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'हम तटस्थ नहीं...', US दौरे से पहले PM मोदी ने अमेरिकी अखबार को दिया इंटरव्यू

पीएम मोदी अपने पांच दिवसीय अमेरिका दौरे के लिए मंगलवार को भारत से रवाना हो चुके हैं. इसी बीच एक प्रमुख अमेरिकी अखबार में उनका इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका रिश्तों, चीन, रूस-यूक्रेन युद्ध समेत तमाम चीजों पर बात की है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए हैं. रवानगी से पहले एक अमेरिकी अखबार को इंटरव्यू देते हुए पीएम मोदी ने वैश्विक हालात और खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र किया और भारत की रणनीति पर खुलकर बात की. पीएम मोदी ने अमेरिकी अखबार, 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' से बात करते हुए कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि हम तटस्थ खड़े हैं लेकिन हम तटस्थ नहीं बल्कि शांति के पक्ष में खड़े हैं.

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'रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत तटस्थ नहीं'

नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास में पीएम मोदी का यह इंटरव्यू लगभग एक घंटे तक चला जिसमें उनसे कई मुद्दों पर सवाल किए गए. रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत के तटस्थ रुख पर भी सवाल किया गया जिसे लेकर अमेरिका सहित पश्चिमी देश भारत की आलोचना करते रहे हैं.

इसे लेकर किए गए सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि यह धारणा अमेरिका में सभी लोगों के बीच है. मैं समझता हूं कि भारत के रुख (रूस-यूक्रेन युद्ध पर) को पूरी दुनिया अच्छी तरह जानती और समझती है. दुनिया को पूरा भरोसा है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता शांति है. जहां बात रूस-यूक्रेन संघर्ष की है तो कुछ लोग कहते हैं कि हम तटस्थ हैं.... लेकिन हम तटस्थ नहीं हैं. हम शांति के पक्ष में हैं.'

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उन्होंने आगे कहा, 'सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए. किसी भी मतभेद को कूटनीति और बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए न कि युद्ध से.'

उन्होंने कहा कि चाहे वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों या यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, कई मौकों पर मैंने उनसे बात की है. अभी हाल ही में जापान में आयोजित जी-7 शिखर सम्मलेन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बात की. भारत शांति और स्थिरता लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा.

अमेरिका से रिश्तों पर क्या बोले पीएम?

इंटरव्यू में पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका के रिश्तों को लेकर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत और गहरे हुए हैं क्योंकि भारत भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में वैश्विक मंच पर अपनी सही जगह सुरक्षित करने के लिए आगे बढ़ रहा है. 

9 सालों के कार्यकाल में अपने पहले स्टेट विजीट से पहले पीएम मोदी ने कहा कि अमेरिका और भारत के नेताओं के बीच एक अभूतपूर्व विश्वास है. उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमारी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है.

अमेरिका स्टेट विजीट का  निमंत्रण उन्हीं देशों के राष्ट्राध्यक्षों को देता है जिसके साथ उसके द्विपक्षीय संबंध बेहद अच्छी स्थिति में होते हैं. स्टेट विजीट का अर्थ होता है- किसी राष्ट्राध्यक्ष का मेजबान राष्ट्राध्यक्ष की तरफ से निमंत्रण पर उस देश की यात्रा करना.

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स्टेट विजीट आधिकारिक दौरे से अलग होता है और इस दौरान मेहमान की मेजबानी ज्यादा जोर-शोर से की जाती है. इस स्टेट विजीट के दौरान व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति जो बाइडेन और अमेरिका की फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन पीएम मोदी के लिए एक स्टेट डिनर की मेजबानी करेंगे. ऐसा बहुत कम राष्ट्राध्यक्षों के लिए किया जाता है.

'अब भारत का समय आ गया है'

आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार की अक्सर तारीफ हुई है चाहे वो विदेशी निवेश आकर्षित करने की बात हो, नियमों में ढील देने की बात हो या नौकरशाही को खत्म करने की. सरकार ने शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी निवेश किया है. कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में भारी निवेश कर रही हैं. एप्पल उन कंपनियों में से एक है जो फॉक्सकॉन टेक्नॉलजी ग्रुप के साथ मिलकर दक्षिण भारत में भारी निवेश कर रही है. 

पीएम मोदी ने अपने इंटरव्यू में कहा कि अब भारत का समय आ गया है. उन्होंने कहा, 'मैं अपने देश को दुनिया के सामने वैसे ही पेश करता हूं जैसे मेरा देश है और खुद को भी वैसा ही पेश करता हूं जैसा मैं हूं.'

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका बढ़ रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी भारत का योगदान बढ़ा है. अब भारत का समय आ गया है.'

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वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, 'भारत अब वैश्विक मंच पर एक बड़ी भूमिका का हकदार है. हालांकि, मैं स्पष्ट कर दूं कि हम भारत को किसी देश की जगह लेने के रूप में नहीं देखते हैं. हम मानते हैं कि भारत विश्व में अपनी सही जगह हासिल कर रहा है.'

पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा का फुल कवरेज यहां देखें 

धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोप पर बोले पीएम

भारत की विपक्षी पार्टियां और मानवाधिकार कार्यकर्ता अक्सर पीएम मोदी की भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हैं कि पार्टी धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती है, लोकतंत्र को कमजोर करती हैं और प्रेस पर प्रतिबंध लगाती है. इसे लेकर भी इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी से सवाल किया गया जिसे लेकर उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के लोग शांति और सद्भाव के साथ रहते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांति और एकता का देश है.

उन्होंने कहा, 'हजारों सालों से, भारत वह भूमि रही है जहां सभी धर्मों के लोगों को शांतिपूर्वक रहने की स्वतंत्रता है. आपको भारत में दुनिया के हर धर्म के लोग मिल जाएंगे जो मिलकर रहते हैं.'

चीन के साथ रिश्तों पर क्या बोले पीएम?

चीन के साथ भारत के रिश्तों को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को लिए सीमा पर शांति का होना जरूरी है. उन्होंने कहा, 'चीन के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए, सीमा पर शांति जरूरी है. संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, कानून के शासन का पालन करने और मतभेदों और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में हम यकीन रखते हैं. साथ ही, भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह  से तैयार और प्रतिबद्ध है.'

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अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कायापलट का आह्वान

अपने इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कायापलट का भी आह्वान किया. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और बाकी अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बड़े बदलाव की बात की ताकि उन्हें तेजी से बदलते बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के मुताबिक बनाया जा सके.

उन्होंने कहा, 'प्रमुख संस्थानों में जिन देशों के पास सदस्यता हैं, आप उसे देखें- क्या यह सच में लोकतांत्रिक मूल्यों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है? अफ्रीका जैसी जगह - क्या इसकी कोई आवाज है? भारत की इतनी बड़ी आबादी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा स्थान है, लेकिन क्या इसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में वो जगह मिली है?'

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