यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग के बीच नाटो सदस्य पोलैंड के बॉर्डर पर कथित रूसी मिसाइल के हमले के बाद हड़कंप मच गया है. पोलैंड में हुए मिसाइल अटैक में दो लोगों के मारे जाने की खबर है. अटैक ऐसे समय पर हुआ, जब इंडोनेशिया के बाली में जी-20 देशों की समिट का आयोजन चल रहा है. हालांकि, अभी तक पूरी तरह से यह साफ नहीं हो पाया है कि मिसाइल रूस की ही थी. पोलैंड के विदेश मंत्रालय का दावा है कि जिस मिसाइल से हमला किया गया है, वह रूसी है. दूसरी ओर, रूस ने इस हमले से साफ इनकार कर दिया है.
यूक्रेन और रूस की जंग के बीच यह पहला मौका है, जब युद्ध का सीधा असर किसी तीसरे देश पर पड़ा है. और वह भी खासतौर पर उस देश पर जो नाटो का सदस्य हो. दरअसल, नाटो का एक नियम है कि जो भी इसके सदस्य हैं, अगर कोई एक सदस्य पर भी हमला करता है तो सारे सदस्य देश उसकी मदद करते हैं. ऐसे में अगर यह रूसी मिसाइल ही निकलती है तो यह मामला और ज्यादा बढ़ सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत सभी वैश्विक नेताओं ने पोलैंड पर हुए हमले की निंदा की है.
बॉर्डर पर मिसाइल हमले पर क्या बोला पोलैंड ?
पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने दावा करते हुए कहा है कि जिस मिसाइल से हमला किया गया, वह रूस में बनी हुई है. वहीं पोलैंड के राष्ट्रपति एंड्रेज डूडा ने पहले कहा कि ज्यादा संभावनाएं यही हैं कि यह मिसाइल रूस की है, लेकिन अभी भी इसका मूल पता किया जा रहा है. बाद में पोलैंड के राष्ट्रपति ने बिना रूस का नाम लिए बिना कहा कि अभी तक कोई पक्का सबूत नहीं मिला है कि किसने इस मिसाइल को दागी है.
पोलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक गंभीर स्थिति है, लेकिन हम शांति के साथ इस पर विचार कर रहे हैं. साथ ही राष्ट्रपति ने कहा कि हमले के बाद पोलैंड ने अपनी मिलिट्री की तैयारियों को बढ़ा दिया है.
यूएस अधिकारी का दावा- मिसाइल यूक्रेन की फोर्स ने चलाई
पोलैंड समेत सभी देश यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ये मिसाइल को कहां से दागी गई है. इसी बीच एक यूएस अधिकारी ने दावा किया है कि यह मिसाइल रूसी नहीं बल्कि यूक्रेन की सेना ने चलाई थी. एपी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की फोर्स ने यह मिसाइल रूस की ओर से आ रही मिसाइल के जवाब में चलाई थी, जो पोलैंड में जाकर गिर गई.
अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री तक की आई प्रतिक्रिया
जी-20 समिट में शामिल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इस मिसाइल के मामले में अभी तक रूस को लेकर दावा नहीं किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि जिस मिसाइल से पोलैंड में हमला किया गया, वह रूस की ओर से नहीं दागी गई थी.
हालांकि, जो बाइडन ने वादा करते हुए कहा कि यूएस इस मामले की जांच में पूरी तरह से पोलैंड का साथ देगा. साथ ही उन्होंने जी-20 समिट में ही ग्रुप 7 और नाटो देशों के मौजूद सदस्यों के साथ पोलैंड की हालात पर चर्चा के लए एक बैठक भी की है.
वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि पोलैंड पर मिसाइल अटैक के बाद सभी रिपोर्ट्स पर ब्रिटेन की नजर है. जैसे ही पता चलेगा कि क्या हुआ, ब्रिटेन की ओर से सहयोगी देशों का समर्थन किया जाएगा. ऋषि सुनक ने आगे कहा कि इस मामले में ब्रिटेन नाटो समेत अपने सभी अंतराष्ट्रीय सहयोगियों से भी बात कर रहा है.
नाटो के एक सदस्य पर हमला, यानी सभी पर हमला
हालांकि, अभी तक यह बिल्कुल भी साफ नहीं है कि हमला रूस की ओर से किया गया है या नहीं.
दरअसल, पोलैंड नाटो सदस्य है और नाटो के सभी सदस्यों में एक संधि है कि अगर कोई भी एक सदस्य पर अटैक करता है तो उसे सभी सदस्यों के ऊपर अटैक माना जाएगा. ऐसे में यूक्रेन से युद्ध के बीच अगर रूस की ओर से यह हमला किया गया है तो व्लादिमीर पुतिन ने सीधा जंग को बढ़ाने का ऐलान कर दिया है.
नाटो चार्टर का आर्टिकल 4 क्या कहता है ?
नाटो के आर्टिकल 4 के अनुसार, अगर किसी भी सदस्य देश की क्षेत्रीय संप्रभुता, राजनीतिक स्वतंत्रता या सुरक्षा को धमकी मिलती है तो सभी सदस्य मिलकर इस पर चर्चा करते हैं. इस दौरान सभी सदस्य देश इस पर एक दूसरे को दी जा रही सलाह और जानकारी को ध्यान में रखते हैं और कोई भी एक्शन लेने से पहले कई मुद्दों पर बातचीत करते हैं.
नाटो वेबसाइट के अनुसार, इस आर्टिकल के तहत सभी देश एक दूसरे के साथ चर्चा कर किसी भी संकट को कूटनीति के जरिए सुलझाने की कोशिश करते हैं, जिससे सैन्य विवाद से बचा जा सके.
नाटो आर्टिकल 4 का मतलब सिर्फ बातचीत, हस्तक्षेप नहीं?
चार्टर के अनुसार, नाटो आर्टिकल 4 के एक्टिव हो जाने का यही मतलब है कि सभी सदस्य देश बैठकर बात करेंगे और कूटनीति के जरिए अगला हल निकालने की कोशिश करेंगे. हालांकि, ऐसा नहीं है कि अगर किसी एक नाटो देश पर हमला हो तो सभी सदस्य उसके साथ मिलकर कार्रवाई करने के लिए बाध्य हों. लेकिन अगर उन्हें लगता है तो सभी सदस्य एक साथ विचार कर सैन्य कार्रवाई का फैसला कर सकते हैं.
तो किस आर्टिकल की मदद से नाटो सदस्य कर सकते हैं हस्तक्षेप
नाटो चार्टर के आर्टिकल 5 के तहत नाटो सदस्य किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए एकजुट हो सकते हैं. आर्टिकल 5 कहता है कि अगर यूरोप या नॉर्थ अमेरिका में किसी भी एक सदस्य पर हमला होता है तो वह सभी के ऊपर माना जाएगा. जिसके बाद अगर जरूरी है तो नॉर्थ एटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हर एक सदस्य सेना का इस्तेमाल कर सकता है.
यह आर्टिकल नाटो को सशस्त्र प्रतिक्रिया को लागू करने का अधिकार देता है. अभी तक सिर्फ एक ही बार नाटो का आर्टिकल 5 लागू किया गया है. जब अमेरिका में 9/11 का आतंकी हमला हुआ था और उसके प्रतिक्रिया में नाटो सदस्यों की सेना अफगानिस्तान में घुस गई थी.
अभी तक 7 बार किया जा चुका है नाटो का इस्तेमाल
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, साल 1949 में नाटो बनने के बाद से अभी तक आर्टिकल 4 का इस्तेमाल 7 बार किया जा चुका है. हाल ही में, लातविया, पोलैंड, बुल्गारिया, चेक गणराज्य, इस्टोनिया, रोमानिया और स्लोवाकिया ने यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर परामर्श करने के लिए इस आर्टिकल का इस्तेमाल किया था.
साल 2015 में तुर्की ने आर्टिकल 4 को लागू किया था. दरअसल, उस समय तुर्की के सीरिया से मिले बॉर्डर पर सुसाइड बॉम्बिंग में 30 लोगों की मौत हो गई थी. उस समय नाटो ने इस मामले में कड़ी निंदा तो जताई थी, लेकिन मामले को उसी स्थिति में छोड़ दिया था. यानी किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया था.
यूक्रेन नहीं है पोलैंड, हमला करना पड़ेगा भारी
सबसे पहली बात यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है. इसी वजह से पश्चिमी देश यूक्रेन का समर्थन तो कर रहे हैं लेकिन यह बाहरी समर्थन है. अभी तक वेस्ट देशों की ओर से सीधी सैन्य मदद नहीं की गई है. लेकिन पोलैंड की स्थिति में यह बात काफी अलग है. पोलैंड नाटो का सदस्य है और अगर उस पर हमला होता है तो यह सीधा झगड़ा पश्चिम के साथ हो जाएगा.