scorecardresearch
 

Russia-Ukraine War: यूक्रेन पर पुतिन की Playbook का क्या है सीक्रेट, इस प्लान से अमेरिका क्यों है परेशान?

Russia-Ukraine War: रूस अपना वही फॉर्मूला यूक्रेन पर आजमा रहा है, जो उसने 2008 में जॉर्जिया में अपनाया था. उस वक्त भी रूस ने जॉर्जिया के दो इलाकों को अलग देश के तौर पर मान्यता देकर वहां सेना भेज दी थी और अब यूक्रेन में भी ऐसा ही किया जा रहा है.

Advertisement
X
रूस दूसरे देश पर आरोप लगाता है और फिर उस पर हमला कर देता है. (फाइल फोटो-AP/PTI)
रूस दूसरे देश पर आरोप लगाता है और फिर उस पर हमला कर देता है. (फाइल फोटो-AP/PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अमेरिका की चिंता- चरणों में हमला करेगा रूस
  • सैन्य कार्रवाई के अलावा साइबर हमले भी करेगा
  • रूस यूक्रेन पर आरोप लगाकर उस पर हमला करेगा

Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच अब हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहंस्क (Luhansk) को अलग देश के तौर पर मान्यता देकर वहां सेना भेज दी है. अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है. अमेरिका-ब्रिटेन समेत कई देशों ने रूस पर प्रतिबंधों का ऐलान किया है तो जो बाइडेन (Joe Biden) ने उस इलाके में सैनिकों को मूव करने का आदेश दे दिया है.

Advertisement

दुनियाभर में इस तनाव के बीच तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका जताई जाने लगी है. इस तनाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है रूसी राष्ट्रपति पुतिन की सीक्रेट प्लेबुक की. सबसे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन (Antony Blinken) ने पुतिन की प्लेबुक (Putin's Playbook) का जिक्र किया था और कहा था कि यूक्रेन का तनाव इस प्लान की शुरुआत भर है. 

एंटनी ब्लिंकेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि यूक्रेन की सीमा के पास रूस ने 1.5 लाख से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं और आने वाले दिनों में जंग छिड़ सकती है. उन्होंने आशंका जताई कि रूस यूक्रेन की राजधानी कीव को भी निशाना बना सकता है.

ये भी पढ़ें-- Ukraine Russia Crisis: पुतिन के मन की वो बात जो पलटना चाहती है दुनिया का इतिहास!

Advertisement

आखिर क्या है पुतिन की प्लेबुक?

- पिछले साल एक किताब आई थी. ये किताब लिखी थी अमेरिकी खुफिया एजेंसी की एजेंट रहीं रेबेका कॉफलर (Rebekah Koffler) ने. उनकी किताब का टाइटल था 'Putin's Playbook: Russia's Secret Plan to Defeat America' यानी अमेरिका को हराने के लिए रूस का सीक्रेट प्लान. 

- इस किताब में कॉफलर ने बताया था कि सोवियत संघ के पतन को व्लादिमीर पुतिन ने कैसे रूस के अपमान के तौर पर लिया था. उन्होंने ये भी लिखा कि पश्चिमी देशों के साथ युद्ध में पुतिन रूस को एक ग्रेट पावर के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं. 

-1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो कई सारे देशों का जन्म हुआ. इन देशों में कई तरह के संघर्ष भी हुए. जैसे मोल्दोवा के ट्रांसनिस्ट्रिया, जॉर्जिया के अंदर साउथ ओसेशिया और अबकाजिया. इन संघर्षों में रूस बड़ी भूमिका में हमेशा खुद को देखता है.

- इसी तरह रूस ने डोनबास (Donbas) में किया. डोनबास पूर्वी यूक्रेन का हिस्सा है. रूस ने माना कि डोनेत्स्क और लुहंस्क के अलगाववादी स्थानीय थे, जिन्होंने यूक्रेन सरकार के खिलाफ हथियार उठाए थे. हालांकि, ऐसा माना जाता है कि डोनेत्स्क और लुहंस्क के अलगाववादियों को रूस ने समर्थन दिया और उन्हें हथियार मुहैया कराए. अब रूस ने इन इलाकों को अलग देश की मान्यता दे रखी है. प्लेबुक के मुताबिक रूस का अगला कदम हो सकता है डोनबास को पूरी तरह यूक्रेन से काटकर वहां भी सेना घुसा देना. ताकि यूक्रेन बिखर जाए और पश्चिमी देशों के लिए इन इलाकों में सेना रखना मुश्किल हो जाए.

Advertisement

- इसकी भूमिका 2014 से ही तैयार हो रही है. डोनबास में तभी से रूस समर्थक विद्रोहियों के साथ यूक्रेन का संघर्ष जारी है. रूस यहां यूक्रेन की कार्रवाई को 'नरसंहार' बताता है और पिछले कुछ महीनों से पुतिन लगातार डोनबास का मुद्दा उछाल रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि रूस आने वाले दिनों में ये नया मोर्चा भी खोल सकता है. रूस की आक्रामक रणनीति इस रूप में सामने आ सकती है कि एक इलाके पर तेजी से हमला किया जाए और विरोधियों को हराकर फिर वहां से सेना हटा ले. इससे एक तरफ रूस का प्रभाव मजबूत होगा तो दूसरी ओर ये संदेश देने में भी वह सफल हो जाएगा कि अमेरिका या कोई और देश रूस से उसे बचा नहीं सकता.

ये भी पढ़ें-- Russia-Ukraine Conflict: रूस-यूक्रेन तनाव पर होनी चाहिए आपकी नजर, आम आदमी पर होने वाला है ये असर

जॉर्जिया में रूस कर चुका है इसका ट्रायल

- दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को खत्म करने के लिए पुतिन के जिस प्लेबुक की चर्चा हो रही है और जिसकी शुरुआत आज यूक्रेन में दिख रही है. 2008 में रूस उसका ट्रायल जॉर्जिया में कर चुका है जहां तेज हमले के साथ रूस ने विरोधी ताकतों को घुटने पर ला दिया था. 2008 में भी रूस ने जॉर्जिया पर नरसंहार का आरोप लगाया था.

Advertisement

- यूक्रेन की तरह जॉर्जिया भी नाटो में शामिल होना चाहता था. रूस का मकसद था कि जॉर्जिया नाटो में शामिल न हो और रूस इसमें सफल भी रहा. 2008 में रूस ने उस समय जॉर्जिया के अबकाजिया और दक्षिण ओसेशिया को भी अलग देश की मान्यता दे दी थी और अपनी सेना भेज दी थी. अब यही फॉर्मूला यूक्रेन पर भी आजमाया जा रहा है.

प्लेबुक के अनुसार कई चरणों में हमला करेगा रूस!

- अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इसी प्लेबुक का जिक्र करते हुए कहा कि रूस यूक्रेन पर कई चरणों में हमला कर सकता है. उन्होंने बताया कि रूस यूक्रेन पर नागरिकों के खिलाफ ड्रोन स्ट्राइक और बमबारी के आरोप लगा सकता है. रूस इसे 'नरसंहार' बता सकता है.

- उन्होंने बताया कि इसके बाद यूक्रेन में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा का हवाला देकर रूस जवाबी कार्रवाई की बात कर सकता है, क्योंकि ऐसा ही उसने 2008 में जॉर्जिया के साथ किया था. रूस का मीडिया भी इसे हवा देने का काम करेगा.

- ब्लिंकेन ने ये भी बताया कि तीसरा काम रूस ये करेगा कि वो यूक्रेन पर साइबर अटैक कर सकता है और वहां के कम्युनिकेशन को जाम कर सकता है. इसके बाद रूसी टैंक और सैनिक राजधानी कीव समेत पहले से तय किए गए यूक्रेनी ठिकानों पर हमला करेंगे. विरोधियों को बैकफुट पर लाने के लिए रूस साइबर हमलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करता रहा है. जनवरी महीने के मध्य में यूक्रेन के 70 से अधिक सरकारी वेबसाइट डाउन हो गई. इसके लिए कीव ने रूस पर आरोप लगाए.

Advertisement

ये भी पढ़ें-- Vladimir Putin Profile: रूस की ताकत का राज क्या है? पुतिन की वो पावर जो अब पूरी दुनिया से ले रही टक्कर

रूस को यूक्रेन से दिक्कत क्या है?

- दुनिया जानना चाहती है कि आखिर रूस को यूक्रेन से दिक्कत क्या है? इसे समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा. 2014 में रूस ने सेना भेजकर यूक्रेन के एक हिस्से क्रीमिया को अलग कर अपने में मिला लिया था. ऐसा यूक्रेन में रूस समर्थक राष्ट्रपति को सत्ता में हटाए जाने के बाद रूस ने किया था. वर्तमान यूक्रेन सरकार को रूस अमेरिका का पिट्ठू बताता है. रूस आरोप लगाता है यूक्रेन नाटो में शामिल होने वाला है और ऐसा होने पर अमेरिका और नाटो देशों की सेनाएं यूक्रेन में आए जाएंगी, उनके हथियार आ जाएंगे और रूस की सीमा के काफी करीब उन्हें अड्डा मिल जाएगा.

- पुतिन इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते और इसीलिए रूस यूक्रेन को लेकर आक्रामक है. क्योंकि यूक्रेन समेत पूर्वी यूरोप के कई देश जो पहले सोवियत गुट में थे लेकिन विभाजन के बाद अमेरिकी गुट के करीब आ गए और उनमें से कई अब नाटो के सदस्य भी हैं और यूक्रेन भी उनकी राह पर है. रूस इसीलिए यूक्रेन को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है.

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement