इजरायल और हमास के बीच जंग शुरू होने के बाद से रूस लगातार इजरायल की आलोचना करता आया है. इतना ही नहीं रूस हमास लीडर्स की मेजबानी भी कर चुका है. रूस की इस नीति से इजरायल काफी नाराज चल रहा है. इन घटनाक्रमों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की. नेतन्याहू ने गाजा से लेकर ईरान तक कई मुद्दों पर पुतिन से 50 मिनट तक चर्चा की.
फोन पर चर्चा के दौरान नेतन्याहू ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) और दूसरे मंचों पर रूसी प्रतिनिधि लगातार इजरायल के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. रूस के इस रुख पर इजरायल ने असंतोष जाहिर किया. उन्होंने ईरान और रूस के बढ़ते सहयोग पर भी चिंता जाहिर की. नेतन्याहू ने कहा कि जिस भी देश को इजरायल जैसे हमले का सामना करना पड़ा है, उस देश ने हमेशा कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इजरायल भी यही कर रहा है.
रूस से की दबाव बनाने की अपील
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के दौरान कुछ सकारात्मक चर्चा भी हुई. नेतन्याहू ने रूसी नागरिकता वाले एक इजरायली नागरिक को रिहा करने के रूसी प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि इजरायल सभी बंधकों को मुक्त करने के लिए राजनयिक और सैन्य सभी तरीकों का इस्तेमाल करता रहेगा. नेतन्याहू ने पुतिन से अपील की कि वह रेडक्रॉस पर दबाव डालें ताकि हमास के कब्जे में बंद इजरायली बंधकों तक दवाएं पहुंचाई जा सकें.
जब रूस पहुंचा था प्रतिनिधिमंडल
बता दें कि इजरायल से जंग के बीच हमास का प्रतिनिधिमंडल 26 अक्टूबर को रूस पहुंचा था. इस दौरान ईरान के मंत्री भी प्रतिनिधिमंडल के साथ थे. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत मिखाइल बोगदानोव और विदेश मामलों के उपमंत्री इस मीटिंग में मौजूद रहे थे. इस मीटिंग का इजरायल ने विरोध किया था.
रूस ने सफाई में कही थी ये बात
हालांकि रूस ने अपना बचाव करते हुए तब कहा था कि इजरायल-हमास जंग में सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा था कि प्रतिनिधिमंडल ने रूस के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी, लेकिन क्रेमलिन के साथ उनका कोई संपर्क नहीं है.