केंद्र की मोदी सरकार ने देश में हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए मार्च 2019 का लक्ष्य रखा है. बिजली उत्पादन और वितरण के क्षेत्र में हालांकि मोदी सरकार की कवायद यहीं पूरी नहीं होती. इस लक्ष्य को पाने के साथ-साथ अब मोदी सरकार पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी 2022 तक प्रत्येक घर को बिजली पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है.
मोदी सरकार ने अपनी ‘पड़ोसी पहले’ (नेबरहुड फर्स्ट) की नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा कारोबार को केंद्र में रखने की पहल करते हुए बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों के पूरा करने की दिशा में कदम उठाया है.
इस नीति के तहत दोनों देश मौजूदा समय में 660 मेगावाट बिजली का कारोबार कर रहे हैं. 2017 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली देने का प्रस्ताव दिया था.
मोदी सरकार की पड़ोसी देशों को रौशन कर द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की इस कवायद में सरकारी कंपनियों के अलावा निजी क्षेत्र की कंपनियां भी काम कर रही हैं. अडानी पावर ने भी झारखंड स्थित अपने कोयला आधारित संयंत्र से बांग्लादेश को बिजली सप्लाई करने का प्रस्ताव दिया है.
वहीं गुजरात और राजस्थान में सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी में तैयार हो रहे सोलर पार्कों से भी बांग्लादेश को लगभग 2000 मेगावाट बिजली सप्लाई करने की योजना पर काम किया जा रहा है.
गौरतलब है कि बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने 2022 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए बीते कुछ वर्षों से बांग्लादेश ने ऊर्जा पैदा करने की कई कोशिश की लेकिन ज्यादातर प्रयासों में उसे उम्मीद मुताबिक सफलता हाथ नहीं लगी.
बांग्लादेश में सत्तारूढ़ अवामी लीग ने 2014 के आम चुनावों में अपने मैनिफेस्टो के जरिए वादा किया था कि वह 2022 तक पूरे देश में एक-एक घर तक बिजली पहुंचाने का काम करेंगे. हालांकि सरकार बनने के बाद से लेकर अभी तक इस प्रोजेक्ट पर लगे बांग्लादेश के पॉवर मिनिस्टर दावा करते हैं कि वह इस लक्ष्य को साल के अंत में होने वाले चुनावों से पहले पूरा कर लेंगे.
गौरतलब है कि विश्व बैंक परियोजना के तहत बांग्लादेश में चल रहे इस प्रोजेक्ट में तेजी भारत सरकार द्वारा नेबरहुड पॉलिसी के तहत पड़ोसी देशों को रौशन करने की पहल के बाद देखा गई है. भारत के इस पहल के चलते ही बांग्लादेश सरकार को उम्मीद है कि वह अपने लक्ष्य भारत के भरोसे आधे समय में ही पूरा कर लेगा.
बांग्लादेश सरकार के सामने अपने लक्ष्य को पूरा करने में सबसे बड़ी दिक्कत वहां पैदा हो रही बिजली की ऊंची कीमत की है. वहीं पिछले कुछ वर्षों से भारत में उत्पादित बिजली की कीमत लगातार कम हो रही है. इसके चलते अब बांग्लादेश सरकार को मोदी सरकार द्वारा ऊर्जा कारोबार के जरिए द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की कवायद रास आ रही है.
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का दावा है कि बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ ऊर्जा कारोबार के मजबूत होते रिश्ते के आधार पर दावा करना शुरू कर दिया है कि वह 2022 तक अपने लक्ष्य को पूरा कर लेगी. बांग्लादेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में शेख हसीना के नेतृत्व में 2009 में अवामी लीग की सरकार बनी थी. इस वक्त तक बांग्लादेश में महज 47 फीसदी उपभोक्ताओं को बिजली मिल रही थी. लेकिन शेक हसीना सरकार के कार्यकाल में मौजूदा समय में लगभग 90 फीसदी जनसंख्या तक बिजली पहुंचाने का कम पूरा कर लिया गया है.
गौरतलब है कि मोदी सरकार ने भारत में मार्च 2019 तक देश में हर घर तक बिजली सप्लाई का लक्ष्य रखा है, आगामी लोकसभा चुनावों के चलते उसकी कोशिश इस वादे को पूरा कर जनता के सामने जाने की है. अब बांग्लादेश के साथ ऊर्जा कारोबार को मजबूत कर मोदी सरकार मार्च 2019 तक लक्ष्य प्राप्त करने की सफलता को चार चांद लगाने की कवायद में है.