भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी के दूसरी बार रूस न जाने की खबरों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार को पांच दिवसीय यात्रा पर रूस पहुंचे हैं. हर साल आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष मिलते हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दूसरे साल भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस नहीं जा रहे हैं.
भारत और रूस बारी-बारी से इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करते हैं जिसमें भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति एक-दूसरे के देश का दौरा करते हैं. अब तक भारत-रूस शिखर सम्मेलन 21 बार आयोजित हो चुका है.
पिछला शिखर सम्मेलन 6 दिसंबर, 2021 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत का दौरा किया था. इसके बाद से ही यह वार्षिक शिखर सम्मेलन नहीं हो सका है क्योंकि दोनों ही देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक-दूसरे के देशों का दौरा नहीं कर रहे हैं.
यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध छिड़ने के बाद पीएम मोदी पिछले साल वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस नहीं गए और रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी सितंबर में दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत नहीं आए जिससे सम्मेलन नहीं हो सका.
इस साल भारत-रूस शिखर सम्मेलन की मेजबानी रूस को करनी थी लेकिन पीएम मोदी इस बार भी रूस नहीं गए. सूत्रों ने कहा कि पीएम मोदी के रूस न जाने को लेकर अभी तक कोई कारण नहीं बताया गया है लेकिन इस शिखर सम्मेलन की शेड्यूलिंग की चुनौती एक प्रमुख कारण है.
जयशंकर की रूस यात्रा में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
विदेश मंत्री जयशंकर अपनी पांच दिवसीय रूस यात्रा में रूसी नेताओं से मिलेंगे. अपनी यात्रा के दौरान वो सेंट पीटर्सबर्ग की भी यात्रा करेंगे.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अपनी यात्रा के दौरान आर्थिक मामलों पर चर्चा के लिए रूस के उप प्रधान मंत्री और उद्योग और व्यापार मंत्री डेनिस मंटुरोव से मिलेंगे. वो रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मिलेंगे जिस दौरान द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी.
विदेश मंत्रालय ने रविवार को जयशंकर की इस यात्रा को लेकर कहा, 'भारत-रूस साझेदारी, जिसकी परीक्षा समय भी ले चुका है. स्थिर और लचीली बनी हुई है. इस साझेदारी में विशेष रणनीतिक साझेदारी की भावना बनी हुई है.'
दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं, खासकर व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और कनेक्टिविटी के मुद्दे पर बातचीत करेंगे.
भारत और रूस की मजबूत रक्षा साझेदारी
भारत हथियारों के लिए अब भी बहुत हद तक रूस पर निर्भर है. भारत रूस से 60-70% तक हथियार खरीदता है लेकिन हाल के वर्षों में भारत सरकार अपने हथियार खरीद में विविधता लाने की कोशिश कर रही है.
रूस के कारण महंगाई बढ़ने से रोकने में कामयाब रहा भारत
फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तब पूरे विश्व में तेजी से महंगाई बढ़ी. भारत भी उसकी चपेट में आया लेकिन जल्द ही उस झटके से उबर भी गया. दरअसल, रूस ने भारत को रियायती दरों पर तेल बेचना शुरू किया जिससे भारत को काफी मुनाफा हुआ. रूसी तेल की वजह से भारत की तेल आधारित अर्थव्यवस्था में मंदी का ज्यादा असर नहीं हुआ और महंगाई को कम रखने में मदद मिली है.
परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में भी रूस भारत का एक अहम भागीदार है. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) भारत और रूस के बीच एक प्रमुख परमाणु परियोजना है. केएनपीपी के यूनिट 1 और 2 पहले ही चालू हो चुके हैं और यूनिट 3, 4,5 और 6 का निर्माण चल रहा है.
अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देश लगभग चार दशकों से सहयोग कर रहे हैं. भारत के पहले ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम 'गगनयान' में भी रूस सहयोग कर रहा है.