यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद युद्ध जारी है. इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि मास्को ने यूक्रेन के माध्यम से तेल और गैस का निर्यात जारी रखा है, जहां क्रेमलिन ने तीन सप्ताह पहले पश्चिमी प्रतिबंधों की लहर के साथ सैनिकों को भेजा था. पुतिन का कहना है कि रूस यूक्रेन सहित सभी एनर्जी एक्सपोर्ट जारी रखे हुए है.
गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले को देखते हुए अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. प्रतिबंधों से परेशान रूस की तेल कंपनियां भारत को तेल पर भारी डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की तेल कंपनियां भारत को कच्चे तेल की कीमत पर 25-27 प्रतिशत तक की छूट की पेशकश कर रहीं हैं.
यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस के कई बैंकों को अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम स्विफ्ट बैंकिंग सिस्टम से हटा दिया गया है जिसके बाद रूस के लिए अन्य देशों के साथ व्यापार करना मुश्किल हो गया है. रूस की सरकार इस स्थिति से निकलने के लिए एक नए भुगतान तंत्र का निर्माण करने में लगी है. अगर ये हो जाता है तभी भारत के साथ रूस के तेल का व्यापार बढ़ पाएगा.
रूस से हालांकि भारत कम मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है. अपने इस्तेमाल का 70 फीसदी हिस्सा भारत OPEC देशों से खरीदता है. युद्ध से भारत के व्यापार को भी कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं होने वाला है लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर युद्ध का काफी असर होने वाला है.
क्यों है रूस- यूक्रेन विवाद?
रूस-यूक्रेन के बीच तनाव नवंबर 2013 में तब शुरू हुआ जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का कीव में विरोध शुरू हुआ. यानुकोविच को रूस का समर्थन हासिल था जबकि प्रदर्शनकारियों को अमेरिका और ब्रिटेन का. बगावत के चलते फरवरी 2014 में यूक्रेन के राष्ट्रपति यानुकोविच को देश छोड़कर रूस में शरण लेनी पड़ी थी. यहीं से विवाद की शुरुआत हुई और पलटवार करते हुए रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर लिया. बात यही नहीं रुकी, रूस ने यूक्रेन के अलगाववादियों को खुला समर्थन दिया. फिर तनातनी बढ़ती गई और अब रूस-यूक्रेन के बीच कई दिनों से जंग जारी है.