Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुई जंग को एक हफ्ता बीत चुका है. इस जंग को दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी लड़ाई माना जा रहा है. इतने दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक लड़ाई किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है. यूक्रेन के शहरों में रूसी सेना के हमले जारी हैं तो जमीन पर भी दोनों देशों की सेनाएं आपस में भिड़ रही है. इस एक हफ्ते के युद्ध में 7 टर्निंग प्वाइंट भी आए, जिसने जंग का रूख ही बदल दिया.
1. सीधे हमले की रणनीति
रूस और यूक्रेन के बीच महीनों से तनाव था. ये तो तय था कि यूक्रेन पर हमला होगा, लेकिन इस बात की आशंका बहुत कम था कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन सीधे हमला करेंगे. माना जा रहा था कि रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहंस्क को अलग करने के लिए हमला करेगा. पुतिन ने भी कहा था कि उनका मकसद यूक्रेन पर कब्जा करना नहीं, बल्कि डिमिलिटराइज करना है. लेकिन युद्ध के पहले ही दिन से रूस ने सीधे हमले की रणनीति अपनाई. पहले ही दिन रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलें दागीं. इसके बाद रूस ने यूक्रेन के सभी तमाम शहरों में बमबारी और मिसाइलें दागीं. कीव के अलावा दूसरे बड़े शहर खारकिव पर रूसी हमले लगातार जारी हैं. साथ ही खेरसान, मारियूपोल, खेरसन, सुमी, चेर्नीहिव जैसे शहरों पर भी रूस सीधे हमले कर रहा है.
2. मिसाइलों का इस्तेमाल
जंग के पहले ही दिन से रूस ने यूक्रेन पर मिसाइल अटैक करना शुरू कर दिया था. पहले ही दिन राजधानी कीव स्थित बोरिस्पिल एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाके सुनाई दिए. रूस ने खुद दावा किया था कि वो हवाई हमले और मिसाइल अटैक से यूक्रेन के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है. न सिर्फ रूस, बल्कि यूक्रेन ने भी मिसाइल अटैक किए. दावा किया गया कि पहले ही दिन यूक्रेन ने दो रूसी कार्गो शिप पर मिसाइल से हमला किया. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सोमवार को रूसी सेना ने खारकिव में 400 से ज्यादा मिसाइलें दागीं. इंस्टीट्यूट फॉर स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक, मंगलवार को रूस ने खारकिव समेत कई शहरों में क्रूज मिसाइल से हमले किए. दशकों बाद ये पहली बार है जब मिसाइल का इस तरह से इस्तेमाल देखा गया.
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3. रिहायशी इलाकों पर बमबारी
रूस ने कहा था कि उसका मकसद सिर्फ डिमिलटराइज करना है, आम नागरिक उसके निशाने पर नहीं हैं. लेकिन यूक्रेन का दावा है कि रूस लगातार आम नागरिकों को टारगेट कर रहा है. रूस ने कीव, खारकिव समेत कई बड़े शहरों में रिहायशी इलाकों पर बमबारी की. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अब तक रूसी हमलों में यूक्रेन के 750 से ज्यादा नागरिकों को नुकसान पहुंचा है. इनमें से कइयों की मौत हो चुकी है. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने भी रूसी हमलों को युद्ध अपराध बताया था.
4. जेलेंस्की का भागने से इनकार
पिछले साल अगस्त में जब अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी हुई तो वहां के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर चले गए. माना जा रहा था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी ऐसा ही करेंगे, लेकिन उन्हें देश छोड़ने से इनकार कर दिया. ब्रिटेन ने उन्हें राजनीतिक शरण देने की बात कही. वहीं, अमेरिका ने उन्हें देश से निकालने के लिए पोलैंड की सीमा पर तीन विमान भी भेजे, लेकिन जेलेंस्की ने उन्हें ये कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें राइड नहीं, हथियारों की जरूरत है ताकि वो अपने देश की रक्षा कर सकें. जेलेंस्की के देश छोड़ने पर इनकार करने के बाद यूक्रेन में आम नागरिक भी रूस के खिलाफ सड़कों पर उतर आए. जगह-जगह रूसी सेना को रोकते हुए यूक्रेनी नागरिकों की तस्वीरें सामने आ रही हैं.
5. अमेरिका का सेना भेजने से इनकार
जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से माना जा रहा था कि अमेरिका इस जंग में अपनी सेना उतार सकता है. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सोमवार को साफ कर दिया कि वो रूस पर प्रतिबंध लगाना जारी रखेंगे, लेकिन यूक्रेन में अपनी सेना नहीं उतारेंगे. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि NATO देशों की एक इंच जमीन पर भी किसी को कब्जा नहीं करने देंगे. बाइडेन के इस रूख से साफ हो गया है कि जब तक लड़ाई रूस और यूक्रेन के बीच चलेगी, तब तक अमेरिका रूस के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन शुरू नहीं करेगा.
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6. चौतरफा इकोनॉमिक वार
यूक्रेन पर हमलों को लेकर रूस पर कड़े प्रतिबंध भी लगा दिए गए हैं. आसमान से लेकर बैंक तक रूस पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. अमेरिका, कनाडा समेत यूरोपियन यूनियन के सभी 27 देशों ने रूस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. इसके अलावा अमेरिका ने रूस को इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम SWIFT से भी बैन कर दिया है, जिससे रूस का बैंकिंग सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुआ. साथ ही जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई देशों में रूस के नागरिकों की संपत्तियां भी जब्त की जा रही है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जर्मनी ने रूसी अरबपति एलिशेर उस्मानोव का 600 मिलियन डॉलर का याच जब्त कर लिया है.
7. यूरोपियन यूनियन की मेंबरशिप का मामला
जंग के बीच ही यूक्रेन ने एक नई रणनीति भी अपनाई. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूरोपियन यूनियन की सदस्यता देने की अर्जी पर साइन किए. इसे यूरोपियन संसद ने भी मंजूर भी कर लिया. हालांकि, यूक्रेन को अभी यूरोपियन यूनियन की सदस्यता नहीं मिली है और इसमें काफी समय भी लग सकता है. लेकिन युद्ध के बीच ऐसा करना बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नहीं चाहेंगे कि यूक्रेन को यूरोपियन यूनियन का सदस्य बनाया जाए.