यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले. गुरुवार को हुई इस मुलाकात की चर्चा पाकिस्तान में खूब हो रही है. साथ ही चर्चा उस टेबल की भी हो रही है जो मुलाकात के समय इमरान और पुतिन के बीच रखी गई थी. टेबल की छोटी साइज को लेकर लोग कह रहे हैं कि ये पाकिस्तान-रूस के मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है.
हाल ही में रूस में जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आए थे तब भी टेबल की लंबाई को लेकर खूब चर्चा हुई थी. तब पुतिन जब मैक्रों से मिले तो उनके बीच एक बड़ी सी टेबल रखी गई थी. टेबल की असामान्य लंबाई ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था और सोशल मीडिया पर वो तस्वीर काफी वायरल हुई थी. लोगों ने उस टेबल की लंबाई को दोनों देशों के बीच की बढ़ती दूरी से जोड़कर देखा था.
Putin’s massive table: powerplay or paranoia? https://t.co/xICXCleqTi
— The Guardian (@guardian) February 8, 2022
अब जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से पुतिन मिले हैं तो एक बार फिर से टेबल की लंबाई चर्चा में आ गई है. सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि छोटी टेबल ये बताती है कि रूस पाकिस्तान के करीब आ रहा है. ट्विटर पर पुतिन और इमरान की मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए पाकिस्तान के एक यूजर ने लिखा, 'पाकिस्तान को रूस कितना महत्व देता है, ये साबित हो गया है.'
वहीं, भारतीय पत्रकार युसूफ उंझावाला ने भी टेबल की साइज को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने इमरान खान और व्लादिमीर पुतिन के मुलाकात का वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा, 'हाल ही में मैक्रों जैसे नेता से मुलाकात के दौरान पुतिन ने जो टेबल का उपयोग किया था, अब उसके आकार में बदलाव कर दिया है.'
शक्ति स्वामी नाम की एक यूजर ने लिखा, 'इसका मतलब क्या हुआ? क्या दोनों का सहयोग बढ़ रहा है?'
वेदांत नाम के एक यूजर ने पुतिन की हाल में विश्व नेताओं के साथ मुलाकात के समय की तस्वीर और इमरान खान से हालिया मुलाकात की तस्वीर शेयर की है. अन्य नेताओं से मिलते वक्त पुतिन और उनके बीच में सामान्य से बड़ी आकार की टेबल है जबकि इमरान खान से मिलते वक्त बीच में काफी छोटी टेबल है. तस्वीर शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, 'पुतिन की तरफ से स्पष्ट संदेश.'
इमरान खान-पुतिन की मुलाकात की इतनी चर्चा क्यों
प्रधानमंत्री इमरान खान की रूस की ये पहली आधिकारिक यात्रा थी. पिछले दो दशक से अधिक समय से कोई पाकिस्तानी नेता रूस के दौरे पर नहीं गया था. पाकिस्तान अब तक अमेरिकी पाले में रहा है लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के आने के बाद से स्थितियां बदली हैं और पाकिस्तान अमेरिका के रिश्तों में दूरी आई है. विश्लेषकों का कहना है कि इमरान खान की रूस यात्रा बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत भी है. शीतयुद्ध के समय, पाकिस्तान रूस के विरोधी गुट में शामिल था और रूस भारत के ज्यादा करीब था. लेकिन अब एक तरफ रूस और पाकिस्तान की दूरियां कम हुई हैं तो दूसरी तरफ भारत और अमेरिका भी करीब आए हैं. भारत की आपत्ति के बावजूद रूस और पाकिस्तान पिछले कुछ सालों से संयुक्त सैन्य अभ्यास भी कर रहे हैं.
रूस और पाकिस्तान की करीबी बढ़ाएगी भारत की टेंशन?
रूस और पाकिस्तान की मजबूत होती आर्थिक साझेदारी भी भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की रूस यात्रा में रूसी सहयोग से गैस-पाइपलाइन का निर्माण बातचीत का एक अहम मुद्दा था. रूस प्राकृतिक गैस का प्रमुख उत्पादनकर्ता है. यूक्रेन पर हमले के कारण जर्मनी ने रूस की नॉर्ड2 गैस पाइपलाइन परियोजना पर रोक लगा दी है. इस बीच पाकिस्तान रूस का नया गैस खरीददार बनने वाला है.
पाकिस्तान में रूस की मदद से 1100 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण होना है. ये पाइपलाइन कासिम बंदरगाह से पंजाब के कसूर तक बिछाई जाएगी.