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रिटायरमेंट के बाद दुनिया घूमने निकले नौशाद, देसी खाना नहीं मिला तो हुई निराशा, फिर खोल दिया उज्बेकिस्तान का इकलौता भारतीय रेस्तरां 'द इंडियन किचन'

मोहम्मद नौशाद बताते हैं कि समरकंद में 3000 से अधिक भारतीय छात्र हैं और वे मुझे अक्सर बताते हैं कि वे भारतीय भोजन को मिस करते थे. शाही पनीर, नान और रोटियां यहां दुर्लभ हुआ करती थीं. मुझे उम्मीद थी कि भारतीयों को यह रेस्तरां पसंद आएगा, लेकिन उज्बेकी लोगों से मुझे जो प्रतिक्रिया मिली है वह अभूतपूर्व है

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समरकंद स्थित 'द इंडियन किचन' उज्बेकिस्तान में एकमात्र भारतीय रेस्टोरेंट है. अपने स्टाफ के साथ मोहम्मद नौशाद.
समरकंद स्थित 'द इंडियन किचन' उज्बेकिस्तान में एकमात्र भारतीय रेस्टोरेंट है. अपने स्टाफ के साथ मोहम्मद नौशाद.

बेंगलुरु के मोहम्मद नौशाद स्टील प्लांट में नौकरी करते थे. उन्होंने रिटायरमेंट के बाद दुनिया की यात्रा करने की योजना बनाई. वह एक साल पहले एक पर्यटक के रूप में समरकंद पहुंचे थे. वह एक सुबह मसाला चाय और परांठे की तलाश में अपने होटल से बाहर निकले और समरकंद में बसने का उनका मन कर गया. नौशाद उज्बेकिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर में एकमात्र इंडियन रेस्टोरेंट चलाते हैं.

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मोहम्मद नौशाद ने अपने रेस्टोरेंट का नाम 'द इंडियन किचन' रखा है. यह जगह भारतीय छात्रों के लिए किसी राहत से कम नहीं, जो यहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं और भारतीय खाने को मिस करते हैं. यहां के स्थानीय लोग नौशाद के रेस्टोरेंट में लिप डोसा से लेकर चिकन बिरयानी तक के व्यापक मेनू को काफी पसंद करते हैं.

समरकंद में नहीं मिला भारतीय नाश्ता तो रेस्टोरेंट खोलने का बनाया प्लान

नौशाद बताते हैं, 'नौकरी से रिटायरमेंट के बाद काम करने की मेरी कोई योजना नहीं थी और किसी रेस्तरां में काम करने का तो दूर, रेस्तरां चलाने का भी कोई अनुभव नहीं था. जब मैं एक पर्यटक के रूप में यहां आया, तो मैं मसाला चाय और परांठे की तलाश में एक सुबह होटल रूम से बाहर निकला. मैंने कई देशों की यात्रा की है और हमेशा कोई न कोई ऐसी जगह ढूंढी है जहां भारतीय भोजन उपलब्ध हो. मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि उज्बेकिस्तान में एक भी ऐसा रेस्टोरेंट नहीं है, जो भारतीय भोजन परोसता हो.'

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उन्होंने कहा, 'एक सप्ताह रहने के बाद यहां की जीवंत संस्कृति और लोगों की सादगी ने मुझे इस जगह को आजमाने के लिए प्रेरित किया और अब समरकंद मेरा स्थायी घर है.' मोहम्मद नौशाद के अनुसार, उनके रेस्तरां में प्रति दिन लगभग 350-400 कस्टमर आते हैं. शादियों और अन्य आयोजनों के लिए ऑर्डर मिलते हैं. यहां विकल्प के रूप में भारतीय व्यंजन रखना हिट है. उनके दिन की शुरुआत किराने का सामान खरीदने के लिए अपने कर्मचारियों के साथ 'बाजार' जाने से होती है.

रेस्टोरेंटी की खास रेसिपी के पीछे मद्रास के शेफ अशोक कालिदास का हाथ

मोहम्मद नौशाद बताते हैं कि समरकंद में 3000 से अधिक भारतीय छात्र हैं और वे मुझे अक्सर बताते हैं कि वे भारतीय भोजन को मिस करते थे. शाही पनीर, नान और रोटियां यहां दुर्लभ हुआ करती थीं. मुझे उम्मीद थी कि भारतीयों को यह रेस्तरां पसंद आएगा, लेकिन उज्बेकी लोगों से मुझे जो प्रतिक्रिया मिली है वह अभूतपूर्व है. रेस्तरां में उपलब्ध स्वादिष्ट व्यंजनों के पीछे मद्रास के शेफ अशोक कालिदास का हाथ है. वह पहले उज्बेकिस्तान के ताशकंद में रहते थे और अब समरकंद में बस गए हैं. 

शेफ अशोक कालिदास ने कहा, 'हम प्रत्येक ग्राहक से पूछते हैं कि वे हमसे किस प्रकार के मसालों का उपयोग चाहते हैं. क्या वे कम मसालेदार या तीखा खाना चाहते हैं? क्योंकि उज्बेकी भोजन बहुत अलग है. लोकप्रिय भारतीय व्यंजनों को उनके स्वाद के अनुरूप बनाने का प्रयास ही यहां की स्थानीय भीड़ को आकर्षित करता है. भारतीय छात्र यहां आते हैं, क्योंकि उन्हें अपने घर जैसा खाना मिलता है. हमारे रेस्टोरेंट में खाना ज्यादा महंगा नहीं होता है. रेस्तरां में सबसे लोकप्रिय व्यंजन 'मसाला डोसा' और 'चिकन बिरयानी' हैं जो उज्बेक 'पिलाफ' से बहुत अलग हैं.'

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नौशाद की बुखारा और खिवा में भी 'द इंडियन किचन' खोलने की है प्लानिंग

'द इंडियन किचन' रेस्तरां में पसंदीदा मेनू के बारे में पूछे जाने पर उज्बेक महिला जरीना ने कहा, 'मुझे मसाला चाय पसंद है' अभी रेस्तरां में सिर्फ भोजन परोसा जाता है, लेकिन नौशाद की प्लानिंग इसे एक्सपैंड करने की है. उन्होंने कहा, 'हम भारतीय छात्रों के लिए टिफिन सर्विस शुरू करने के बारे में भी सोच रहे हैं. इसके अलावा, हमें बहुत सारे पर्यटक भी मिलते हैं. इसलिए मैं बुखारा और खिवा में भी इसी तरह के सेटअप खोलने पर विचार कर रहा हूं, जो उज्बेकिस्तान में लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं, लेकिन वहां कोई भारतीय रेस्तरां नहीं है.'

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