पिछले दो महीने में भारत का जैसे जैकपॉट लग गया है. फरवरी में जम्मू-कश्मीर में करीब 3,000 अरब का 59 लाख टन लिथियम का भंडार मिला और फिर कुछ दिनों पहले ही आंध्र प्रदेश से रेयर अर्थ एलिमेंट्स के भंडार मिलने की खबर आई है. भारतीय मूल के जाने-माने अमेरिकी प्रोफेसर और डेलावेयर यूनिवर्सिटी में इस्लामिक स्टडीज के फाउंडिंग डायरेक्टर प्रो. मुक्तदर खान ने इन नए भंडारों की खोज को 'भारत पर बरसती खुदा की नेमत' कहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान को ईशनिंदा कानून को लेकर आड़े हाथों लिया है.
उन्होंने तंज के अंदाज में कहा है कि जहां एक तरफ भारत रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ईशनिंदा करने वालों को खोज कर उन्हें फांसी दे रहा है.
पाकिस्तान में हाल ही ईशनिंदा के मामले में एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई गई है. व्यक्ति पर व्हाट्सएप के जरिए ईशनिंदा का आरोप था. पाकिस्तान के एक जाने-माने शिक्षक जुनैद हफीज को ईशनिंदा के मामले में कई सालों से जेल में रखा गया है. उन्हें भी पैगंबर मोहम्मद के अपमान के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है.
भारत पर बरस रहीं खुदा की नेमतें
प्रो. खान ने इस संदर्भ में कहा कि पाकिस्तान लोगों को ईशनिंदा के लिए सजा सुनाने में लगा है और दूसरी तरफ भारत लगातार प्रगति कर रहा है और उस पर खुदा भी मेहरबान है.
उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकार आलिया शाह को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'फिलहाल भारत पर खुदा की नेमतें बरस रही हैं. कश्मीर में 59 लाख टन लीथियम के भंडार मिले हैं. लिथियम बेहद जरूरी है. सभी बैटरी लिथियम से बने होते हैं. भारत अब तक इसे पूरी तरह से विदेशों से मंगाता था लेकिन अब ऐसा करने की जरूरत नहीं है.'
उन्होंने आगे कहा, 'लिथियम के भंडार भारत में चीन से भी ज्यादा हो गए हैं. अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स मिले हैं आंध्र प्रदेश में. ये एलिमेंट्स उच्च किस्म के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण तत्व हैं. आईफोन, सैटेलाइट, उच्च गुणवत्ता वाले महंगे ड्रोन, इन उपकरणों में रेयर अर्थ एलिमेंट का इस्तेमाल होता है.'
केवल आपके देश में इस्लाम नहीं- पाकिस्तान पर बरसे प्रोफेसर
प्रो. खान ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून को इस्लाम विरोधी करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान के कुछ लोगों के लिए यह कानून इस्लामिक देश होने का लिटमस टेस्ट बन गया है.
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इस्लाम विरोधी तबका, जो इस्लामी हुकूमत, इस्लामी निजाम लाना चाहता है, वो लोकतंत्र चाहने वालों से इतनी नफरत करता है कि इस मुद्दे को उन्होंने लिटमस टेस्ट बना लिया है कि पाकिस्तान इस्लामिक देश है या नहीं है. उनके दिमाग में यह बात बैठी है कि जब तक ईशनिंदा का कानून रहेगा, पाकिस्तान इस्लामिक देश रहेगा.'
उन्होंने आगे कहा, 'पाकिस्तान के धार्मिक लोगों को लगता है कि अगर हम यह कानून बदल दें तो हमारा देश इस्लामिक देश नहीं रहेगा. लेकिन इस कानून का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है. दूसरे देशों में ऐसा नहीं होता...सिर्फ आप ही के देश में ऐसा होता है. इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ आप ही के पास इस्लाम है, बाकी दूसरों के पास नहीं है. यह कहना कि अगर कोई आदमी माफी भी मांग ले, फिर भी उसे ईशनिंदा के लिए सजा दी जाएगी, इस्लाम की बहुत गलत तस्वीर पेश करता है.'
मुक्तदर खान ने बताया कि पाकिस्तान ईशनिंदा के कानून को लेकर इतना सख्त है कि उसके सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ भी इसके नियमों में ढील देने के सवाल पर डर गए थे. खान ने बताया कि इस कानून को लेकर बातचीत में मुशर्रफ ने कहा था, 'पाकिस्तान में दो चीजें ऐसी हैं, जिन्हें मैं भी हाथ नहीं लगा सकता. अगर मैं इनसे छेड़छाड़ करता हूं तो मैं खुद ही मर जाऊंगा. एक तो ईशनिंदा कानून और दूसरा कश्मीर का मसला. बाकी चीजों में सुधार के लिए आप हमसे कह सकते हैं लेकिन इन दो चीजों पर नहीं.'
'इस्लाम मे ईशनिंदा का कॉन्सेप्ट नहीं'
प्रोफेसर खान ने कहा कि इस्लाम में ईशनिंदा का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है. उन्होंने कहा, 'इसमें इतनी सख्ती बरतते हैं कि अगर आदमी माफी भी मांग ले तो भी उसे मौत की सजा दी जाती है. इस गुनाह के लिए मौत की सजा है ही नहीं इस्लाम में. सजा-ए-मौत जो देते हैं वो कहते हैं कि अगर आप इस तरह की हरकत करें तो आप गैर-मुस्लिम हो जाते हैं और गैर-मुस्लिम होने की सजा मौत है. कुरान में इसका कोई सबूत नहीं है.
उन्होंने आगे कहा, 'कुरान में एक-दो जगह देखने को मिलता है कि जो लोग अल्लाह के खिलाफ हैं या उनके खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें अल्लाह ने कहा कि मैं इनको कयामत के दिए दोजख में डालूंगा. भगवान ने इंसानों से कुछ नहीं कहा कि वो ऐसा करने वालों को सजा दें.'
पहले भी पाकिस्तान की आलोचना करते रहे हैं मुक्तदर खान
प्रो. खान ने पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर कुछ समय पहले कहा था कि छह संकट पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े कर सकते हैं. उन्होंने इसके लिए जो संकट गिनाए थे, उनमें राजनीतिक संकट, आर्थिक संकट, सुरक्षा का संकट, सिस्टम का संकट, पहचान का संकट और पर्यावरण संकट शामिल थे.
उन्होंने कहा था कि फिलहाल पाकिस्तान चारों तरफ से मुश्किलों से घिरा हुआ है और भारत चाहे तो उस पर चढ़ाई कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को अपने हिस्से में मिला सकता है.