scorecardresearch
 

Russia-Ukraine Conflict: यूक्रेन-रूस संकट में कौन देश किसके साथ खड़ा है?

Russia-Ukraine Conflict: रूस ने यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता देकर माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है. अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश कह रहे हैं कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है. ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि 24 घंटे के अंदर यूक्रेन पर रूस का 'पूरा हमला' शुरू हो सकता है. ऐसे में विश्व के सभी बड़े देशों पर दबाव है कि वो एक पक्ष का चुनाव करें.

Advertisement
X
सैन्य-अभ्यास में भाग लेते यूक्रेन के सैनिक (Photo- Reuters)
सैन्य-अभ्यास में भाग लेते यूक्रेन के सैनिक (Photo- Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूक्रेन-रूस तनाव गरमाया
  • अमेरिका सहित कई देशों ने रूस पर लगाया प्रतिबंध
  • भारत का रूख संतुलित

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दे दी है जिसके बाद से यूक्रेन-रूस तनाव गहरा गया है. रूस ने यूक्रेन की सीमा पर डेढ़ लाख से अधिक सैनिकों की तैनाती कर रखी है जिसे लेकर पश्चिमी देशों का कहना है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि 24 घंटे के अंदर यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू हो सकता है. 

Advertisement

वहीं, रूस का कहना है कि हमले की उसकी कोई योजना नहीं है और उसकी सेनाएं यूक्रेन की सीमा पर देश को नेटो से प्रसार से बचाने के लिए खड़ी हैं. इस बीच पुतिन की घोषणा ने अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को भड़का दिया है. अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों की भी घोषणा की है.

अब ये बहस भी तेज हो गई है कि कौन देश किस पाले में है. भारत किसका समर्थन करेगा, इस पर अमेरिका और रूस दोनों की निगाहें टिकी हुई है लेकिन लेकिन भारत ने अभी तक इस मसले पर अपनी निष्पक्षता को बरकरार रखा है.

यूक्रेन मुद्दे पर क्या है प्रमुख देशों का रूख?

भारत- भारत अमेरिका और रूस दोनों के करीब है. अमेरिका चाहता है कि भारत उसका समर्थन करे लेकिन भारत की रणनीतिक साझेदारी रूस के साथ बहुत अधिक है. रक्षा उपकरणों को लेकर रूस पर भारत की निर्भरता बनी हुई है. इधर, चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच भी भारत के लिए रूस का समर्थन जरूरी है. ऐसे में भारत के लिए किसी एक का पक्ष लेना बेहद मुश्किल होगा. भारत ने अभी तक इस मसले पर निष्पक्ष रूख अपनाया है. 

Advertisement

मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन की स्थिति पर आपात बैठक में भारत ने एक संतुलित रूख अपनाते हुए कहा था कि इस मामले में सभी पक्ष संयम बरतें.

यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा था, 'भारत चाहता है कि यूक्रेन-रूस सीमा तनाव तुरंत कम हो और सभी देशों के जायज सुरक्षा हित बरकरार रहें.' उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है. दोनों पक्षों ने हाल के दिनों में तनाव कम करने के लिए जो पहल की है, उस पर फिर से सोचने की जरूरत है.

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी यूक्रेन-रूस के मुद्दे को लेकर कहा है कि भारत चाहता है, बातचीत के माध्यम से कोई समाधान निकले. राजनाथ सिंह ने भरोसा जताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच बातचीत से कोई न कोई समाधान निकलेगा.

अमेरिका- अमेरिका शुरू से ही यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना के जमावड़े का विरोध करता आया है. वो हमेशा से चेतावनी देता आया है कि रूसी सेनाएं कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकती हैं. रूसी राष्ट्रपति द्वारा यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र क्षेत्र की मान्यता दिए जाने को लेकर अमेरिका ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं.

Advertisement

जो बाइडन ने रूस की दो वित्तीय संस्थाओं वीईबी और रूसी मिलिट्री बैंक को प्रतिबंधित कर दिया है. बाइडन ने घोषणा की है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से रूसी अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों को हटाया जा रहा है. इसके साथ ही अमेरिका रूस के अमीर लोगों और उनके परिवारों पर भी प्रतिबंध लगा रहा है.

वहीं, यूक्रेन को अमेरिका हथियारों के जरिए मदद दे रहा है. मंगलवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को और अधिक हथियार देने का वादा किया है. हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वो अपनी सेना को रूस के खिलाफ यूक्रेन में नहीं भेजेगा.

यूरोपियन यूनियन- यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने यूक्रेन के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा था कि यूक्रेन के खिलाफ खतरा पूरे यूरोप के लिए खतरा है. ईयू ने रूसी बैंकों और ईयू के वित्तीय बाजारों तक रूस की पहुंच पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके साथ ही ईयू उन रूसी सांसदों को निशाना बनाने की भी तैयारी कर रहा है जो यूक्रेन पर रूस के पक्ष पर सहमत हैं. ईयू रूस को वैश्विक बैंकिंग सिस्टम से भी काट सकता है.

ब्रिटेन- ब्रिटेन का कहना है कि रूस का यूक्रेन पर हमला शुरू हो चुका है और इसे देखते हुए रूस पर प्रतिबंध और कड़े किए जाएंगे. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि ये बेहद खतरनाक संकेत है और रूस के कदम से यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन होगा.

Advertisement

ब्रिटेन ने रूस के 6 बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिया है. रूस के तीन बड़े अरबपतियों की ब्रिटेन स्थित संपत्ति को भी फ्रिज कर दिया गया है और ब्रिटेन में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है.

चीन- हाल के दिनों में रूस और चीन के बीच की नजदीकी बढ़ी है और अमेरिका के साथ चीन के रिश्ते खराब स्थिति में पहुंच चुके हैं. कुछ समय पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रूस की सुरक्षा चिंताओं को जायज बताते हुए कहा था कि इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसका समाधान होना चाहिए.

रूस नहीं चाहता कि यूक्रेन नेटो में शामिल हो लेकिन अमेरिका, पश्चिमी देश और खुद यूक्रेन भी चाहता है कि यूक्रेन नेटो का सदस्य बने. इसी बात को लेकर तनाव और बढ़ा हुआ है. चीन ने रूस की इसी सुरक्षा चिंता का हवाला देते हुए कहा है कि रूस की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए. चीन का पक्ष रूस की तरफ लग रहा है लेकिन अभी तक चीन ने रूस के हालिया कदम का समर्थन नहीं किया है. चीन ने भी भारत की तरह संतुलित बयान दिया है. हालांकि, कहा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र या अन्य मंचों पर चीन रूस का साथ दे सकता है.

Advertisement

फ्रांस- रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने सोमवार को राष्ट्र के नाम एक संबोधन में यूक्रेन के दो क्षेत्रों को स्वतंत्र प्रदेश की मान्यता दी थी. फ्रांस ने पुतिन के संबोधन को 'पागलपन' करार दिया है. फ्रांस ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति ने फांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से जो वादा किया था, उसे तोड़ दिया और अब फ्रांस रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएगा.

फ्रांस ने यूरोपीय यूनियन द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी स्वागत किया है. मैक्रों लगातार ये कहते रहे हैं कि रूस ने अगर यूक्रेन पर हमला किया तो उसे बड़ी कीमत चुकानी होगी.

जर्मनी- जर्मनी ने रूस की नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन को बंद कर दिया है. रूस इस परियोजना के जरिए जर्मनी को गैस पहुंचाने वाला था. जर्मनी ने कहा है कि रूस के हालिया कदम को लेकर ये फैसला किया गया है. जर्मनी शुरू से ही यूक्रेन के पक्ष में खड़ा रहा है.

बेलारूस- बेलारूस रूस का बेहद करीबी सहयोगी रहा है. ऐसे वक्त में जब रूस-यूक्रेन का तनाव चरम पर है और कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है, बेलारूस रूस के साथ मिलकर मिलिट्री एक्सरसाइज कर रहा है. 10 फरवरी को शुरू हुआ मिलिट्री एक्सरसाइज 20 फरवरी को खत्म होने वाला था लेकिन अब उसे फिर से बढ़ा दिया गया है और दोनों देशों की सेनाएं यूक्रेन की सीमा के पास मिलिट्री एक्सरसाइज कर रही हैं.

Advertisement

बेलारूस ने सोमवार को कहा कि उसके क्षेत्र से रूसी सेनाएं तब जाएंगी जब नेटो पीछे हटेगा. नेटो में शामिल देश पोलैंड, लातविया और लिथुआनिया की सीमाएं बेलारूस से मिलती हैं, जहां पर नेटो ने सेनाओं की तैनाती कर रखी है.

इटली- इटली का इस मुद्दे पर कहना है कि वो समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है. साथ ही इटली ने कहा है कि वो नेटो को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को बरकरार रखेगा.

क्रोएशिया- क्रोएशिया ने भी इस मुद्दे पर दबी जुबान ने रूस का पक्ष लिया है. क्रोएशिया का कहना है कि रूस की सुरक्षा चिंताओं पर सोचने की जरूरत है. कुछ समय पहले क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलानोविक ने कहा था कि अगर रूस के साथ विवाद बढ़ा तो वो दुनिया के सबसे भ्रष्ट देश यूक्रेन के साथ नहीं, बल्कि रूस का साथ देंगे.

उनके इस बयान पर जब देश में ही बवाल हुआ तो प्रधानमंत्री एंड्रेज प्लेंकोविक को इसका खंडन करना पड़ा. उन्होंने कहा कि वो सरकार की तरफ से यूक्रेन के लोगों से क्षमा मांगते हैं. साथ ही उन्होंने ये भी याद किया कि जब क्रोएशिया युगोस्लाविया से अलग हुआ था तो इसे मान्यता सबसे पहले यूक्रेन ने ही दी थी.

जापान- जापान ने कहा है कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो वो अमेरिका का साथ देगा. प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने रूस के हालिया कदम की निंदा करते हुए कहा है कि ये अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन है. रूस ने यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहान्स्क को स्वतंत्र प्रदेश की मान्यता दी है.

Advertisement

इन प्रदेशों के अमीर लोगों की जापान में स्थित संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है और उनका वीजा भी रद्द कर दिया गया है. 

मध्य-पूर्व के देश- अगर रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ा तो मध्य-पूर्व के सभी देशों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा. इन देशों में महंगाई बढ़ेगी जिससे देशों में तनाव और हिंसा बढ़ने की आशंका है. इससे राजनीतिक अस्थिरता भी आ सकती है.

नेटो का सदस्य तुर्की रूस के भी करीब रहा है. हालांकि, राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने रूस के हालिया कदम को अस्वीकार्य बताया है. उन्होंने कहा है कि सभी पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए. तुर्की ने साथ ही पश्चिमी देशों की आलोचना की है कि वो इस संकट से ठीक से निपट नहीं पा रहे हैं.

वहीं, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात आदि देशों की नजदीकी अमेरिका से बढ़ी है लेकिन रूस के साथ भी इनके संबंध अच्छे हैं. इसलिए इन देशों को किसी एक का पक्ष लेने में मुश्किल होगी. 

Advertisement
Advertisement