इनाम रख दिया. खुरासानी अमेरिका के साथ पाकिस्तान सरकार की किसी भी तरह की बातचीत का समर्थक नहीं था. 

क्या है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान?

2007 में कई सारे आतंकी गुट एकसाथ आए और इनसे मिलकर बना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान. टीटीपी को पाकिस्तान तालिबान भी कहते हैं. इसका मकसद पाकिस्तान में इस्लामी शासन लाना है. अगस्त 2008 में पाकिस्तानी सरकार ने टीटीपी को बैन कर दिया था.

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हालांकि, टीटीपी की जड़ें 2002 में ही जमनी शुरू हो गई थीं. अक्टूबर 2001 में जब अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान की सत्ता से तालिबान को बेदखल किया तो उसके आतंकी भागकर पाकिस्तान में बस गए थे. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने इन आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू कर दिया था.

दिसंबर 2007 में बैतुल्लाह महसूद ने टीटीपी का ऐलान किया. 5 अगस्त 2009 को महसूद मारा गया. उसके बाद हकीमउल्लाह महसूद टीटीपी का नेता बना. 1 नवंबर 2013 को उसकी भी मौत हो गई. हकीमउल्लाह की मौत के बाद मुल्ला फजलुल्लाह नया नेता बना. 22 जून 2018 को अमेरिकी सेना के हमले में वो भी मारा गया. अभी नूर वली महसूद टीटीपी का नेता है.

पाकिस्तान तालिबान अफगानिस्तान के तालिबान से अलग है. लेकिन दोनों का मकसद एक ही है और वो ये कि चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंको, कट्टर इस्लामिक कानून लागू कर दो. अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट बताती है कि टीटीपी का मकसद पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ आंतकी अभियान छेड़ना है और तख्तापलट करना है.

टीटीपी के नेता खुलेआम कहते हैं कि उनका मकसद पूरे पाकिस्तान में इस्लामी खिलाफत लाना चाहता है और इसके लिए पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकने की जरूरत होगी.

पेशावर हमले में 93 मौतें हो चुकी हैं. (फोटो- PTI)

अब क्या कर रहा है पाकिस्तान तालिबान?

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2009 से अब तक पाकिस्तान तालिबान कई सारे खतरनाक हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है. इनमें 2008 में इस्लामाबाद में मैरियट होटल और 2009 में आर्मी हेडक्वार्टर पर हमला भी शामिल है. 2012 में टीटीपी ने मलाला युसुफजई पर भी हमला किया था. टीटीपी ने मलाला को गोली मारी थी. टीटीपी ने मलाला युसुफजई को 'वेस्टर्न माइंडेड लड़की' बताया था.

2014 में भी टीटीपी ने पेशावर के एक आर्मी स्कूल में गोलीबारी की थी. इस हमले में कम से कम 150 लोग मारे गए थे, जिनमें 131 छात्र थे. पिछले साल टीटीपी ने पाकिस्तान सरकार के साथ हुए सीजफायर समझौते को तोड़ दिया था. टीटीपी ने अपने लड़ाकों को सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों को मारने का आदेश दिया था. 

शुक्रवार को खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के लक्की मरवात जिले के वरगरा पुलिस स्टेशन पर आतंकी हमला हुआ है. इस हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई. अब तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है लेकिन इसके पीछे टीटीपी का ही हाथ माना जा रहा है.

पेशावर में आत्मघाती ब्लास्ट का Inside Video

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