काबुल हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस से आतंकियों को चेताते हुए कहा है कि उन्हें इन मौतों की कीमत चुकानी होगी. उन्होंने कहा कि हम ये भूलेंगे नहीं, तुम्हें माफ नहीं किया जाएगा. हम चुन चुन कर शिकार करेंगे. हम अफगानिस्तान में रह रहे अपने अमेरिकी नागरिकों को बचाएंगे, साथ ही अपने सहयोगियों को भी निकालेंगे. बता दें कि इस हमले में 13 US कमांडो समेत अबतक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि हमारा मिशन जारी रहेगा. जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त अमेरिकी फौज को फिर से अफगानिस्तान भेजेंगे. इससे पहले व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति जो बाइडेन और इजराइल के नए प्रधानमंत्री के बीच होने वाली पहली बैठक का कार्यक्रम टाल दिया और अफगान शरणार्थियों के विषय पर गवर्नरों के साथ होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया. वहीं हमले को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि हमलावरों को माफ नहीं करेंगे.
'अब तुम्हारा शिकार करेंगे'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'जिन लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया है, वह यह जान लें, हमलोग इसे माफ नहीं करने वाले हैं. ना ही इसे भूलने वाले हैं. हमलोग अब तुम्हारा शिकार करेंगे. तुम्हें इस हमले की कीमत चुकानी होगी.'
उन्होंने आगे कहा, 'अमेरिका उस ISIS नेता को अच्छे से जानता है जिसने यह हमला करवाया है. हमलोग रास्ता निकालेंगे और बिना बड़े सैन्य ऑपरेशन के भी उन्हें ढूंढ़ लेंगे, वो कहीं भी रहें.
उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिका किसी भी हालत में इस महीने के अंत तक अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को निकाल लेगा. बाइडेन ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हमें इस मिशन को हर हाल में पूरा करना होगा और हम ऐसा करेंगे. मैंने उनसे ऐसा करने का ही आदेश दिया है. हमलोग आतंकियों से डरने वाले नहीं है. हम उन्हें अपना मिशन किसी भी हाल में रोकने नहीं देंगे. हमलोग अपने सैनिकों और कर्मचारियों की निकासी जारी रखेंगे.
उन्होंने आगे कहा, 'हमने आज जिन लोगों को खोया है उन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपनी जान दी है. सुरक्षा की सेवा, दूसरों की सेवा और अमेरिका की सेव में जान दी है. मेरा ऐसा कभी भी मानना नहीं रहा है कि अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार स्थापित कराने के लिए हमलोग अपने सैनिकों की कुर्बानी देते रहें. एक ऐसा देश जो अपने इतिहास में एक बार भी संयुक्त देश बन कर रह पाया हो. यही समय था 20 साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने का.
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अमेरिका के सामने क्या है संकट?
अमेरिका के सामने एक संकट ये भी है कि अभी भी बड़ी संख्या में अफगानिस्तान से लोगों का रेस्क्यू होना बाकी है, इनमें अमेरिकी नागरिक, नाटो देशों के नागरिक, अफगानी नागरिक (जिन्होंने युद्ध में नाटो देशों की मदद की) आदि लोग शामिल हैं. साथ ही जी-7 ग्रुप समेत अन्य देशों, संगठनों ने 31 अगस्त के बाद भी काबुल में सैन्य मौजूदगी की वकालत की है.
ऐसे में अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह हालात को देखते हुए सहयोगियों की बात मानकर लंबे समय तक काबुल में डटा रहेगा या अपनी तय डेडलाइन पर ही अफगानिस्तान को छोड़ देगा. क्योंकि तालिबान ने भी ये कहा है कि 31 अगस्त के बाद अगर अमेरिकी सैनिक यहां रुकते हैं, तो अच्छा नतीजा नहीं होगा.
पहले बाइडेन ने क्या बोला था?
अभी दो दिन पहले भी बाइडेन ने 31 अगस्त तक अपनी सेना को हटाने की बात कही थी. लेकिन इस बार उन्होंने ये भी जोड़ा है कि ज़रूरत पड़ी तो हम 31 अगस्त के बाद भी अपने सैनिकों को काबुल में रख सकते हैं. जो बाइडेन का ये बयान तालिबान की उस चुनौती पर आया था, जिसमें तालिबान ने साफ किया था कि 31 अगस्त तक अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान छोड़ना ही होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बीते दिन जी-7 की बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने अमेरिका के इस प्लान को सामना रखा. जो बाइडेन ने कहा है कि हम जितनी जल्दी अपने मिशन को पूरा करेंगे, उतना हमारे सैनिकों के लिए अच्छा होगा. जो बाइडेन ने साफ कहा कि उन्होंने विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे 31 अगस्त के बाद भी काबुल में रुकने का प्लान तैयार रखें, अगर इसकी ज़रूरत पड़ती है तो इसे लागू किया जाएगा.