प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को तीन दिवसीय दौरे पर श्रीलंका पहुंचे. इस यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और व्यापार सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली श्रीलंका यात्रा है, जब से वामपंथी नेशनल पीपल्स पावर (NPP) गठबंधन के नेतृत्व में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके सत्ता में आए हैं.
पीएम मोदी ने आखिरी बार 2019 में श्रीलंका की यात्रा की थी और 2015 के बाद से यह द्वीप राष्ट्र की उनकी चौथी यात्रा होगी. विशेष रूप से, प्रधानमंत्री पिछले सितंबर में कार्यभार संभालने के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका द्वारा मेजबानी करने वाले पहले विदेशी नेता होंगे.
बिम्सटेक सम्मेलन के बाद श्रीलंका दौरा
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा थाईलैंड में हुए बिम्सटेक (BIMSTEC) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद हो रहा है. यह श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन के बाद किसी विदेशी नेता की पहली यात्रा भी है. दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति दिसानायके ने अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत का दौरा किया था, जहां दोनों देशों ने साझा बयान जारी कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी.
इस दौरे से पहले, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके दोनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में भारत-श्रीलंका संबंधों को और मजबूत करने और नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई.
आठ समझौतों पर हस्ताक्षर संभव
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आठ समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. भारतीय अधिकारियों के अनुसार, ये समझौते डिजिटलाइजेशन, स्वास्थ्य, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देंगे. विशेष रूप से श्रीलंका को सस्ती ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक नई व्यवस्था पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.
प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी श्रीलंका पहुंचे हैं.
स्वतंत्रता चौक पर गार्ड ऑफ ऑनर
शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी कोलंबो के स्वतंत्रता चौक (Independence Square) पर गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करेंगे. इसके बाद राष्ट्रपति दिसानायके के साथ औपचारिक वार्ता राष्ट्रपति सचिवालय में होगी. इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि भारत-श्रीलंका संबंध अब तक के सबसे मजबूत स्तर पर हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दिसंबर 2024 में जारी किए गए व्यापक संयुक्त बयान को और आगे ले जाएगी और द्विपक्षीय सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी.
झा ने संकेत दिया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौता (Defence Cooperation Pact) भी हो सकता है. इस समझौते में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं को औपचारिक रूप दिया जाएगा.
सामुद्रिक सुरक्षा होगी मुख्य प्राथमिकता
भारतीय उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि समुद्री सुरक्षा भारत-श्रीलंका रक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहेगा. उन्होंने बताया कि समुद्री सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और यह अच्छी तरह से स्वीकार किया गया है कि हम एक ही क्षेत्र में हैं और हमारी सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है. इसी आधार पर हम अपने सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रपति दिसानायके की भारत यात्रा के दौरान जो समझौते हुए थे, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा उन्हें आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों में नए पहलू जोड़ने का काम करेगी.
भारत और श्रीलंका सबसे करीबी पड़ोसी हैं, खासकर समुद्री पड़ोसी. हमारा संबंध ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत गहरा है. हमारे बीच लोगों के बीच आपसी संबंध भी बहुत मजबूत हैं. उन्होंने आगे कहा, "दोनों देशों के बीच इस बात की समझ बनी हुई है कि हमारा भविष्य साझा है."